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Rampur News: सीआरपीएफ सेंटर पर हमले में सात जवानों की हुई थी मौत

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 30 Oct 2025 01:33 AM IST
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Seven soldiers were killed in the attack on the CRPF centre.
रामपुर। 31 दिसंबर 2007 की रात रामपुर शहर नए साल के उत्सव में डूबा था, तभी सीआरपीएफ समूह केंद्र पर अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी। एके-47 और हथगोले से लैस आतंकियों ने शिविर के फाटक संख्या तीन में घुसकर हमला बोल दिया। इस आतंकी वारदात में सीआरपीएफ के सात जवान शहीद हो गए, जबकि एक रिक्शा चालक की भी जान चली गई। 16 साल बाद इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने चार आरोपियों की फांसी और एक की आजीवन कारावास की सजा रद कर दी है। दो आरोपी पहले ही बरी हो चुके हैं।
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उच्च न्यायालय ने अपील पर बहस पूरी होने के बाद 4 सितंबर 2025 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। रामपुर के सत्र न्यायालय ने दो नवंबर 2019 को पाकिस्तानी नागरिक इमरान शहजाद, मोहम्मद फारुख, बिहार के सबाउद्दीन और रामपुर के मोहम्मद शरीफ उर्फ सुहैल को फांसी की सजा सुनाई थी।
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मुरादाबाद के जंग बहादुर को आजीवन कारावास, जबकि मुंबई के फहीम अंसारी को दस साल की कैद हुई थी। प्रतापगढ़ के मोहम्मद कौसर और बरेली के गुलाब खान को सत्र न्यायालय ने ही बरी कर दिया था।
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शस्त्रागार तक पहुंचने की थी आतंकियों की मंशा

सीआरपीएफ समूह केंद्र पर आतंकी हमले का अलर्ट पहले से था। इसके बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। आतंकियों ने पूरी तैयारी के साथ 31 दिसंबर की रात आतंकी हमला कर दिया। आतंकियों की योजना सीआरपीएफ के शस्त्रागार तक पहुंचने की थी, लेकिन सीआरपीएफ के जवानों की जवाबी कार्रवाई की वजह से उन्हें पीछे हटना पड़ा और आतंकी भाग गए।

मुकदमे को वापस लेने की भी हुई थी कोशिश

सीआरपीएफ समूह केंद्र पर हुए आतंकी हमले के मुकदमे को वापस लेने की कोशिश भी हुई थी। समाजवादी पार्टी सरकार में गृह विभाग की ओर से जिला अधिकारी-एसपी को पत्र भेजकर यह पूछा गया था कि क्या इस मुकदमे को वापस लिया जा सकता है।इसके बाद मामले का इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया था और कड़ी टिप्पणी की थी। उच्च न्यायालय की कड़ी टिप्पणी के बाद प्रदेश सरकार पीछे हट गई थी और मुकदमे को वापस लेने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
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