आजम खां: फिर मुश्किल में सपा नेता का चार दशक लंबा राजनीतिक सफर, जेल से लेकर छापेमारी तक की पूरी कहानी
जनता पार्टी सेक्युलर के टिकट पर वर्ष 1980 में पहली बार रामपुर के विधायक बन विधानसभा पहुंचने वाले आजम खां के लिए यह सबसे मुश्किल भरा दौर है। वह यूपी में चार बार कद्दावर मंत्री रहने के साथ राज्यसभा के सदस्य भी रहे। उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के दौरान उनकी तूती बोलती थी।
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समाजवादी पाटी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां के घर पर तीन दिन से आयकर विभाग की टीम ने जौहर ट्रस्ट समेत अन्य चीजों को लेकर कार्रवाई की। चार दशक से भी ज्यादा के आजम खां के सियासी सफर का यह सबसे मुश्किल दौर है। इस समय आजम खां के परिवार का कोई भी सदस्य इस समय किसी भी सदन का सदस्य नहीं है। एक समय मुख्यमंत्री के बराबर की हैसियत रखने वाले आजम खां वर्तमान में किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। आजम खां का जन्म रामपुर में 14 अगस्त 1948 को हुआ था।
उन्होंने अपनी शुरुआत पढ़ाई रामपुर के बाकर स्कूल से पूरी के करने के बाद स्नातक भी रामपुर से ही किया। इसके बाद 1974 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन से ही आजम ने राजनीति शुरू की। वह एमएमयू में छात्रसंघ के महासचिव बने। उसके बाद उन्होंने 1976 में जनता पार्टी ज्वाइन की और 1977 में रामपुर से विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार गए।
आजम खां पहली बार 1980 में जनता पार्टी सेक्युलर के टिकट पर रामपुर के विधायक बने और विधानसभा पहुंचे। इसके बाद आजम ने लगातार 1985, 1989, 1991 और 1993 में जीत दर्ज की। 1989 और 1993 में आजम मंत्री भी बने। लगातार पांच बार विधायक और मंत्री बनने के बाद आजम खां का राजनीतिक रसूख काफी बढ़ गया था। हालांकि, 1996 में कांग्रेस प्रत्याशी अफरोज अली खां ने आजम खां को हरा दिया। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा सदस्य बना दिया।
1996 से 2002 तक आजम खां राज्यसभा सदस्य रहे। 2002 के विधानसभा चुनाव में आजम खां एक बार फिर विधायक बने। 2003 में मुलायम सिंह की सरकार में वह कैबिनेट मंत्री बने। 2007 में वह फिर विधायक बने, लेकिन प्रदेश में बसपा सरकार बनी। इसके बाद आजम 2012 में फिर विधायक बने और अखिलेश सरकार में मंत्री बने। तब उनका रसूख काफी बढ़ गया था। इसी दौरान जौहर यूनिवर्सिटी में काफी काम हुआ। जौहर यूनिवर्सिटी के उद्घाटन में अखिलेश सरकार की पूरी कैबिनेट शामिल हुई थी।
2017 के चुनाव में प्रदेश में भाजपा की आंधी चली, लेकिन आजम खां रामपुर सीट से फिर विधायक बन गए। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में आजम को सपा ने रामपुर लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया। इसके बाद आजम लोकसभा चुनाव जीतकर संसद चले गए और उनके इस्तीफे से खाली हुई रामपुर विधानसभा सीट पर उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा विधायक बनीं। 2022 में आजम खां ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा और फिर विधायक बन गए।
हालांकि, अक्तूबर 2022 में कोर्ट ने 2019 के भड़काऊ भाषण मामले में आजम खां को तीन साल की सजा सुना दी और उनकी विधायकी भी चली गई। इसके बाद रामपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आकाश सक्सेना विधायक बने। इस प्रकार चार दशक से भी लंबे राजनीतिक कॅरियर में आजम 10 बार विधायक एक-एक बार राज्यसभा और लोकसभा सदस्य और चार बार मंत्री रहे।
सजा के बाद चली गई थी विधायकी
सपा के राष्ट्रीय महासचिव आजम खां को नफरती भाषण के मामले में तीन साल से ज्यादा की सजा होने के बाद उनकी विधायकी चली गई थी, जिसके बाद पिछले साल दिसंबर में उप चुनाव कराया गया था। उनको रामपुर कोर्ट से अब तक दो मामलों में सजा हो चुकी है, लेकिन एक मामले में सेशन कोर्ट से उन्हें बरी किया जा चुका है। हालांकि, यूपी सरकार इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच चुकी है। इसके अलावा मुरादाबाद की कोर्ट भी उन्हें छजलैट मामले में दो साल से ज्यादा की सजा सुना चुकी है। अभी कई मामलों में सुनवाई अंतिम दौर में पहुंच चुकी है।
दो बार गई अब्दुल्ला की विधायकी
आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम ने 2017 और 2022 में दो बार स्वार सीट से चुनाव लड़ा और जीता, लेकिन दोनों बार उनकी विधायकी चली गई। 2017 में कम उम्र में चुनाव लड़ने के आरोप में उनकी विधायकी गई तो 2022 में मुरादाबाद के छजलैट में 2008 में सड़क जाम करने के मामले में सजा मिलने पर पर उनकी विधायकी चली गई।
रास नहीं आई लोकसभा की सदस्यता
2019 में आजम खां ने पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा और सांसद बन गए। इसके बाद उनकी जगह उनकी पत्नी विधायक बन गईं। हालांकि, लोकसभा की सदस्यता आजम खां को रास नहीं आई। लोकसभा चुनाव के दौरान ही उनके खिलाफ आचार संहिता और भड़काऊ भाषण देने के दर्जन भर मुकदमे दर्ज हुए। इसके बाद भी उनके खिलाफ यतीमखाना प्रकरण, डूंगरपुर प्रकरण, भैंस-बकरी चोरी, किताब चोरी समेत कुल मिलाकर करीब 100 मुकदमे दर्ज हुए।
आजम के साथ ही उनकी पत्नी पूर्व सांसद डाॅ. तजीन फात्मा के खिलाफ 34 और बेटे विधायक अब्दुल्ला के खिलाफ 40 से ज्यादा मुकदमे हैं। 26 फरवरी 2020 को आजम ने अपनी पत्नी और बेटे अब्दुल्ला के साथ अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। पत्नी 10 माह बाद और बेटे को 23 माह बाद जमानत मिली। वहीं आजम खां करीब 27 माह बाद जेल से छूटे थे।