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महिलाओं के अधिकारों के बारे में दी जानकारी
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रामपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव रमेश कुशवाहा की अध्यक्षता में तहसील मिलक में वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।
सचिव ने विभिन्न विषय के सम्बन्ध में जानकारी दी। बताया कि लैंगिक न्याय एक मानव अधिकार है। हर महिला और लड़की को बिना किसी डर के गरिमा और स्वतंत्रता से जीने का अधिकार है। लैंगिक न्याय विकास, गरीबी में कमी के लिए अपरिहार्य है और मानव प्रगति को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। पिछली शताब्दी के दौरान समाज में जबरदस्त प्रगति के बावजूद, महिलाओं के साथ अभी भी समान व्यवहार नहीं किया जाता है और उन्हें समान अवसर नहीं दिए जाते हैं। संविधान के अनुसार सभी व्यक्तियों को समानता का अधिकार है एवं महिलाओं को संविधान में बहुत से अधिकार प्राप्त हैं, जो महिलाओं कि रक्षा करते हैं। घरेलू हिंसा कानून के संबंध में बताया कि भारत में कई घरेलू हिंसा कानून हैं। सचिव ने जुवेनाइल जस्टिस के संबंध में बताया गया कि अगर किसी आरोपी की आयु 18 वर्ष से कम हो, तो उस आरोपी का मुकदमा अदालत के स्थान पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चलता है। आरोपी पाए जाने पर किशोर को अधिकतम तीन वर्ष के लिए किशोर सुधार गृह भेजा जाता है। कानून में परिवर्तन के बाद रैगिंग जैसे अपराध करते हुए पाए जाने पर 16 वर्ष से अधिक वाले आरोपी को तीन वर्ष की सजा और दस हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कार्यक्रम में तहसीलदार मिलक अशोक कुमार, नायब तहसीलदार, तकनीकी सहायक, अमीन, लेखपाल तथा ग्रामवासीगण आदि उपस्थित रहे।
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सचिव ने विभिन्न विषय के सम्बन्ध में जानकारी दी। बताया कि लैंगिक न्याय एक मानव अधिकार है। हर महिला और लड़की को बिना किसी डर के गरिमा और स्वतंत्रता से जीने का अधिकार है। लैंगिक न्याय विकास, गरीबी में कमी के लिए अपरिहार्य है और मानव प्रगति को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। पिछली शताब्दी के दौरान समाज में जबरदस्त प्रगति के बावजूद, महिलाओं के साथ अभी भी समान व्यवहार नहीं किया जाता है और उन्हें समान अवसर नहीं दिए जाते हैं। संविधान के अनुसार सभी व्यक्तियों को समानता का अधिकार है एवं महिलाओं को संविधान में बहुत से अधिकार प्राप्त हैं, जो महिलाओं कि रक्षा करते हैं। घरेलू हिंसा कानून के संबंध में बताया कि भारत में कई घरेलू हिंसा कानून हैं। सचिव ने जुवेनाइल जस्टिस के संबंध में बताया गया कि अगर किसी आरोपी की आयु 18 वर्ष से कम हो, तो उस आरोपी का मुकदमा अदालत के स्थान पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चलता है। आरोपी पाए जाने पर किशोर को अधिकतम तीन वर्ष के लिए किशोर सुधार गृह भेजा जाता है। कानून में परिवर्तन के बाद रैगिंग जैसे अपराध करते हुए पाए जाने पर 16 वर्ष से अधिक वाले आरोपी को तीन वर्ष की सजा और दस हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कार्यक्रम में तहसीलदार मिलक अशोक कुमार, नायब तहसीलदार, तकनीकी सहायक, अमीन, लेखपाल तथा ग्रामवासीगण आदि उपस्थित रहे।
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