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जिले में ऑक्सीजन प्लांट तो बन गए लेकिन, संचालन के लिए तकनीकी कर्मियों का टोटा
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रामपुर। कोरोना की दूसरी लहर में बेड और ऑक्सीजन की सबसे अधिक किल्लत सामने आई थी। ऑक्सीजन सिलिंडरों के लिए तो मारामारी मच गई थी। ऐसे में जिले में तीसरी लहर से निपटने के लिए ऑक्सीजन उपलब्धता के संसाधन तो बढ़ाए गए लेकिन, मानव संसाधन की कमी के चलते इनका संचालन कहीं बंद पड़ा है तो कहीं कम कर्मियों के सहारे ही चलाए जा रहे हैं।
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन सिलिंडर को लेकर मची मारामारी के चलते जिले में ऑक्सीजन उपलब्धता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर काम हुआ है। दूसरी लहर के बाद जिले में जिला अस्पताल में एक हजार एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) क्षमता का एक, बिलासपुर सीएचसी में तीन सौ एलपीएम क्षमता का एक और जिला महिला अस्पताल में पांच सौ एलपीएम क्षमता का एक ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। जिसमें महिला अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण अभी चल रहा है। इसके साथ ही ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर से लेकर जंबो डी टाइप और बी-टाइप ऑक्सीजन सिलिंडर की उपलब्धता बढ़ाई गई है।
लेकिन, ये सब मानव संसाधन की कमी के चलते पूरी तरह से क्रियाशील नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अगर अभी कोरोना की तीसरी लहर आती है तो सबसे पहले मानव संसाधन पूरे करने की चुनौती होगी।
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मौजूदा समय में जिला अस्पताल का डेढ़ सौ एलपीएम क्षमता का पुराना ऑक्सीजन प्लांट खराब पड़ा है तो बिलासपुर सीएचसी का 300 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट उसके संचालन के लिए तकनीकी कर्मियों की तैनाती न होने के कारण बंद पड़ा है। वहीं महिला अस्पताल में अभी ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। जिला अस्पताल के नए एक हजार एलपीएम क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट चलाने के लिए भी चार कर्मियों की जरूरत है लेकिन, मौजूदा समय में दो कर्मी ही मौजूद हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन सिलिंडर को लेकर मची मारामारी के चलते जिले में ऑक्सीजन उपलब्धता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर काम हुआ है। दूसरी लहर के बाद जिले में जिला अस्पताल में एक हजार एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) क्षमता का एक, बिलासपुर सीएचसी में तीन सौ एलपीएम क्षमता का एक और जिला महिला अस्पताल में पांच सौ एलपीएम क्षमता का एक ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है। जिसमें महिला अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण अभी चल रहा है। इसके साथ ही ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर से लेकर जंबो डी टाइप और बी-टाइप ऑक्सीजन सिलिंडर की उपलब्धता बढ़ाई गई है।
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लेकिन, ये सब मानव संसाधन की कमी के चलते पूरी तरह से क्रियाशील नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अगर अभी कोरोना की तीसरी लहर आती है तो सबसे पहले मानव संसाधन पूरे करने की चुनौती होगी।
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मौजूदा समय में जिला अस्पताल का डेढ़ सौ एलपीएम क्षमता का पुराना ऑक्सीजन प्लांट खराब पड़ा है तो बिलासपुर सीएचसी का 300 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट उसके संचालन के लिए तकनीकी कर्मियों की तैनाती न होने के कारण बंद पड़ा है। वहीं महिला अस्पताल में अभी ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। जिला अस्पताल के नए एक हजार एलपीएम क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट चलाने के लिए भी चार कर्मियों की जरूरत है लेकिन, मौजूदा समय में दो कर्मी ही मौजूद हैं।