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लालपुर पुल के निर्माण के लिए शासन से जारी नहीं हो सका धन, पांच लाख आबादी को हो रहीं दिक्कतें

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 14 Nov 2021 12:06 AM IST
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lalpur bridge issue
रामपुर। जिले का विकास जमीन पर नहीं उतर पा रहा है। रामपुर में सबसे अहम है लालपुर पुल, जिसके लिए अब तक धन जारी नहीं हो सका है। हालांकि, लोगों की सहूलियत के लिए सेतु निगम ने मानसून खत्म होने के बाद अस्थाई पुल बनाया था, किन्तु वह पुल भी बाढ़ के पानी में बह गया। ऐसे में अब लोगों को जिला मुख्यालय तक आने के लिए 40 किलोमीटर अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। इसके चलते डीजल, पेट्रोल की खपत अधिक होने के साथ ही लोगों को किराए में भी अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं। 34 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस पुल से करीब पांच लाख की आबादी को लाभ होगा।
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रामपुर और टांडा को जोड़ने वाला लालपुर पुल क्षेत्र के लोगों के लिए खास है। कोसी नदी पर अंग्रेजों के शासन में बना पुल काफी जर्जर हालत में था, जिस वजह से यहां नए पुल को मंजूरी मिली थी। 2014 में भेजे गए पुल के इस प्रस्ताव पर शासन की मुहर 2016 में लगी थी। करीब दस करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले पुल के लिए तब सरकार ने करीब आठ करोड़ रुपये जारी कर दिए गए थे। इसके बाद पुल का काम शुरू हो गया था, जो 2017 तक चला। तब तक जारी किया हुआ पैसा खर्च हो चुका था और शासन से शेष धनराशि जारी नहीं की जा सकी थी। ऐसे में पुल का काम अधर में ही लटका रहा। यह काम करीब चार साल से लटका हुआ है। सेतु निगम के अफसरों की मानें तो पुल की ड्राइंग में भी परिवर्तन किया गया है, जिस कारण पुल निर्माण पर खर्च होने वाला धन अधिक खर्च होगा। इसके अलावा चार साल का लंबा अंतराल हो गया, जिसकी वजह से मैटेरियल के दामों में भी इजाफा हुआ है। लिहाजा, सेतु निगम की ओर से 34.35 करोड़ रुपये का नया प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। 23 सितंबर 2020 को खुद उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने रामपुर आकर पुल का निर्माण शुरू कराया था। तब उन्होंने पुल का पैसा शीघ्र ही जारी कराने की बात कही थी, लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से कामकाज सुस्त रहा।
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शासन ने लालपुर पुल के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद वित्त विभाग भेज दिया था। जहां से शासनादेश जारी होना है। किन्तु, दो माह से एक शासनादेश जारी नहीं हो पा रहा है, जिस कारण पुल के निर्माण के लिए विभाग को धन नहीं मिल पा रहा है। इसी वजह से पुल का निर्माण अटका हुआ। इसकी वजह से टांडा क्षेत्र की करीब पांच लाख आबादी को दिक्कतें हो रही हैं। लोगों को जिला मुख्यालय तक आने के लिए 40 किलोमीटर अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है।
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