{"_id":"588657184f1c1b403fcf4595","slug":"peplivan","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीपली वन में फिर घुसे लकड़ी तस्कर, कर्मचारी सहमे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीपली वन में फिर घुसे लकड़ी तस्कर, कर्मचारी सहमे
अमर उजाला ब्यूरो/मिलक खानम/रामपुर
Updated Tue, 24 Jan 2017 12:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
उत्तराखंड के कई गांवों के लकड़ी तस्कर वन विभाग पर भारी पड़ रहे हैं। पीपली वन में कीमती लकड़ी का अवैध कटान इन्हीं गांवों के तस्कर करते हैं। इनके खिलाफ उत्तराखंड पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। कलकत्ती गांव के लकड़ी तस्कर रविवार की रात भी पीपली वन में फिर घुस गए और लककार पर फायर झोंक दिया, जिससे कर्मियों को पीछे पीछे हटना पड़ा।
पीपली वन उत्तराखंड की सीमा पर है। वन से सटे कलकत्ती, कनकट, आर्यनगर, अम्बरपुर समेत कई गांव उत्तराखंड के हैं। इन गांवों में सबसे ज्यादा लकड़ी तस्कर कलकत्ती के हैं। अधिकतर ग्रामीणों का धंधा ही लकड़ी चोरी, अवैध हथियार और कच्ची शराब बनाना है। कलकत्ती के लकड़ी तस्कर हाथियारों से लैस टोलियों बनाकर पीपली में घुस जाते हैं और फिर कीमती लकड़ी काटकर ले जाते हैं। वन कर्मी अवैध कटान रोकने की कोशिश करते हैं तो लकड़ी तस्कर हथियारों से वन कर्मियों पर हमला कर देते हैं। चूंकि इस गांवों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।
विज्ञापन
इसलिए उत्तराखंड पुलिस भी लकड़ी तस्करों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती है वन विभाग के कर्मचारी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। पीपली वन में रविवार की रात भी लकड़ी तस्कर घुस गए। चहलकदमी पर वन कर्मियों ने ललकारा तो जवाब में फायर झोंक दिया। जिससे वन कर्मी पीछे हट गए।तस्करों की कुछ स्वार के वन कर्मियों से भी साठगांठ है, यह रात में पेड़ों का कटान कराने में मदद करते हैं। रविवार की रात वन कर्मियों पर फायर झोंके जाने से फिर दहशत है।
विज्ञापन