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खेतों में न जलाएं पराली : डीएम

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 07 Oct 2021 01:06 AM IST
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no fire in rest part of paddy
रामपुर। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला सहकारी बैंक के सभागार कक्ष में जनपद स्तरीय गोष्ठी एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें धान की पराली, अन्य फसल अवशेष न जलाने के संबंध में जानकारी दी गई।
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जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ की अध्यक्षता में हुई बैठक में जनपद की सभी तहसीलों के प्रगतिशील कृषकों, समस्त कंबाईन, हर्वेस्टर मालिकों, कृषि अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र धमोरा वरशिष्ठ पशु वैज्ञानिक मनोज सिंह, अध्यक्ष डॉ. फैज मोसिम रजा, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुनीता पंत ने फसल एवं अन्य कृषि अवशेष के बेहतर प्रबंध के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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उन्होंने बताया की अनुमान्यता धान की फसल से मिट्टी से लिए गए पोषक तत्वों से 25 प्रतिशत नाइट्रोजन व फॉस्फोरस, 50 प्रतिशत गंधक और 75 प्रतिशत पोटाश फसल अवशेषों में ही रहा जाता है। इन गैसों के कारण सामान्य वायु की गुणवत्ता में कमी, आंखों में जलन एवं त्वचा रोग तथा सूक्ष्म कणों के कारण जीर्ण हृदय एवं फेफडों की बीमारी होती है। फसल अवशेषों को जलाने से मृदा ताप में बढ़ोत्तरी होती है। जिससे मृदा में उपस्थित पोषक तत्व, मृदा सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं तथा लाभदायक मित्र कीट जलकर मर जाते हैं। पशुओं को चारे की व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। फसल अवशेष जलाने पर अगल-बगल के खेतों में आग लगने की संभावना एवं खड़ी फसल अथवा आबादी में अग्निकांड होने की संभावना बनी रहती है। पराली जलाने के कारण समस्याओं से निजात पाने के लिए किसान प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फॉर-इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ कॉप रेजीड्यू योजनांतर्गत कृषि विभाग से 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कृषि यंत्रों जैसे सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, हैप्पी सीडर, पैडी स्ट्राचापर, श्रेडर, मल्चर, श्रब मास्टर, कटर कम स्प्रेडर, रिवर्सेबल एमबी प्लाऊ, रोटरी स्लेशर, जीरो टिल सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल आदि का इस्तेमाल करते हुए खेत मे ही धान की पराली को खेत की मिट्टी मिलाकर मृदा में जीवांश तत्वों की मात्रा बढ़ाकर फसलों में अधिक उत्पादन प्राप्त करें। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने कहा कि किसान धान की पराली को अपने खतों में न जलाएं। इसके साथ ही कहा क धान की पराली को जलाने की जगह उनके क्षेत्रों मे संचालित राजकीय, निजी गौशालाओं को उपलब्ध कराएं। कृषकों को 2021 में धान खरीद पर शासन की ओर से आई व्यवस्था के बारे मे जानकारी दी गई।
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