रामपुर। पश्चिम बंगाल की जेलों में बंद महिला कैदियों के यौन उत्पीड़न व गर्भवती होने का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) तक पहुंच गया है। आयोग ने डीके फाउंडेशन के प्रार्थनापत्र के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है।पश्चिम बंगाल की जेलों में महिला बंदियों के यौन शोषण का मामला लगातार सुर्खियों में है। यहां पर महिला बंदियों के गर्भवती होने की बात सामने आई है, जिसके बाद देश भर में इसको लेकर बहस छिड़ गई है। अब इस मामले में रामपुर नगर के मॉडल कालोनी निवासी डीके फाउंडेशन ऑफ फ्रीडम जस्टिस के डायरेक्टर दानिश खां ने मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली में एक प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जेलों में महिला बंदियों का यौन शोषण किया जा रहा है। जेलों में महिला बैरकों में पुरुष बंदियों का प्रवेश निषेध होने के बाद भी महिला बंदी गर्भवती हो गईं।
उनका कहना है कि जेलों में 196 महिला बंदी गर्भवती हो गई हैं और उन्होंने बच्चों को जन्म दिए हैं। यह एक गंभीर मामला है। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट भी संज्ञान ले चुका है। उन्होंने इस मामले में आयोग से दोषियों पर कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। साथ ही गृह मंत्रालय से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करने की मांग की। दानिश के प्रार्थनापत्र पर आयोग ने न्यायिक अभिरक्षा में महिला बंदियों के साथ रेप का मामला दर्ज कर लिया है। आयोग ने इस मामले में सुनवाई शुरू कर दी है।