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रस्म तौशा भराई के साथ उर्स की रवायतों का सिलसिला शुरु
Updated Sun, 04 Mar 2018 11:53 PM IST
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रस्म तौशा भराई के साथ उर्स की रवायतों का सिलसिला शुरु
गंगोह (सहारनपुर)। हजरत कुतबे आलम का उर्स होने से एक सप्ताह पहले होने वाली रस्म तौशा घड़ा भराई रविवार को संपन्न हो गई। इसी के साथ उर्स की रस्मों रवायतों का सिलसिला शुरू हो गया है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दीनी लोगों ने भाग लिया।
दरगाह परिसर में होने वाली रस्म तौशा शरीफ पर सज्जादा नशीन महताब आलम ने प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हजरत मोहम्मद साहब की शिक्षा के अनुसार अखलाक, किरदार, मोहब्बत व इंसानियत के उसूलों पर चलकर इन बुजुर्गों को ऊंचा मुकाम मिला। कार्यक्रम की शुरूआत नात-ए-पाक से हुई। दरगाह पर लंगर का आयोजन भी किया गया। इस कार्यक्रम में शादाब जहां, ख्वाजा सुहेल, आरिफ खान, सलीम फरीदी, खालिद कुद्दुसी, डा. इस्लाम, जफर कुददुसी, समेत सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। तौशा शरीफ की रस्म में दूर दराज से आए लोग भी शामिल रहे। इससे पहले सुबह के समय हजरत कुतबे आलम की दरगाह पर गुस्ल की रस्म अदा की गई। इस कार्यक्रम में भी भीड़ रही। उधर, हजरत कुतबे आलम, शेख दाउद, शेख सादिक, मामू मौला बख्श, शेख अबू सईद की दरगाहों पर हो रही तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पीर-फकीरों का आना भी शुरू हो गया है। दुकान लगाने के काम में भी तेजी आ गई है। जायरीनों के ठहरने के स्थान भी तैयार कर दिए गए है।
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गंगोह (सहारनपुर)। हजरत कुतबे आलम का उर्स होने से एक सप्ताह पहले होने वाली रस्म तौशा घड़ा भराई रविवार को संपन्न हो गई। इसी के साथ उर्स की रस्मों रवायतों का सिलसिला शुरू हो गया है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दीनी लोगों ने भाग लिया।
दरगाह परिसर में होने वाली रस्म तौशा शरीफ पर सज्जादा नशीन महताब आलम ने प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हजरत मोहम्मद साहब की शिक्षा के अनुसार अखलाक, किरदार, मोहब्बत व इंसानियत के उसूलों पर चलकर इन बुजुर्गों को ऊंचा मुकाम मिला। कार्यक्रम की शुरूआत नात-ए-पाक से हुई। दरगाह पर लंगर का आयोजन भी किया गया। इस कार्यक्रम में शादाब जहां, ख्वाजा सुहेल, आरिफ खान, सलीम फरीदी, खालिद कुद्दुसी, डा. इस्लाम, जफर कुददुसी, समेत सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। तौशा शरीफ की रस्म में दूर दराज से आए लोग भी शामिल रहे। इससे पहले सुबह के समय हजरत कुतबे आलम की दरगाह पर गुस्ल की रस्म अदा की गई। इस कार्यक्रम में भी भीड़ रही। उधर, हजरत कुतबे आलम, शेख दाउद, शेख सादिक, मामू मौला बख्श, शेख अबू सईद की दरगाहों पर हो रही तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पीर-फकीरों का आना भी शुरू हो गया है। दुकान लगाने के काम में भी तेजी आ गई है। जायरीनों के ठहरने के स्थान भी तैयार कर दिए गए है।
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