रामपुर। नैनीताल हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान कृषि भूमि को गैर कृषि भूमि में दर्शाकर मुआवजा निर्धारण करने के मामले में तत्कालीन एडीएम वित्त एवं राजस्व के खिलाफ डीएम ने शासन को रिपोर्ट भेजी है। डीएम द्वारा कराई जांच में मामला पकड़ में आने के बाद भूमि का मुआवजा पुन: निर्धारित किया गया है। जिसमें एडीएम द्वारा निर्धारित किए गए मुआवजे से करीब 45 करोड़ रुपये कम का मुआवजा निर्धारण हुआ है।
नैनीताल हाईवे के लिए सैजनी नानकार के पास कुछ किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था। इसको लेकर एक शिकायत की गई थी कि कुछ किसानों की भूमि का मुआवजा निर्धारण गैर कृषि भूमि दर्शाकर किया गया है जबकि कुछ भूमि का मुआवजा निर्धारण कृषि भूमि दर्शाकर किया गया है। मामला नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों और जिलाधिकारी के सामने पहुंचा तो शिकायत की जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि करीब 1.13 हेक्टयर भूमि का मुआवजा निर्धारण गैर कृषि भूमि दर्शाकर किया गया, जबकि मौके पर करीब डेढ़ सौ वर्गमीटर क्षेत्रफल में एक आरा मशीन ही है। जांच में पाया गया अधिकतर भूमि के मुआवजे का निर्धारण गलत किया गया है। जब जांच के आधार पर मुआवजे का निर्धारण किया तो करीब 6.37 करोड़ रुपये का मुआवजा निर्धारण हुआ जबकि पूर्व में करीब 51.57 करोड़ रुपये के मुआवजे का निर्धारण किया गया था। इसके बाद मामले में जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने तत्कालीन एडीएम वित्त एवं राजस्व डॉ. वैभव शर्मा के खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेज दी है।