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पंज प्यारों ने कराया अमृत संचार
ब्यूरो/अमर उजाला बिलासपुर
Updated Mon, 21 Dec 2015 11:20 PM IST
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मुल्लाखेड़ा गुरुद्वारे में चल रहे शहीदी समागम ने पंज प्यारों ने 16 लोगों को अमृतपान कराकर गुरु वाला बनाया। इस दौरान भाई करमजीत सिंह ने कहा कि गुरु के बिना ज्ञान का मिलना असंभव है।
मुल्लाखेड़ा गुरुद्वारे में सोमवार को बाबा अजीत सिंह खालसा सेवादल की ओर से मनाए जा रहे माता गूजरी कौर और उनके चारों पोतों के 311वें शहीदी समागम में भाई करमजीत सिंह ने कहा कि मनुष्य को चाहिए कि वो रोजाना कुछ समय गुरु की भक्ति के लिए जरूर निकालें। उन्होंने सबद कीर्तन के माध्यम से संगत को करीब घंटों निहाल किया।
इससे पूर्व सुबह आसा दी वार का कीर्तन हुआ। पंडाल बिच श्री गुरुग्रंथ साहिब महाराज की पालकी पहुंची। परंपरागत ढंग से श्री गुरुग्रंथ साहिब की स्थापना की गई। भाई खजान सिंह के रागी, भाई मेजर सिंह खालसा के ढांढी, भाई देवेंद्र सिंह ताज और बलविंद्र कौर खालसा के कविश्री जत्थों ने सबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया।
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पंज प्यारों ने 16 लोगों को अमृत संचार कराया। गुरु का अटूट लंगर दिनभर बरता गया। दिल्ली डेरा कारसेवा वाले बाबा अनूप सिंह और विधायक संजय कपूर ने दरबार में मत्था टेका। दीवान शाम चार बजे तक चला। संचालन भाई कश्मीर सिंह ने किया।
व्यवस्था में प्रधान करनैल सिंह, राजेंद्र सिंह, बूटा सिंह, गुरनाम सिंह, जोगिंद्र सिंह बिटटू, बलवीर सिंह, सुखदेव सिंह, भगवंत सिंह, महेंद्र सिंह, गुरदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, सरजीत सिंह, बल्देव सिंह, हरभजन सिंह, बलजिंद्र सिंह, सरबन सिंह, सरदूल सिंह, विचित्र सिंह, सतनाम सिंह आदि मुख्य थे।
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मुल्लाखेड़ा गुरुद्वारे में सोमवार को बाबा अजीत सिंह खालसा सेवादल की ओर से मनाए जा रहे माता गूजरी कौर और उनके चारों पोतों के 311वें शहीदी समागम में भाई करमजीत सिंह ने कहा कि मनुष्य को चाहिए कि वो रोजाना कुछ समय गुरु की भक्ति के लिए जरूर निकालें। उन्होंने सबद कीर्तन के माध्यम से संगत को करीब घंटों निहाल किया।
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इससे पूर्व सुबह आसा दी वार का कीर्तन हुआ। पंडाल बिच श्री गुरुग्रंथ साहिब महाराज की पालकी पहुंची। परंपरागत ढंग से श्री गुरुग्रंथ साहिब की स्थापना की गई। भाई खजान सिंह के रागी, भाई मेजर सिंह खालसा के ढांढी, भाई देवेंद्र सिंह ताज और बलविंद्र कौर खालसा के कविश्री जत्थों ने सबद कीर्तन कर संगत को निहाल किया।
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पंज प्यारों ने 16 लोगों को अमृत संचार कराया। गुरु का अटूट लंगर दिनभर बरता गया। दिल्ली डेरा कारसेवा वाले बाबा अनूप सिंह और विधायक संजय कपूर ने दरबार में मत्था टेका। दीवान शाम चार बजे तक चला। संचालन भाई कश्मीर सिंह ने किया।
व्यवस्था में प्रधान करनैल सिंह, राजेंद्र सिंह, बूटा सिंह, गुरनाम सिंह, जोगिंद्र सिंह बिटटू, बलवीर सिंह, सुखदेव सिंह, भगवंत सिंह, महेंद्र सिंह, गुरदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, सरजीत सिंह, बल्देव सिंह, हरभजन सिंह, बलजिंद्र सिंह, सरबन सिंह, सरदूल सिंह, विचित्र सिंह, सतनाम सिंह आदि मुख्य थे।