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Rampur News: संदिग्धावस्था में जली मिली कार की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस
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बिलासपुर। कोतवाली क्षेत्र में संदिग्ध अवस्था में जली कार को लेकर पुलिस ने अब गहराई से जांच करनी शुरू कर दी है। पुलिस ने जली हुई कार एक पूर्व बीडीसी सदस्य के घर पर खड़ी करके असलियत जानना शुरू कर दिया है।
28 मार्च की सुबह कोतवाली क्षेत्र के हमिदाबाद गांव के समीप ग्रामीणों ने रोड किनारे एक जली हुई कार खड़ी हुई देखी थी। कार को देखकर मौके पर तमाम लोगों की भीड़ एकत्र हो गई थी। ग्रामीणों की सूचना पर कोतवाली क्षेत्र की पुलिस चौकी ईसानगर के प्रभारी प्रशांत कुमार भी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए थे। पुलिस ने जली हुई कार के बारे में ग्रामीणों से जानकारी की तो ग्रामीणों ने कार के प्रति पूरी तरह से अनभिज्ञता जाहिर की। पुलिस की जांच में कार की नंबर प्लेट गायब पाई गई और चेचिस नंबर भी घिसे हुए पाए गए थे। पुलिस ने कार की चाबी समीप के एक खेत से बरामद कर ली थी। ईसानगर चौकी प्रभारी के अनुसार उन्होंने जली हुई कार को रोड से हटवा कर गांव निवासी पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य गुरमुख सिंह के फार्म हाउस पर खड़ी करवा दिया है। कार किसकी थी? कौन लेकर किस उद्देश्य से आया? तथा कार क्यों जलाई? इन तमाम सवालों को पुलिस ग्रामीणों की मदद से खोजने में लगी हुई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान अब तक यह प्रतीत हो रहा है कि कार जली नहीं, बल्कि जानबूझकर जलाई गई है। क्योंकि, कार में स्वयं आग लगती तो कार के समीप खेत में गेहूं की फसल भी कुछ हद तक जलकर प्रभावित होती। वहीं, कार के टायर फटने की आवाज भी ग्रामीणों तक जरूर पहुंचती। लेकिन ऐसा कुछ न होने की बात ग्रामीणों ने पुलिस को बताई है। पुलिस का मानना है कि कुछ अपराधी किस्म के लोग कार को उत्तराखंड की ओर से ला रहे होंगे और जी 20 कार्यक्रम को लेकर पुलिस की सतर्कता के डर से कार गतंव्य तक न ले जाकर मामले को खत्म करने के उद्देश्य से कार के सभी टायरों की हवा निकाल कर स्वयं ही आग लगा दी गई होगी। पहचान मिटाने के लिए नंबर प्लेट गायब कर दी गई होगी तथा चेचिस नंबर भी घिस दी होगी। ताकि पुलिस अपराधी तक आसानी से न पहुंच सके। चौकी प्रभारी का कहना है कि मामले की तहकीकात की जा रही है। शीघ्र ही असलियत से पर्दा उठने की संभावना है। वहीं, कोतवाली प्रभारी नवाब सिंह का कहना है कि जली हुई कार के मामले में फिलहाल जांच की जा रही है। जांच के उपरांत ही असलियत का पता चल सकेगा।
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28 मार्च की सुबह कोतवाली क्षेत्र के हमिदाबाद गांव के समीप ग्रामीणों ने रोड किनारे एक जली हुई कार खड़ी हुई देखी थी। कार को देखकर मौके पर तमाम लोगों की भीड़ एकत्र हो गई थी। ग्रामीणों की सूचना पर कोतवाली क्षेत्र की पुलिस चौकी ईसानगर के प्रभारी प्रशांत कुमार भी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए थे। पुलिस ने जली हुई कार के बारे में ग्रामीणों से जानकारी की तो ग्रामीणों ने कार के प्रति पूरी तरह से अनभिज्ञता जाहिर की। पुलिस की जांच में कार की नंबर प्लेट गायब पाई गई और चेचिस नंबर भी घिसे हुए पाए गए थे। पुलिस ने कार की चाबी समीप के एक खेत से बरामद कर ली थी। ईसानगर चौकी प्रभारी के अनुसार उन्होंने जली हुई कार को रोड से हटवा कर गांव निवासी पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य गुरमुख सिंह के फार्म हाउस पर खड़ी करवा दिया है। कार किसकी थी? कौन लेकर किस उद्देश्य से आया? तथा कार क्यों जलाई? इन तमाम सवालों को पुलिस ग्रामीणों की मदद से खोजने में लगी हुई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान अब तक यह प्रतीत हो रहा है कि कार जली नहीं, बल्कि जानबूझकर जलाई गई है। क्योंकि, कार में स्वयं आग लगती तो कार के समीप खेत में गेहूं की फसल भी कुछ हद तक जलकर प्रभावित होती। वहीं, कार के टायर फटने की आवाज भी ग्रामीणों तक जरूर पहुंचती। लेकिन ऐसा कुछ न होने की बात ग्रामीणों ने पुलिस को बताई है। पुलिस का मानना है कि कुछ अपराधी किस्म के लोग कार को उत्तराखंड की ओर से ला रहे होंगे और जी 20 कार्यक्रम को लेकर पुलिस की सतर्कता के डर से कार गतंव्य तक न ले जाकर मामले को खत्म करने के उद्देश्य से कार के सभी टायरों की हवा निकाल कर स्वयं ही आग लगा दी गई होगी। पहचान मिटाने के लिए नंबर प्लेट गायब कर दी गई होगी तथा चेचिस नंबर भी घिस दी होगी। ताकि पुलिस अपराधी तक आसानी से न पहुंच सके। चौकी प्रभारी का कहना है कि मामले की तहकीकात की जा रही है। शीघ्र ही असलियत से पर्दा उठने की संभावना है। वहीं, कोतवाली प्रभारी नवाब सिंह का कहना है कि जली हुई कार के मामले में फिलहाल जांच की जा रही है। जांच के उपरांत ही असलियत का पता चल सकेगा।
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