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युवती से दुष्कर्म के आरोपी को सात वर्ष का कठोर कारावास
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रामपुर। युवती से दुष्कर्म करने के मामले में कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए सात वर्ष का कठोर कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सुनाई है। जबकि, साक्ष्य के अभाव में आरोपी के पिता को बरी कर दिया है।
मामला गंज थानाक्षेत्र के एक मोहल्ले से जुड़ा है। 12 मई 2013 को युवती ने पिता पुत्र पर आरोप लगाया था कि उसे फोन करके घर से बुला लिया और बिलासपुर गेट स्थित एक मकान में दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया। जिसमें सुहेल और उसके पिता शुऐब मियां के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। शुक्रवार को इस मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायधीश प्रथम धीरेंद्र कुमार की कोर्ट में हुई। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता सीमा सिंह राणा ने वादिनी मुकदमा सहित कई गवाहों के बयान दर्ज कराए और आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग की। जबकि, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। सिर्फ वादिनी के साथ रिश्ता तय हुआ था। रिश्ता तोड़ने पर मुकदमा दर्ज किया गया है। लिहाजा, आरोपियों को बरी किया जाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सुुुहेल को सात वर्ष का कठोर कारावास और 30 हजार रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जबकि, साक्ष्य के अभाव में आरोपी के पिता शुऐब मियां को कोर्ट ने बरी कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जुर्माने की धनराशि में से 25 हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएं।
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मामला गंज थानाक्षेत्र के एक मोहल्ले से जुड़ा है। 12 मई 2013 को युवती ने पिता पुत्र पर आरोप लगाया था कि उसे फोन करके घर से बुला लिया और बिलासपुर गेट स्थित एक मकान में दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया। जिसमें सुहेल और उसके पिता शुऐब मियां के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। शुक्रवार को इस मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायधीश प्रथम धीरेंद्र कुमार की कोर्ट में हुई। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता सीमा सिंह राणा ने वादिनी मुकदमा सहित कई गवाहों के बयान दर्ज कराए और आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग की। जबकि, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। सिर्फ वादिनी के साथ रिश्ता तय हुआ था। रिश्ता तोड़ने पर मुकदमा दर्ज किया गया है। लिहाजा, आरोपियों को बरी किया जाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने सुुुहेल को सात वर्ष का कठोर कारावास और 30 हजार रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जबकि, साक्ष्य के अभाव में आरोपी के पिता शुऐब मियां को कोर्ट ने बरी कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जुर्माने की धनराशि में से 25 हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएं।
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