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टैक्स रिफंड में फंस गए 100 करोड़
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 25 Dec 2017 01:20 AM IST
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अपनी कारीगरी से दुनिया भर में काष्ठ कला का डंका बजाने वाला वुडकार्विंग उद्योग इन दिनों फिर से मुसीबत में है। नियम और कायदों में आए बदलाव के चलते जीएसटी लागू होने के बाद निर्यातकों को टैक्स में रियायत नहीं पा रही है।
टैक्स स्लैब बढ़ने से उनकी लागत बढ़ी है और टैक्स रिफंड नहीं होने से पिछले छह महीनों में सहारनपुर के निर्यातकों के करीब 100 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में फंसा हुआ है।
ड्यूटी ड्रा बैक का लाभ नहीं मिलने से उद्यमियों के बिजनेस का एक बड़ा फंड उनके हाथ में नहीं है। अब नए आर्डर के लिए उनके पास फंड का अभाव भी एक बड़ा कारण बनने लगा है। दूसरी ओर से आईजीएसटी के नियमों में ड्रा बैक की जानकारी नहीं होने से भी इस समस्या के जल्द समाधान की उम्मीद नहीं दिख रही है।
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सहारनपुर से दुनिया के कई देशों में लकड़ी की बेहतरीन नक्काशी वाले उत्पाद पहुंचते हैं। यही कारण है कि कई सौ करोड़ रुपये के एक्सपोर्ट के चलते सहारनपुर का उत्पाद अब भी दूसरे देशों को पछाड़ रहा है।
मगर, केंद्र सरकार की नई टैक्स नीति जीएसटी के चलते निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। वुडकार्विंग उद्योग में ज्यादातर चीजें टैक्स से बाहर थी। जिससे निर्यातकों को ड्यूूटी ड्रा बैक मिल जाता था।
मगर, लकड़ी, फेविकोल, पेंट सहित अन्य चीजों में टैक्स लगने या बढ़ने से इनकी लागत भी बढ़ गई। इसके अलावा आईजीएसटी में ड्रा बैक का लाभ भी अब तक इन उद्यमियों को नहीं मिल पाया है।
सहारनपुर में दो दर्जन से ज्यादा एक्सपोर्ट हाउस ऐसी हैं, जिनके करोड़ों रुपये ड्रा बैक नहीं होने के चलते फंसा हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक वुडकार्विंग उद्योग से जुड़े निर्यातकों के करीब 100 करोड़ रुपये टैक्स रिफंड नहीं होने से फंसा हुआ है। यहां बता दें कि अब तक सामान्य तौर पर वुडकार्विंग उद्योग को करीब 12 फीसदी का टैक्स रिफंड होता था।
मगर, अब ज्यादातर चीजों को उद्यमी 12 फीसदी तक टैक्स देकर खरीदते हैं और उन्हें अपने उत्पाद को तैयार करने में इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में उनका रिफंड भी काफी ज्यादा हो गया है।
हम लकड़ी के उत्पाद तैयार करने में 18 फीसदी सेल कर 12 फीसदी तक टैक्स दे रहे हैं। ऐसे में हमारी लागत बढ़ गई है। मगर रिफंड नहीं मिलने से कारोबार प्रभावित हो रहा है।
-शेख फैजान अध्यक्ष, सहारनपुर वुड कार्विंग
रिफंड ना होने से छोटे कारोबारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जब से जीएसटी लागू हुई है, तब से छोटे कारोबारियों का करोड़ों रुपये फंसा हुआ है, जो रिफंड नहीं हुआ है। - परविंद्र सिंह, अध्यक्ष वुडकार्विंग मैन्यूफैक्चूयरिंग एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन सहारनपुर
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टैक्स स्लैब बढ़ने से उनकी लागत बढ़ी है और टैक्स रिफंड नहीं होने से पिछले छह महीनों में सहारनपुर के निर्यातकों के करीब 100 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में फंसा हुआ है।
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ड्यूटी ड्रा बैक का लाभ नहीं मिलने से उद्यमियों के बिजनेस का एक बड़ा फंड उनके हाथ में नहीं है। अब नए आर्डर के लिए उनके पास फंड का अभाव भी एक बड़ा कारण बनने लगा है। दूसरी ओर से आईजीएसटी के नियमों में ड्रा बैक की जानकारी नहीं होने से भी इस समस्या के जल्द समाधान की उम्मीद नहीं दिख रही है।
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सहारनपुर से दुनिया के कई देशों में लकड़ी की बेहतरीन नक्काशी वाले उत्पाद पहुंचते हैं। यही कारण है कि कई सौ करोड़ रुपये के एक्सपोर्ट के चलते सहारनपुर का उत्पाद अब भी दूसरे देशों को पछाड़ रहा है।
मगर, केंद्र सरकार की नई टैक्स नीति जीएसटी के चलते निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। वुडकार्विंग उद्योग में ज्यादातर चीजें टैक्स से बाहर थी। जिससे निर्यातकों को ड्यूूटी ड्रा बैक मिल जाता था।
मगर, लकड़ी, फेविकोल, पेंट सहित अन्य चीजों में टैक्स लगने या बढ़ने से इनकी लागत भी बढ़ गई। इसके अलावा आईजीएसटी में ड्रा बैक का लाभ भी अब तक इन उद्यमियों को नहीं मिल पाया है।
सहारनपुर में दो दर्जन से ज्यादा एक्सपोर्ट हाउस ऐसी हैं, जिनके करोड़ों रुपये ड्रा बैक नहीं होने के चलते फंसा हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक वुडकार्विंग उद्योग से जुड़े निर्यातकों के करीब 100 करोड़ रुपये टैक्स रिफंड नहीं होने से फंसा हुआ है। यहां बता दें कि अब तक सामान्य तौर पर वुडकार्विंग उद्योग को करीब 12 फीसदी का टैक्स रिफंड होता था।
मगर, अब ज्यादातर चीजों को उद्यमी 12 फीसदी तक टैक्स देकर खरीदते हैं और उन्हें अपने उत्पाद को तैयार करने में इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में उनका रिफंड भी काफी ज्यादा हो गया है।
हम लकड़ी के उत्पाद तैयार करने में 18 फीसदी सेल कर 12 फीसदी तक टैक्स दे रहे हैं। ऐसे में हमारी लागत बढ़ गई है। मगर रिफंड नहीं मिलने से कारोबार प्रभावित हो रहा है।
-शेख फैजान अध्यक्ष, सहारनपुर वुड कार्विंग
रिफंड ना होने से छोटे कारोबारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जब से जीएसटी लागू हुई है, तब से छोटे कारोबारियों का करोड़ों रुपये फंसा हुआ है, जो रिफंड नहीं हुआ है। - परविंद्र सिंह, अध्यक्ष वुडकार्विंग मैन्यूफैक्चूयरिंग एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन सहारनपुर