{"_id":"62531b62fdcf885fc97fe112","slug":"worship-of-sidhdatri-in-navrat-rampur-news-mbd4243247102","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां सिद्घिदात्री की पूजा अर्चना कर कन्याएं जिमाईं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मां सिद्घिदात्री की पूजा अर्चना कर कन्याएं जिमाईं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुर। चैत्र नवरात्र महोत्सव में नवरात्र में नवमी पर देवी के नवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की। मंदिरों में सुबह से लोगों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। भक्तों ने माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। घरों और मंदिरों में यज्ञ हुए, जिसमें लोगों ने विश्व कल्याण की भावना के साथ लोगों ने आहुति दी। घरों में भी श्रद्धालुओं ने महामाई का विधि-विधान के साथ पूजन किया और कन्याओं को जिमाकर उन्हें उपहार भेंट किए। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर लोगों ने उपवास खोला।
रविवार को सुबह से ही चैत्र नवरात्र पर्व की धूम शुरू हो गई थी। श्रद्धालुओं अपने घरों में भव्य रूप से सजे महामाई के दरबार मे मातारानी का पूजन किया। देवी मंत्रों के उच्चारण के साथ माता रानी का आह्वान किया। मातारानी का विधि-विधान से पूजन किया। दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का वाचन कर यज्ञ में यज्ञ में पूर्णाहुति दी गईं। भगवान गणेश और मां दुर्गे की आरती उतारी। यज्ञ में पूर्णाहुति देकर विश्व कल्याण और समाज में सुख शांति की प्रार्थना की गई। आरती उतारकर प्रसाद वितरित किया गया। पूजा अर्चना और आरती करने के बाद कन्याएं जिमाने का सिलसिला शुरु हो गया। श्रद्धालुओं ने कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा कर जिमाया। कन्याओं की आरती उतारकर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। कन्याओं को शगुन के रूप में उपहार आदि देकर विदा किया। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर उपवास खोला। दोपहर को महिलाओं ने छंद गाकर मातारानी का गुणगान किया।
विज्ञापन
रविवार को सुबह से ही चैत्र नवरात्र पर्व की धूम शुरू हो गई थी। श्रद्धालुओं अपने घरों में भव्य रूप से सजे महामाई के दरबार मे मातारानी का पूजन किया। देवी मंत्रों के उच्चारण के साथ माता रानी का आह्वान किया। मातारानी का विधि-विधान से पूजन किया। दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का वाचन कर यज्ञ में यज्ञ में पूर्णाहुति दी गईं। भगवान गणेश और मां दुर्गे की आरती उतारी। यज्ञ में पूर्णाहुति देकर विश्व कल्याण और समाज में सुख शांति की प्रार्थना की गई। आरती उतारकर प्रसाद वितरित किया गया। पूजा अर्चना और आरती करने के बाद कन्याएं जिमाने का सिलसिला शुरु हो गया। श्रद्धालुओं ने कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा कर जिमाया। कन्याओं की आरती उतारकर उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। कन्याओं को शगुन के रूप में उपहार आदि देकर विदा किया। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर उपवास खोला। दोपहर को महिलाओं ने छंद गाकर मातारानी का गुणगान किया।
विज्ञापन