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सपा नेता आजम खां को मिली राहत, आरपीएस के मामले में जमानत मंजूर
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सपा नेता आजम खां को मिली राहत, आरपीएस के मामले में जमानत मंजूर
एमपी-एमएलए कोर्ट में हुई सुनवाई, सुनाया फैसला
रामपुर। सपा नेता आजम खां को रामपुर पब्लिक स्कूल की मान्यता में एनओसी फर्जीवाड़े के मामले में रामपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट (सेशन ट्रायल) से राहत मिल गई है। कोर्ट ने इस मामले में आजम खां के जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए जमानत मंजूर कर दी है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आजम खां को इस मामले में अंतरिम जमानत दी गई थी। जिसमें यह शर्त लगाई थी कि दो सप्ताह के भीतर स्थाई जमानत के लिए प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल करें।
साल 2019 में शहर कोतवाली में बेसिक शिक्षा विभाग के तत्कालीन नगर शिक्षाधिकारी प्रेम सिंह राणा ने अज्ञात के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें आरोप था कि रामपुर पब्लिक स्कूल की मान्यता के लिए ली गई एक एनओसी पर तीन विद्यालयों का संचालन किया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में विवेचना करते हुए सपा नेता आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा और बीएसए दफ्तर के एक बाबू तौफीक अहमद के नाम शामिल करते हुए आरोपी बनाया था। इसके बाद पुलिस ने कुछ दिनों पूर्व ही इस मामले में सपा नेता एवं जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खां को भी आरोपी बनाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने स्थाई जमानत के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। जिसके बाद आजम खां के अधिवक्ता ने 31 मई को जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। जिस पर मंगलवार को एमपी-एमएलए कोर्ट (सेशन ट्रायल) में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आजम खां के अधिवक्ता जुबैर अहमद खां ने तर्क दिया कि सपा नेता आजम खां को राजनीतिक रंजिश के चलते झूठा फंसाया गया है। पत्रावली पर सबूत मौजूद नहीं हैं। साथ ही घटना का कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है। जबकि, अभियोजन की ओर से दलील दी गई कि आरोपी द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर दस्तावेजों में हेराफेरी की गई है। जिसके सबूत पत्रावली पर मौजूद हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सपा नेता आजम खां की स्थायी जमानत मंजूर कर ली है।
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एमपी-एमएलए कोर्ट में हुई सुनवाई, सुनाया फैसला
रामपुर। सपा नेता आजम खां को रामपुर पब्लिक स्कूल की मान्यता में एनओसी फर्जीवाड़े के मामले में रामपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट (सेशन ट्रायल) से राहत मिल गई है। कोर्ट ने इस मामले में आजम खां के जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए जमानत मंजूर कर दी है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आजम खां को इस मामले में अंतरिम जमानत दी गई थी। जिसमें यह शर्त लगाई थी कि दो सप्ताह के भीतर स्थाई जमानत के लिए प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल करें।
साल 2019 में शहर कोतवाली में बेसिक शिक्षा विभाग के तत्कालीन नगर शिक्षाधिकारी प्रेम सिंह राणा ने अज्ञात के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें आरोप था कि रामपुर पब्लिक स्कूल की मान्यता के लिए ली गई एक एनओसी पर तीन विद्यालयों का संचालन किया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में विवेचना करते हुए सपा नेता आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा और बीएसए दफ्तर के एक बाबू तौफीक अहमद के नाम शामिल करते हुए आरोपी बनाया था। इसके बाद पुलिस ने कुछ दिनों पूर्व ही इस मामले में सपा नेता एवं जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खां को भी आरोपी बनाया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने स्थाई जमानत के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। जिसके बाद आजम खां के अधिवक्ता ने 31 मई को जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। जिस पर मंगलवार को एमपी-एमएलए कोर्ट (सेशन ट्रायल) में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आजम खां के अधिवक्ता जुबैर अहमद खां ने तर्क दिया कि सपा नेता आजम खां को राजनीतिक रंजिश के चलते झूठा फंसाया गया है। पत्रावली पर सबूत मौजूद नहीं हैं। साथ ही घटना का कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है। जबकि, अभियोजन की ओर से दलील दी गई कि आरोपी द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर दस्तावेजों में हेराफेरी की गई है। जिसके सबूत पत्रावली पर मौजूद हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सपा नेता आजम खां की स्थायी जमानत मंजूर कर ली है।
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