फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Rampur News ›   Learned the tricks of politics while imamating the mosque, won Rampur

Rampur News: मस्जिद की इमामत करते हुए सीखे राजनीति के गुर, जीता रामपुर

Thu, 06 Jun 2024 01:06 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर Updated Thu, 06 Jun 2024 01:06 AM IST
विज्ञापन
Learned the tricks of politics while imamating the mosque, won Rampur
रामपुर। स्वार क्षेत्र के रजानगर गांव निवासी एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले मौलाना मोहिब्बुल्लाह नदवी पिछले 15 सालों से दिल्ली पार्लियामेंट्री मस्जिद के इमाम हैं। इमामत करते हुए मुस्लिम नेताओं को नमाज पढ़ाते हुए वह राजनीति के गुर भी सीख गए। जिसके चलते उनका नाम रामपुर की सियासत से जोड़कर देखा गया और उनको रामपुर लोकसभा से मैदान में उतारा गया।
विज्ञापन

संभल के सांसद रहे वरिष्ठ सपा नेता शफीकुर्रहमान बर्क भले ही इस दुनिया में नहीं हों लेकिन उन्होंने ही रामपुर की सियासत में बदलाव के संकेत दिए थे। लोकसभा चुनाव के टिकट बंटवारे से कुछ महीने पहले ही मरहूम बर्क ने मौलाना नदवी की मुलाकात सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से कराई थी। रामपुर सीट से प्रत्याशी की उठापटक की टेंशन को कम करने के लिए अखिलेश यादव की नजरों में मौलाना नदवी ने अपनी जगह बना ली।
विज्ञापन

जिसके चलते सपा नेता आजम खां के अखिलेश यादव को रामपुर से चुनाव लड़ने का न्योता किसी को हजम नहीं हुआ। अखिलेश यादव ने भी आजम खां के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। इसी बीच 26 मार्च को नामांकन से ठीक एक दिन पहले आजम खां के करीबी आसिम राजा व सपा जिलाध्यक्ष अजय सागर ने प्रेसवार्ता करते हुए रामपुर में चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी, जो अखिलेश यादव को नागवार गुजरी, जिसके बाद अखिलेश यादव ने रामपुर की सियासत में नए मुस्लिम चेहरे पर दांव खेलना बेहतर समझा।
विज्ञापन
विज्ञापन

चुनाव से करीब तीन महीने पहले ही सपा हाईकमान ने मौलाना को रामपुर से चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहने के लिए बोल दिया था। जिसमें उन्हें अपने सभी पेपर तैयार करने को कहा गया। जैसे ही रामपुर में प्रत्याशी को लेकर संकट जैसी स्थिति पैदा हुई तो नामांकन के दिन सपा ने मौलाना मोहिब्बुल्लाह को मैदान में उतार दिया। जो आजम खां व समर्थकों को हजम तो नहीं हुआ, विरोध के बावजूद मौलाना नदवी को पांचों विधानसभा से खूब वोट बरसे। हालांकि बिलासपुर और मिलक में उन्हें हार का सामना जरूर करना पड़ा, लेकिन स्वार, शहर और चमरौआ ने उनकी नैया का बखूबी पार लगा दिया। इस तरह शफीकुर्रहमान बर्क की एक मुलाकात से शुरू हुआ मौलाना का सफर सांसद बनने तक पहुंच गया है।
नए चेहरे और साफ छवि का मिला मौलाना नदवी को लाभ
रामपुर को नवाबों का शहर कहा जाता है, यहां के लोगों में नवाबियत झलकती भी है। नए और साफ चेहरों को रामपुर ने हमेशा पसंद किया और दिल्ली भेजा है। आजादी के बाद पहले लोकसभा चुनाव में मौलाना अबुल कलाम आजाद को रामपुर से सांसद चुना गया, वो देश के पहले शिक्षामंत्री बने। वहीं मुख्तार अब्बास नकवी, जयाप्रदा भी इसके ताजा उदाहरण हैं। जिन्हें रामपुर की जनता ने दिल्ली का रास्ता दिखाया है। मौलाना नदवी पर पारिवारिक कुछ आरोप जरूर सुर्खियों में आए, लेकिन जनता ने उनको दरकिनार कर उन्हें अपना सांसद चुन लिया।

आजम खां के विरोध में नहीं बोले मौलाना नदवी
नवनिर्वाचित सांसद मौलाना मोहिब्बुल्लाह नदवी भले ही राजनीति में नए हों, लेकिन उन्होंने चुनाव के दौरान कदम-कदम संभलकर रखा। आजम खां के सवालों पर उन्होंने हमेशा उनको अलग न होने की बात कही। उन्होंने पोस्टर पर आजम खां को जगह भी दी, जिसका फायदा उन्हें चुनाव में खूब मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed