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माया, छल, कपट, और बेईमानी छोड़ना ही उत्तम आर्जव धर्म
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रामपुर। दशलक्षण महापर्व का तीसरा दिन उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया गया। दोनों मंदिरों में विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। उत्तम आर्जव धर्म अपनाने का संदेश दिया गया। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
रविवार को सिविल लाइंस स्थित आदिनाथ जैन मंदिर में अभिषेक शोभित जैन के द्वारा किया गया। शांतिधारा समीर के द्वारा की गई। शांति धारा का वाचन हंसिका और श्रीया जैन ने किया। मथुरा चौरासी से आए पंडित रितेश शास्त्री ने कहा कि अन्याय से उपार्जन किया हुआ धन केवल दस वर्ष तक साथ रहता है, परंतु ग्यारहवां वर्ष लगते ही वह समूल नष्ट हो जाता है। मायाचारी का धन बिजली के समान क्षणिक है। सदाचारी की कमाई से उसकी तुलना किसी अंश में भी नहीं हो सकती। ऐसे कल्याणकारी आर्जव धर्म को सदा धारण करना चाहिए। सांस्कृतिक कार्यक्रम की शृंखला में जूनियर भजन संध्या कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिस का संचालन निर्भय जैन ने किया। सभी कार्यक्रम डॉ ज्ञानेंद्र कुमार जैन एवं शिखर चंद जैन के सानिध्य में किए गए।
फूटा महल स्थित दिगंबर जैन मंदिर में बच्चों में धार्मिक संस्कार डालने के लिए वैद्य बांकेलाल जैन ट्रस्ट द्वारा धार्मिक परीक्षा भी आयोजित कराई गई। नित्य नियम पूजन, शांतिधारा व अभिषेक की क्रियाएं संपन्न कराई। टीकमगढ़ से आए पंडित विवेक शास्त्री ने मंत्रोचार के बीच पांच जिन प्रतिमाओं का अभिषेक कराया। देव शास्त्र गुरु, सोलह कारण पूजा, पंच मेरु पूजन किया गया। उत्तम आर्जव धर्म के विधान से साथ सुबह की पूजा हुई। संध्याकालीन आरती भाव नृत्य एवं संगीत के साथ हुई। आरती के बाद पंडित विवेक शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि सरलता के साथ माया, छल, कपट, और बेईमानी छोड़ना ही उत्तम आर्जव धर्म कहलाता है। आज के दिन धोखाधड़ी के जुनून को खत्म करके जीवन में छल मुक्त आचरण का अभ्यास का पालन करें। शो योर टैलेंट कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम का संचालन डा. शीनू जैन ने किया। कस्तूर चंद जैन, सुनील कुमार, विशाल जैन, आशीष जैन, शुभम जैन, अविरल जैन, अजय जैन, सुमन जैन, लक्ष्मी जैन, रुकमणी जैन, नीता जैन, वीना जैन आदि मौजूद रहे।
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रविवार को सिविल लाइंस स्थित आदिनाथ जैन मंदिर में अभिषेक शोभित जैन के द्वारा किया गया। शांतिधारा समीर के द्वारा की गई। शांति धारा का वाचन हंसिका और श्रीया जैन ने किया। मथुरा चौरासी से आए पंडित रितेश शास्त्री ने कहा कि अन्याय से उपार्जन किया हुआ धन केवल दस वर्ष तक साथ रहता है, परंतु ग्यारहवां वर्ष लगते ही वह समूल नष्ट हो जाता है। मायाचारी का धन बिजली के समान क्षणिक है। सदाचारी की कमाई से उसकी तुलना किसी अंश में भी नहीं हो सकती। ऐसे कल्याणकारी आर्जव धर्म को सदा धारण करना चाहिए। सांस्कृतिक कार्यक्रम की शृंखला में जूनियर भजन संध्या कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिस का संचालन निर्भय जैन ने किया। सभी कार्यक्रम डॉ ज्ञानेंद्र कुमार जैन एवं शिखर चंद जैन के सानिध्य में किए गए।
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फूटा महल स्थित दिगंबर जैन मंदिर में बच्चों में धार्मिक संस्कार डालने के लिए वैद्य बांकेलाल जैन ट्रस्ट द्वारा धार्मिक परीक्षा भी आयोजित कराई गई। नित्य नियम पूजन, शांतिधारा व अभिषेक की क्रियाएं संपन्न कराई। टीकमगढ़ से आए पंडित विवेक शास्त्री ने मंत्रोचार के बीच पांच जिन प्रतिमाओं का अभिषेक कराया। देव शास्त्र गुरु, सोलह कारण पूजा, पंच मेरु पूजन किया गया। उत्तम आर्जव धर्म के विधान से साथ सुबह की पूजा हुई। संध्याकालीन आरती भाव नृत्य एवं संगीत के साथ हुई। आरती के बाद पंडित विवेक शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि सरलता के साथ माया, छल, कपट, और बेईमानी छोड़ना ही उत्तम आर्जव धर्म कहलाता है। आज के दिन धोखाधड़ी के जुनून को खत्म करके जीवन में छल मुक्त आचरण का अभ्यास का पालन करें। शो योर टैलेंट कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम का संचालन डा. शीनू जैन ने किया। कस्तूर चंद जैन, सुनील कुमार, विशाल जैन, आशीष जैन, शुभम जैन, अविरल जैन, अजय जैन, सुमन जैन, लक्ष्मी जैन, रुकमणी जैन, नीता जैन, वीना जैन आदि मौजूद रहे।
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