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स्थानीय निकाय चुनाव से गायब हैं स्थानीय मुद्दे

Tue, 14 Nov 2017 01:07 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला / रामपुर
ब्यूरो अमर उजाला / रामपुर Updated Tue, 14 Nov 2017 01:07 AM IST
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sthaniye nikay chunav se gayab hain sthaniye mudde
रामपुर के विकास नगर में जलभराव के बीच से गुजरता युवक।
टूटी-फूटी सड़कें, जगह-जगह जलभराव और बदहाल सफाई व्यवस्था जैसे स्थानीय मुद्दे नगर निकाय के चुनावी शोरगुल में नहीं दिखाई दे रहे हैं। चेयरमैन पद की प्रत्याशी इन मुद्दों को भूलकर कोई पार्टी की छवि के सहारे तो कोई अपने परिवार के सदस्यों के कंधे का सहारा लेकर चुनाव मैदान में उतरी हैं। विकास के मुद्दों की नही जाति-धर्म के समीकरणों की गुणा-भाग की जा रही है। वादे तो सभी लंबे-लंबे कर रहे हैं, लेकिन जनता किससे प्रभावित होगी यह तो आने वाला समय बताएगा फिलहाल इन मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं लगा रहा है। 
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शहर की मिनी संसद के लिए इन दिनों जबर्दस्त घमासान हो रहा है। बात रामपुर पालिका की जाए तो यहां पालिकाध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित है। इस पद के लिए कुल नौ उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जबकि 43 वार्डों के लिए 346 प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं। मौजूदा वक्त में प्रत्याशियों का प्रचार खूब तेजी से चल रहा है। मगर, इस प्रचार के शोर में शहर के तमाम वो स्थानीय मुद्दे गायब हैं जो कि जनता के लिए नासूर बनते जा रहे हैं। शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या हो या फिर टूटी हुई सड़कों की समस्या। इनको दुरुस्त कराने में भी दिक्कत महसूस की जा रही है। शहर की सफाई व्यवस्था का हाल किसी से छुपा नहीं है। 
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शहर में रजा टैक्सटाइल्स का इलाका हो या फिर पनवड़िया और या फिर बरेली गेट जैसा इलाका। ज्यादातर इलाकों में सफाई व्यवस्था का हाल बुरा है। गंदगी के ढेर पालिका के तमाम दावों की पोल खोल रहे हैं। मुख्य सड़कों को छोड़ दिया जाए तो तमाम गलियों का हाल बुरा हो चुका है। ज्वाला नगर, रफत का लोनी, लक्ष्मी नगर, विष्णु विहार, पनवड़िया, श्याम कालोनी, रामनाथ कालोनी, तिलक नगर कालोनी, घोसियान, चौक मोहम्मद सईद खां समेत तमाम मुहल्लों की गलियां टूटी फूटी हैं, जिसकी वजह से लोग परेशान हैं, लेकिन इन मुद्दों को कोई नहीं छूना चाहा रहा है। ज्यादातर प्रत्याशी अपनी पार्टी के भरोसे अपनी जीत की नैया को पार लगाना चाहते हैं। इसी तरह तमाम प्रत्याशी तो ऐसी भी मैदान में हैं, जो परिवार के सदस्यों की शख्सियत के सहारे चुनाव लड़ना चाह रहे हैं। जाति और धर्म के समीकरणों को भी फिट किया जा रहा है। 
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