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नगर निगम में खंगाली जाएगी कर्मचारियों की कुंडली
Updated Wed, 08 Nov 2017 12:38 AM IST
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नगर निगम में खंगाली जाएगी कर्मचारियों की कुंडली
सहारनपुर। नगर निगम कर्मचारियों में इन दिनों खलबली मची है। इसकी वजह मुख्य नगर लेखा परीक्षक की लेखाधिकारी को लिखी वह चिट्ठी है जिसमें उन्होंने कर्मचारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और वेतन निर्धारण (एसीपी) संबंधी फाइलें मांगी हैं। माना जा रहा है कि फाइलें खुलने के बाद कई कर्मचारियों का डिमोशन होना तय माना जा रहा है। उधर, कुछ कर्मचारी फाइलों को दबाए रखने के लिए अनेक स्तर से दबाव भी बनाने में जुट गए हैं।
कई वर्ष पहले नगर निगम में प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी लिपिक संवर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और वेतन निर्धारित किए गए थे। निगम सूत्रों के अनुसार पदोन्नति और वेतन निर्धारण में गड़बड़ी की गई। गलत एसीपी निर्धारण से यह हुआ कि जिन कर्मचारियों को 35 से 40 हजार रुपये वेतन मिलना चाहिए था, वे 60 से 70 हजार रुपये वेतन पा रहे हैं। कुछ दिन पहले ही मामला मुख्य नगर लेखा परीक्षक बालेंदु मिश्र के संज्ञान में आया है।
उन्होंने छह नवंबर 2017 को लेखाधिकारी को पत्र लिखकर परीक्षण के लिए संबंधित कर्मचारियों की फाइलें मांगी हैं। पत्र जारी होते ही संबंधित कर्मचारियों में खलबली है। कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि फाइलों की जांच में खामियां अपने आप सामने आ जाएंगी। इसके बाद कई लिपिकों का डिमोशन होना तय है। उधर, मुख्य नगर लेखा परीक्षक बालेदु मिश्र का कहना है कि फाइलें मांगी गई हैं, जिनके परीक्षण के बाद ही स्थिति साफ होगी।
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सता रहा रिकवरी होने का डर
नगर निगम की ही तरह कलक्ट्रेट में भी कुछ कर्मचारियों का एसीपी यानी वेतन निर्धारण में गड़बड़ी हुई। इसकी वजह से कर्मचारी अधिक वेतन पा रहे थे। जब मामला सामने आया तो उसकी जांच हुई। वर्तमान में गलत तरीके से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों से रिकवरी की तैयारी चल रही है। नगर निगम में भी अधिक वेतन पाने वाले लिपिकों से इसी तरह रिकवरी होना तय है, जिसे लेकर कर्मचारी टेंशन में हैं।
कइयों की नौकरी भी अवैध
नगर निगम में अनेक कर्मचारी गलत तरीके से नौकरी कर रहे हैं। नियमानुसार यदि किसी के माता-पिता दोनों ही सरकारी नौकरी में हो और किसी एक की मृत्यु हो जाए तो नौकरी में मृतक आश्रित का लाभ नहीं मिल सकता। मगर नगर निगम में ऐसे एक नहीं अनेक मामले हैं।
कर्मचारियों की गलत नियुक्ति, पदोन्नति या गलत तरीके से वेतन निर्धारण की मुझे जानकारी नहीं है। यदि लिखित में शिकायत आती है तो जांच कराकर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
--। गौरव वर्मा, नगरायुक्त।
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सहारनपुर। नगर निगम कर्मचारियों में इन दिनों खलबली मची है। इसकी वजह मुख्य नगर लेखा परीक्षक की लेखाधिकारी को लिखी वह चिट्ठी है जिसमें उन्होंने कर्मचारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और वेतन निर्धारण (एसीपी) संबंधी फाइलें मांगी हैं। माना जा रहा है कि फाइलें खुलने के बाद कई कर्मचारियों का डिमोशन होना तय माना जा रहा है। उधर, कुछ कर्मचारी फाइलों को दबाए रखने के लिए अनेक स्तर से दबाव भी बनाने में जुट गए हैं।
कई वर्ष पहले नगर निगम में प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी लिपिक संवर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति, पदोन्नति और वेतन निर्धारित किए गए थे। निगम सूत्रों के अनुसार पदोन्नति और वेतन निर्धारण में गड़बड़ी की गई। गलत एसीपी निर्धारण से यह हुआ कि जिन कर्मचारियों को 35 से 40 हजार रुपये वेतन मिलना चाहिए था, वे 60 से 70 हजार रुपये वेतन पा रहे हैं। कुछ दिन पहले ही मामला मुख्य नगर लेखा परीक्षक बालेंदु मिश्र के संज्ञान में आया है।
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उन्होंने छह नवंबर 2017 को लेखाधिकारी को पत्र लिखकर परीक्षण के लिए संबंधित कर्मचारियों की फाइलें मांगी हैं। पत्र जारी होते ही संबंधित कर्मचारियों में खलबली है। कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि फाइलों की जांच में खामियां अपने आप सामने आ जाएंगी। इसके बाद कई लिपिकों का डिमोशन होना तय है। उधर, मुख्य नगर लेखा परीक्षक बालेदु मिश्र का कहना है कि फाइलें मांगी गई हैं, जिनके परीक्षण के बाद ही स्थिति साफ होगी।
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सता रहा रिकवरी होने का डर
नगर निगम की ही तरह कलक्ट्रेट में भी कुछ कर्मचारियों का एसीपी यानी वेतन निर्धारण में गड़बड़ी हुई। इसकी वजह से कर्मचारी अधिक वेतन पा रहे थे। जब मामला सामने आया तो उसकी जांच हुई। वर्तमान में गलत तरीके से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों से रिकवरी की तैयारी चल रही है। नगर निगम में भी अधिक वेतन पाने वाले लिपिकों से इसी तरह रिकवरी होना तय है, जिसे लेकर कर्मचारी टेंशन में हैं।
कइयों की नौकरी भी अवैध
नगर निगम में अनेक कर्मचारी गलत तरीके से नौकरी कर रहे हैं। नियमानुसार यदि किसी के माता-पिता दोनों ही सरकारी नौकरी में हो और किसी एक की मृत्यु हो जाए तो नौकरी में मृतक आश्रित का लाभ नहीं मिल सकता। मगर नगर निगम में ऐसे एक नहीं अनेक मामले हैं।
कर्मचारियों की गलत नियुक्ति, पदोन्नति या गलत तरीके से वेतन निर्धारण की मुझे जानकारी नहीं है। यदि लिखित में शिकायत आती है तो जांच कराकर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
--। गौरव वर्मा, नगरायुक्त।