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पार्थिव शिवलिंग पूजा से पाप मुक्त होता है जीव
Updated Fri, 04 Aug 2017 12:23 AM IST
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सहारनपुर। स्वामी कालेन्द्रानंद जी महाराज ने कहा कि 1008 पार्थिव शिवलिंग पूजा से जीव पाप मुक्त होता है।
बृहस्पतिवार को श्रीराम कृष्ण विवेकानंद संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रावण पूजा में 1008 पार्थिव शिवलिंग पूूजा की गई। स्वामी कालेंद्रानंद ने कहा कि पार्थिव शिवलिंग पूजा से जीव से समस्त पापों का शमन होता है। उन्होंने कहा कि पार्थिव पूजा में शिव तत्व जागृत होकर जीव को सकारात्मक ऊर्जा से संचित कर सद्मार्ग की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण सृष्टि ही पार्थिव रूप है। जिसका सृजन और विसर्जन शिव के अधीन है। शिव ही परम शांति का मूल है। इस अवसर पर अरुण स्वामी, नरेश चंदेल, नवीन सैनी, राघव गुप्ता, राममूर्ति, रमेश, अनिल ठाकुर, पूजा, विभा, गीता, सुचेता, उमा, पिंकी, वर्षा, किरण, राधा, पूनम, सुमन, बृजबाला, तारा आदि रहीं।
तीनों कालों में समान महत्व रखते हैं वैदिक सिंद्घात
सहारनपुर। आर्य समाज में चल रहे 64वें वेद प्रचार सप्ताह के तीसरे दिन भजन यज्ञ के माध्यम से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
बृहस्पतिवार को खलासी लाइन स्थित आर्यसमाज प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में यज्ञ में मुख्य यज्ञमान ऋषिपाल आर्य सपत्नीक रहे। वैदिक भजनोपदेशक विरेंद्र मिश्र ने भजनों के माध्यम से माहौल भक्तिमय बनाए रखा। उन्होंने तुझसे धन अंत में छूटेगा, जाने किस तरह राह में लुटेगा भजन सुनाकर भक्तजनों को झूूमने को मजबूर कर दिया। आचार्य सोमदेव आदि ने भी विचार रखे। मंच संचालन डॉ. पूर्णचंद शास्त्री ने किया। मनीराम सैनी, रमेश राजा, धर्मपाल, मृदु राणा, शोभा आर्या, जयप्रकाश धीमान, अनिल आर्या, राजकुमार आर्य, सुरेंद्र चौहान, रघुवीर सिंह, रविकांत राणा, सुरेश सेठी, शांति देवी, देवेद्र आर्य, रविन्द्र डोगरा, सविता आर्य आदि रहे।
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बृहस्पतिवार को श्रीराम कृष्ण विवेकानंद संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रावण पूजा में 1008 पार्थिव शिवलिंग पूूजा की गई। स्वामी कालेंद्रानंद ने कहा कि पार्थिव शिवलिंग पूजा से जीव से समस्त पापों का शमन होता है। उन्होंने कहा कि पार्थिव पूजा में शिव तत्व जागृत होकर जीव को सकारात्मक ऊर्जा से संचित कर सद्मार्ग की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण सृष्टि ही पार्थिव रूप है। जिसका सृजन और विसर्जन शिव के अधीन है। शिव ही परम शांति का मूल है। इस अवसर पर अरुण स्वामी, नरेश चंदेल, नवीन सैनी, राघव गुप्ता, राममूर्ति, रमेश, अनिल ठाकुर, पूजा, विभा, गीता, सुचेता, उमा, पिंकी, वर्षा, किरण, राधा, पूनम, सुमन, बृजबाला, तारा आदि रहीं।
तीनों कालों में समान महत्व रखते हैं वैदिक सिंद्घात
सहारनपुर। आर्य समाज में चल रहे 64वें वेद प्रचार सप्ताह के तीसरे दिन भजन यज्ञ के माध्यम से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
बृहस्पतिवार को खलासी लाइन स्थित आर्यसमाज प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में यज्ञ में मुख्य यज्ञमान ऋषिपाल आर्य सपत्नीक रहे। वैदिक भजनोपदेशक विरेंद्र मिश्र ने भजनों के माध्यम से माहौल भक्तिमय बनाए रखा। उन्होंने तुझसे धन अंत में छूटेगा, जाने किस तरह राह में लुटेगा भजन सुनाकर भक्तजनों को झूूमने को मजबूर कर दिया। आचार्य सोमदेव आदि ने भी विचार रखे। मंच संचालन डॉ. पूर्णचंद शास्त्री ने किया। मनीराम सैनी, रमेश राजा, धर्मपाल, मृदु राणा, शोभा आर्या, जयप्रकाश धीमान, अनिल आर्या, राजकुमार आर्य, सुरेंद्र चौहान, रघुवीर सिंह, रविकांत राणा, सुरेश सेठी, शांति देवी, देवेद्र आर्य, रविन्द्र डोगरा, सविता आर्य आदि रहे।
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