Nainital Car Accident: आनन-फानन निकले थे पांचों दोस्त, जिंदगी का आखिरी सफर बनी यात्रा..परिजन उठा रहे सवाल
नैनीताल जिले में 24 नवंबर की रात हुए हादसे में बिलासपुर के पांच युवाओं की जान चलीं गईं। जिस कार से हादसा हुआ उसके बारे में परिजनों को पता नहीं है। वह घटना को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
विस्तार
नैनीताल में 23 नवंबर को ऐसा क्या खास था जिसको लेकर बिलासपुर के पांच युवा दोस्त नैनीताल जाने के लिए ऐसे बेताब थे जो जैसा जहां था सभी आनन फानन में गाड़ी में सवार होते चले गए। वह भले ही नैनीताल सैर सपाटा करने गए थे, मगर ऐसी जल्दबाजी में जाना परिजनों के गले नहीं उतर रहा है। जबकि, वही नैनीताल सभी के लिए आखिरकार काल ही बन गई। नैनीताल जिले में 24 नवंबर की रात हुए हादसे में कोतवाली क्षेत्र के पांच युवाओं की जानें चलीं गईं। नैनीताल के जिले के कोटाबाग ब्लॉक के देवीपुरा सौड़ मोटर मार्ग के समीप शुक्रवार की रात जिस सफारी कार का हादसा हुआ।
उस हादसे में स्थानीय कोतवाली क्षेत्र के ग्राम बिजली फॉर्म निवासी रवि प्रताप सिंह, इसी गांव के सुखमीत सिंह चाहल ग्राम रतनपुरा निवासी जगरूप सिंह, ग्राम सिकरौरा निवासी जगजीत सिंह उर्फ जस्सु, ग्राम बारादरी निवासी गुरु सेवक सिंह उर्फ गुरी शामिल थे। करीब 23 से 28 वर्ष की आयु बीच के सभी युवाओं की हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। रविवार को अंतिम संस्कार के दौरान लोगों में इस बात की चर्चा थी कि आखिर 23 नवंबर को नैनीताल में ऐसा क्या प्रस्तावित कार्य था, जिसकी वजह से पांचों युवक परिजनों को बिना बताए आनन-फानन में अपने घर से कार के जरिए नैनीताल की ओर भागे थे। इसके बाद अगले दिन 24 नवंबर की रात को उन्होंने अपने घर की लिए वापसी भी कर दी थी।
वापसी के दौरान ही हादसा हुआ था। घटना के बाबत ग्राम बारादरी निवासी गुरसेवक सिंह के चाचा गुरजीत सिंह कोटिया ने बताया की 23 नवंबर की दोपहर गुरसेवक अपने गांव में गांव के ही युवाओं के साथ वॉलीबॉल खेल रहा था। इस दौरान कार सवार कुछ उसके साथी आए और उसे आनन फानन कार में बैठाकर नैनीताल जाने की बात कहते हुए ले गए। उनका कहना है कि गुरसेवक नजदीक ही अपने घर जाकर भी परिजनों को यह नहीं बता सका कि वह नैनीताल क्यों जा रहा है। इसी तरह ग्राम सिकरौरा निवासी जगजीत सिंह उर्फ जस्सु की भाभी अमनदीप कौर पत्नी अमरीक सिंह ने बताया कि 23 नवंबर की दोपहर जस्सू घर में सबके साथ बैठकर चाय पी रहा था।
इस दौरान कार सवार दोस्त उसे अधूरी चाय वहीं छोड़कर अपने साथ ले गए। इस दौरान जस्सू अपनी मां से 2000 रुपये भी ले गया था। इसी तरह ग्राम बिजली फॉर्म निवासी सुखमीत सिंह चाहल के पिता इकबाल सिंह ने बताया कि उनका पुत्र सुखमीत सिंह चाहल घर के बाहर चप्पल पहने घूम रहा था। इस बीच पहुंचे कार सवार उसके साथी उसे चप्पलों में ही अपने साथ नैनीताल ले गए। उनका यह भी कहना था कि सुखमीत जब भी घर से बाहर निकलता था तो बिना जूते पहने और बिना तैयार हुए कहीं नहीं जाता था। लेकिन उस दिन न जाने क्यों खाली चप्पल और घरेलू कपड़ों में ही चला गया।
इसी तरह रवि प्रताप के परिजनों ने भी रवि को चप्पल में ही रवि प्रकाश के घर से जाने की बात बताई। ग्राम रतनपुरा निवासी जगरूप के परिजनों ने भी जगरूप का इसी तरह अचानक घर से चले जाने की बात कही। लोगों में इस बात की भी चर्चा थी कि रुद्रपुर के समीप इन पांचों दोस्तों को उनका छठा दोस्त पिंकी नाम का युवक भी मिला था और उसे भी आनन फानन में कार में बैठा लिया था। पिंकी ने इस बात का विरोध किया था कि वह घर में बिना बताए ऐसी कपड़ों में कहीं नहीं जाएगा।
बताते हैं कि कार सवार पांचों युवकों ने उसे घर न जाने की बात कही थी। लेकिन इस दौरान पिंकी रुद्रपुर में ही एक होटल के समीप दोस्तों से नाराज होकर उतर गया था। इसके बाद सभी दो चले गए थे। इस तरह पांचों युवाओं का आनन फानन में जाना और मात्र एक रात रुक कर अगले दिन वापस आने की बात लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। फिलहाल परिजन हादसे के सदमे में हैं।
अभी कुछ दिन पूर्व ही रवि प्रताप ने बेची थी कुछ जमीन
ग्राम बिजली फॉर्म के लोगों ने बताया कि अभी कुछ दिन पूर्व ही रवि प्रताप सिंह ने अपनी कुछ जमीन बेची थी। लोगों ने यहां तक बताया कि जब वह नैनीताल को गया था तो उसके पास करीब ढाई लाख रुपये की नकदी होना बताया है। जो पुलिस को नहीं मिली है।
सभी का अलग-अलग समय हुआ अंतिम संस्कार
रविवार को ग्राम रतनपुरा में जगरूप सिंह का सुबह 10:00 बजे अंतिम संस्कार हुआ। ग्राम बारादरी निवासी गुरसेवक सिंह उर्फ गुरी का 10:30 बजे अंतिम संस्कार हुआ। ग्राम सिकरौरा के जगजीत सिंह उर्फ जस्सू का 11:00 अंतिम संस्कार किया गया। ग्राम बिजली फार्म में सुखमीत सिंह चाहल का दोपहर 1:00 बजे और रवि प्रताप सिंह का दोपहर 2:00 बजे तमाम लोगों की मौजूदगी में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
इकलौते पुत्र होने की वजह से तीन घर के बुझ गए चिराग
बिलासपुर के ग्राम बिजली फॉर्म निवासी स्वर्गीय बलबीर सिंह उर्फ वीरा के पुत्र रवि प्रताप सिंह भी अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। इसी गांव के सुखमीत सिंह चाहल भी अपने पिता इकबाल सिंह के इकलौते पुत्र थे। जबकि, ग्राम रतनपुरा निवासी रिटायर्ड फौजी अमरीक सिंह के पुत्र जगरूप सिंह भी अपने पिता के इकलौते पुत्र थे। इन तीन युवाओं की मौत से उनके परिजन बेहद सदमे में हैं।
गुरी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका भाई
बिलासपुर के ग्राम बारादरी निवासी मलकीत सिंह के दो पुत्र रणजीत सिंह और गुरसेवक सिंह में रणजीत सिंह इंग्लैंड में नौकरी करते हैं। अंतिम संस्कार में शामिल लोगों ने बताया कि भाई की हादसे में गई जान के बारे में रणजीत सिंह को फोन पर बताया गया है। लेकिन वह अपने भाई की अंतिम संस्कार में समय अभाव की वजह से नहीं आ सके। लोगों का कहना था कि हादसे में गुरी का शव बुरी तरह क्षत विक्षिप्त हो चुका था। इसलिए अंतिम संस्कार तत्काल करना जरूरी था। इस वजह से उनका भाई रणजीत सिंह शामिल नहीं हो सका है।
कैंसर से पीड़ित है रवि प्रकाश की नेत्रहीन मां
ग्राम बिजली फॉर्म निवासी स्वर्गीय बलवीर सिंह उर्फ वीरा की पत्नी वेयंत कौर अपने पति की मृत्यु के पश्चात कैंसर रोग से पीड़ित हो गईं और इस दौरान उनकी आंखें भी चली गईं। रवि ही एक मात्र उनका सहारा था। बेअंत कौर की इकलौती पुत्री हर कीर्तन कौर ही अब उनकी सेवा करेंगी।
राधा स्वामी हैं गुरसेवक के पिता
ग्राम बारादरी निवासी गुरसेवक सिंह के पिता मलकीत सिंह के बारे में लोगों ने बताया कि वह राधा स्वामी हैं और सत्संग आदि में सेवा करने में ही वह अपने आप को मशगूल रखते हैं। 23 नवंबर को जब गुरु सेवक घर से नैनीताल गया था तब भी मलकीत सिंह सेवा करने के लिए ब्यास गए हुए थे। घटना की जानकारी होने पर वह रविवार की रात घर पहुंचे हैं।
जगजीत ही कर सका था भाभी से बात
ग्राम सिकरौरा निवासी जगजीत सिंह उर्फ जस्सु के भाई अमरीक सिंह ने बताया कि जस्सु 23 तारीख को नैनीताल के लिए अपने दोस्तों के साथ गया था। जाते समय भी उसकी परिजनों से बात होती रही थी। 24 नवंबर की रात करीब 8:00 बजे अमरीक की पत्नी अमनदीप कौर ने जस्सू से बात की थी। इसके बाद बात करने के लिए फोन मिलाया तो संपर्क नहीं हो सका। अमनदीप कौर का कहना है कि आखिरी बार उनकी बात 24 नवंबर की रात करीब 8:00 बजे ही हुई है।