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बायां पीलाखार नहर के रिमॉडलिंग का प्रस्ताव मंजूर, लेकिन जारी नहीं हो सका धन
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रामपुर। बायां पीलाखार नहर के रिमॉडलिंग (पुर्नस्थापना) को लेकर सिंचाई विभाग की ओर से शासन को भेजा गया प्रस्ताव तो मंजूर हो गया, लेकिन अब तक इसमें धन जारी नहीं हो सका है। इसमें 3.22 करोड़ रुपये की लागत से काम होना था। ऐसे में धन जारी न होने की वजह से क्षेत्र के हजारों किसानों को सिंचाई का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, विभागीय अफसरों का दावा है कि जल्द ही इस योजना में धन मिल जाएगा, जिसके बाद बरसात से पहले काम शुरू कर दिया जाएगा।
केमरी थाना क्षेत्र के ग्राम गदईया से सिंचाई विभाग की बायां पीलाखार नहर निकल रही है। पहले इस नहर में पानी चलता था, जिससे क्षेत्र के हजारों किसानों को सिंचाई में मदद मिलती थी। लेकिन, एक दशक से नहर पूरी तरह से बंद हो गई है। इसके अलावा कई स्थानों पर नहर के तटबंध टूट गए हैं। जिसके चलते सिंचाई विभाग की ओर से नहर में पानी बंद कर दिया गया था। ऐसे में किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए निजी संसाधनों पर ही निर्भर रहना पड़ा, जिससे फसल की लागत बढ़ने के साथ ही किसानों को फसलों की सिंचाई में काफी दिक्कतें होती थीं।
इसे देखते हुए सिंचाई विभाग की ओर से नहर को फिर से चालू करने की योजना बनाई गई। इसके लिए शासन को 3.22 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया, जिसमें नहर के रिमॉडलिंग का काम शामिल था। शासन ने दिसंबर माह में इस प्रस्ताव को मंजूर तो कर दिया, लेकिन इसके बाद आचार संहिता लग गई, जिस वजह से योजना में पैसा नहीं मिल सका। ऐसे में नहर का काम लटका हुआ है। जिससे क्षेत्र के करीब 22 हजार किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए दिक्कतें हो रही हैं।
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केमरी थाना क्षेत्र के ग्राम गदईया से सिंचाई विभाग की बायां पीलाखार नहर निकल रही है। पहले इस नहर में पानी चलता था, जिससे क्षेत्र के हजारों किसानों को सिंचाई में मदद मिलती थी। लेकिन, एक दशक से नहर पूरी तरह से बंद हो गई है। इसके अलावा कई स्थानों पर नहर के तटबंध टूट गए हैं। जिसके चलते सिंचाई विभाग की ओर से नहर में पानी बंद कर दिया गया था। ऐसे में किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए निजी संसाधनों पर ही निर्भर रहना पड़ा, जिससे फसल की लागत बढ़ने के साथ ही किसानों को फसलों की सिंचाई में काफी दिक्कतें होती थीं।
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इसे देखते हुए सिंचाई विभाग की ओर से नहर को फिर से चालू करने की योजना बनाई गई। इसके लिए शासन को 3.22 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया, जिसमें नहर के रिमॉडलिंग का काम शामिल था। शासन ने दिसंबर माह में इस प्रस्ताव को मंजूर तो कर दिया, लेकिन इसके बाद आचार संहिता लग गई, जिस वजह से योजना में पैसा नहीं मिल सका। ऐसे में नहर का काम लटका हुआ है। जिससे क्षेत्र के करीब 22 हजार किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए दिक्कतें हो रही हैं।
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