{"_id":"61423e768ebc3e70cf37d6fc","slug":"perushan-parve-rampur-news-mbd402811090","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंद्रियों पर संयम पा लिया तो निश्चित मिलेगा मोक्ष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंद्रियों पर संयम पा लिया तो निश्चित मिलेगा मोक्ष
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुर। दशलक्षण महापर्व उत्तम संयम धर्म के रूप में मनाया गया। दोनों मंदिरों में विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। उत्तम संयम धर्म को अपनाने का संदेश दिया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
बुधवार को सिविल लाइंस स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रथम अभिषेक महेश चंद जैन के द्वारा किया गया। शांति धारा अमित जैन ने की। शांति धारा के उपरांत आरती सोहनी नकुल जैन के द्वारा की गई। शाम को संगीतमय आरती के बाद मथुरा चौरासी से आए पंडित रितेश शास्त्री ने कहा कि अगर मनुष्य ने अपनी अगर इंद्रियों पर संयम पा लिया तो मोक्ष मिलना निश्चित है। संयम हमें अपने क्रोध और माया मोह पर पर पाना है। डॉ ज्ञानेंद्र कुमार जैन, शिखर जैन, दिनेश सेठी, राजीव जैन, रमेश जैन, संजय खंडेलवाल,अमित जैन, संजय जैन, अलका जैन, विनीता जैन आदि मौजूद रहे।
फूटा महल स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सुबह को पूजा अर्चना हुई। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम की श्रृंखला में नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसकी प्रायोजक डॉ.रमा जैन रहीं। आयोजक दिगंबर महिला महा समिति रही। संचालन लीना जैन, डॉक्टर शीनू जैन एवं दिशा जैन ने किया। विचार बिंदु विधि जैन के द्वारा सीता सती पर प्रस्तुत किए गए। प्रवचन के उपरांत भजन प्रीति जैन धामपुर के द्वारा प्रस्तुत किया गया। सभी ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया छोटे-छोटे बच्चों ने बहुत ही सुंदर नृत्य प्रस्तुत किए। अपने संबोधन में पंडित विवेक शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि मात्र बाहर शरीर से उपवास कर लेना, भगवान की पूजा-भक्ति कर लेना अथवा दानादि दे देना, वह मात्र धर्म नहीं है। वह धर्म तो आत्मा का स्वभाव है, तो उसका आश्रय लेने से ही प्रगट होगा। उपवास आदि क्रियाएँ उस आत्मा तक पहुंचाने के लिए ही हैं, कि शरीर, धन, परिवार से मोह हटाकर उसकी ओर अपना उपयोग ले जायें। मात्र क्रियाओं के कर लेने से धर्म होता तो अजीव वस्तुओं को भी धर्म होता। क्योंकि, वो तो निरंतर ही उपवास करती हैं। इन क्रियाओं को करने पर भी कई जीव दुखी देखे जाते हैं। जबकि, धर्म तो सुख का कारण है। क्रियाओं से दृष्टि हटाकर, आत्मा के पास दृष्टि का आना ही वास्तविक उत्तम संयम धर्म है और वही प्रगट करने योग्य है। इस दौरान डॉ. प्रदीप कुमार जैन, दिनेश कुमार जैन खंडेलवाल, अनीता जैन, भारत भूषण जैन, सुमन जैन, राहुल जैन, आशीष जैन, विशाल जैन, समीर, शिखर जैन, कस्तूर चंद जैन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
बुधवार को सिविल लाइंस स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रथम अभिषेक महेश चंद जैन के द्वारा किया गया। शांति धारा अमित जैन ने की। शांति धारा के उपरांत आरती सोहनी नकुल जैन के द्वारा की गई। शाम को संगीतमय आरती के बाद मथुरा चौरासी से आए पंडित रितेश शास्त्री ने कहा कि अगर मनुष्य ने अपनी अगर इंद्रियों पर संयम पा लिया तो मोक्ष मिलना निश्चित है। संयम हमें अपने क्रोध और माया मोह पर पर पाना है। डॉ ज्ञानेंद्र कुमार जैन, शिखर जैन, दिनेश सेठी, राजीव जैन, रमेश जैन, संजय खंडेलवाल,अमित जैन, संजय जैन, अलका जैन, विनीता जैन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
फूटा महल स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सुबह को पूजा अर्चना हुई। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम की श्रृंखला में नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसकी प्रायोजक डॉ.रमा जैन रहीं। आयोजक दिगंबर महिला महा समिति रही। संचालन लीना जैन, डॉक्टर शीनू जैन एवं दिशा जैन ने किया। विचार बिंदु विधि जैन के द्वारा सीता सती पर प्रस्तुत किए गए। प्रवचन के उपरांत भजन प्रीति जैन धामपुर के द्वारा प्रस्तुत किया गया। सभी ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया छोटे-छोटे बच्चों ने बहुत ही सुंदर नृत्य प्रस्तुत किए। अपने संबोधन में पंडित विवेक शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि मात्र बाहर शरीर से उपवास कर लेना, भगवान की पूजा-भक्ति कर लेना अथवा दानादि दे देना, वह मात्र धर्म नहीं है। वह धर्म तो आत्मा का स्वभाव है, तो उसका आश्रय लेने से ही प्रगट होगा। उपवास आदि क्रियाएँ उस आत्मा तक पहुंचाने के लिए ही हैं, कि शरीर, धन, परिवार से मोह हटाकर उसकी ओर अपना उपयोग ले जायें। मात्र क्रियाओं के कर लेने से धर्म होता तो अजीव वस्तुओं को भी धर्म होता। क्योंकि, वो तो निरंतर ही उपवास करती हैं। इन क्रियाओं को करने पर भी कई जीव दुखी देखे जाते हैं। जबकि, धर्म तो सुख का कारण है। क्रियाओं से दृष्टि हटाकर, आत्मा के पास दृष्टि का आना ही वास्तविक उत्तम संयम धर्म है और वही प्रगट करने योग्य है। इस दौरान डॉ. प्रदीप कुमार जैन, दिनेश कुमार जैन खंडेलवाल, अनीता जैन, भारत भूषण जैन, सुमन जैन, राहुल जैन, आशीष जैन, विशाल जैन, समीर, शिखर जैन, कस्तूर चंद जैन आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन