Nainital Car Accident: बिलासपुर के पांच दोस्तों का चार गांवों में अंतिम संस्कार, साथ नहीं गया तो बच गया पिंकी
नैनीताल के कोटाबाग में हुए सड़क हादसे में बिलासपुर के पांच युवकों की जान चली गई थी। सभी को अलग-अलग गांवों में अंतिम संस्कार कर दिया गया है। पांचों शव एक साथ पहुंचने के दौरान ग्रामीणों में कोहराम मच गया।
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तीन दिन पूर्व नैनीताल जिले के कोटाबाग में सफारी कार के खाई में गिरने के दौरान जान गंवाने वाले बिलासपुर के पांचों युवकों के शव रविवार को उनके घरों पर पहुंचे। सभी पांचों दोस्तों के शवों का अलग-अलग चार गांवों में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान लोगों की आंखें नम हो गईं। राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख व उपजिलाधिकारी ने भी सभी मृतकों को के घर पहुंच कर अफसोस जाहिर किया और सभी को सांत्वना दी।
कोतवाली क्षेत्र के ग्राम बिजली फार्म निवासी रवि प्रताप सिंह पुत्र बलबीर सिंह उर्फ वीरा, इसी गांव के सुखमीत सिंह चाहल पुत्र इकबाल सिंह, ग्राम रतनपुरा निवासी जगरूप सिंह पुत्र अमरीक सिंह, ग्राम सिकरौरा निवासी जगजीत सिंह उर्फ जस्सू पुत्र जीत सिंह, ग्राम बारादरी निवासी गुरसेवक सिंह उर्फ गुरी पुत्र मलकीत सिंह पांचों दोस्त थे। परिजनों के अनुसार सभी 23 नवंबर की दोपहर सफारी गाड़ी से नैनीताल घूमने के लिए गए थे।
24 नवंबर की रात वापसी के दौरान अनियंत्रित उनकी गाड़ी नैनीताल जिले के कोटाबाग ब्लॉक के देवीपुरा सौंड़ मोटर मार्ग के समीप खाई में गिर गई थी। हादसे में पांचों युवकों की जानें चली गई थीं और कार भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। 25 नवंबर की सुबह बाघनी गांव के लोगों ने क्षतिग्रस्त कार व युवकों के क्षत विक्षिप्त शवों को अलग अलग पड़ा देखा था। लोगों ने मामले की सूचना नैनीताल के पुलिस प्रशासन को दी थी। सूचना पर मृतक के परिवार के सदस्य व संबंधी भी शनिवार की रात हल्द्वानी व मौके पर पहुंच गए थे। पोस्टमार्टम के बाद सभी युवकों के शव रविवार की तड़के उनके गांव पहुंचे।
रविवार की दोपहर करीब 2:00 बजे तक सभी युवकों का उनके गांवों में अलग-अलग समय पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, उप जिला अधिकारी हिमांशु उपाध्याय, खंड विकास अधिकारी राजेश कुमार, कोतवाली प्रभारी नवाब सिंह, ब्लाक प्रमुख कुलवंत सिंह औलख, सपा नेता अमरजीत सिंह ढिल्लो, शिवदेव सिंह भट्टी, दर्शन सिंह भट्टी, गुरजीत सिंह कोटिया, प्रदीप सिंह बिर्क, सुखविंदर सिंह, मंत्री मलवाई, जसपाल सिंह, गुरविंदर सिंह, बलजीत सिंह बिट्टू, दिलबाग सिंह आदि ने सभी मृतकों के घर पहुंच कर अफसोस जाहिर किया और परिजनों को सांत्वना दी।
साथ न जाने से बच गया छठ दोस्त पिंकी
परिजनों के अनुसार 23 नवंबर की दोपहर जब यह चारों गांव के पांचों युवक नैनीताल जाने के लिए गाड़ी में सवार हुए तो उन्होंने पांचों युवकों ने रुद्रपुर निवासी अपने एक दोस्त पिंकी को भी रुद्रपुर से जबरन अपने साथ कार में उत्तराखंड सीमा पर बैठा लिया था। मगर, पिंकी ने जाने से साफ इनकार कर दिया और वह रुद्रपुर में ही एक होटल के समीप उतर गया था। लोग कहना है कि अगर पिंकी भी साथ होता तो शायद उसकी भी जान न बचती।
रहस्य बनी दिल्ली नंबर की सफारी गाड़ी
नैनीताल में हुए हादसे के बाद क्षतिग्रस्त हुई दिल्ली नंबर की सफारी गाड़ी का रहस्य अभी तक बना हुआ है। आखिर यह गाड़ी किसकी है और युवकों ने कहां से नैनीताल जाने के लिए बुक की थी। गाड़ी के बाबत रविवार को भी लोग एक दूसरे से यही पूछते रहे कि आखिर क्षतिग्रस्त हुई गाड़ी है किसकी। मगर कोई भी इस गाड़ी के बारे में संतोषजनक जवाब देने की स्थिति में दिखाई नहीं दिया।
तीन साल पहले ही सऊदी से आया था सुखमीत
ग्राम बिजली फॉर्म निवासी सुखमीत चाहल के पिता इकबाल सिंह ने बताया कि सुखमीत सिंह उनका इकलौता पुत्र था। वह तीन साल पहले ही सऊदी में दो साल रुकने के पश्चात यहां आया था और उनके साथ खेती-बाड़ी में हाथ जुटा रहा था।