खाकी ने बेगुनाह को भेजा जेल: पीड़ित बोला- मैं चीखता रहा पर पुलिस ने एक न सुनी, कसूर इतना कि मेरा नाम है सुरेश
जेल से रिहा होकर अपने घर पहुंचे सुरेश ने बताया कि 11 जनवरी को किसी काम से जा रहा था। रास्ते में ही टांडा थाने की पुलिस ने उसे उठा लिया। वह उनसे रास्ते भर कहता रहा कि वह बेगुनाह है, उसके खिलाफ कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं है।
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रामपुर के टांडा थाना की पुलिस ने वाहवाही लूटने चक्कर में 11 जनवरी को वारंटी के हमनाम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वह तीन दिनों तक जेल में रहा और बाद में कोर्ट के आदेश पर रिहा हुआ। जेल से रिहा होकर घर पहुंचे काशीपुर (उत्तराखंड) के कुंडेसरा निवासी सुरेश ने बताया कि वह पुलिस कर्मियों को चीख-चीखकर बताता रहा कि साहब मेरे खिलाफ कोई मुकदमा नहीं है। लेकिन पुलिस वालों ने मेरी एक न सुनी । पुलिस वाले हंसते रहे और बोले कि सभी ऐसा ही कहते हैं।
जेल से रिहा होकर अपने घर पहुंचे सुरेश ने बताया कि 11 जनवरी को किसी काम से जा रहा था। रास्ते में ही टांडा थाने की पुलिस ने उसे उठा लिया। वह उनसे रास्ते भर कहता रहा कि वह बेगुनाह है, उसके खिलाफ कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं है। लेकिन पुलिस वालों ने उसकी एक नहीं सुनी। थाने ले जाकर दो सिपाहियों के साथ उसकी फोटो खिंचवाकर गाड़ी में बैठाकर रामपुर भेज दिया गया। उसका कहना है कि पुलिस ने उसका मोबाइल फोन, सोने की अंगूठी और पर्स ले लिया था, जो अभी तक वापस नहीं किया गया।
सुरेश का कहना है कि वह तीन दिनों तक जेल में रहा। उसे जेल में नींद नहीं आई। वह सोचता रहा कि पुलिस वाले भी हमारे बीच के ही हैं फिर वो इतना अमानवीय कैसे हो सकते हैं। उसका आरोप है कि उसके घर की कुछ महिलाएं ऊधमसिंह नगर के आम आदमी पार्टी (आप) के जिला उपाध्यक्ष चंदन सिंह सूर्यवंशी के साथ दढ़ियाल चौकी पहुंची थीं। पुलिस ने कुछ बाहरी लोगों को बुला लिया। महिलाओं को तो भगा दिया गया, लेकिन पुरुषों को पुलिस ने थाने में बैठा लिया। जब काशीपुर से कुछ अन्य लोग पहुंचे तो उनको छोड़ा गया।
सुरेश का कहना है कि अब वह कहीं भी जाता है तो लोग उसे अजीब नजरों से देख रहे हैं। जैसे कि वह गुनाहगार हो। उसका कहना है कि पुलिस वालों ने उनका मानसिक उत्पीड़न किया है। वो आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोर्ट में गुहार लगाएगा। क्योंकि पुलिस अधिकारी तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से रहे।
यह मानवीय चूक का मामला है। नाम और गांव का नाम एक समान होने की वजह से पुलिस को गलतफहमी हो गई। पूरे मामले की जांच सीओ स्वार को सौंपी गई है। उनकी जांच रिपोर्ट में अगर पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं तो उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -अशोक कुमार शुक्ला एसपी, रामपुर