Kartoos Kand: कोर्ट की तल्ख टिप्पणी...निजी लाभ के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला, नरमी नहीं बरत सकते
रामपुर कारतूस कांड के सभी दोषियों को दस साल के कारावास की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि दोषियों पर कानून-व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने सिर्फ और सिर्फ लाभ कमाने के मकसद से संगठित अपराध को अंजाम दिया। मामले में मुख्य आरोपी दरोगा यशोदानंदन की मौत हो चुकी है।
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रामपुर की विशेष अदालत ने नक्सलियों को कारतूस बेचने वाले बीस जवानों समेत 24 दोषियों को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई। सभी दोषियों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इनमें 16 पुलिसकर्मी, पीएसी के दो जवान, सीआरपीएफ के दो हवलदार और चार आम नागरिक हैं। जबकि, मुख्य आरोपी पीएसी के रिटायर्ड दरोगा यशोदानंदन की मौत हो चुकी है। विशेष जज विजय कुमार द्वितीय की अदालत ने शुक्रवार को दोषियों को सजा सुनाई।
इस दौरान सभी दोषी कोर्ट में मौजूद रहे। सीआरपीएफ के दोनों हवलदारों विनोद व विनेश को आर्म्स एक्ट में सात साल की कैद और 10-10 हजार रुपये के अतिरिक्त जुर्माने की सजा सुनाई गई। इनकी सजाएं एक साथ चलेंगी। सजा सुनाते वक्त कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, दोषियों ने निजी लाभ के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा तक को खतरे में डाल दिया। इस सांठगांठ में चार नागरिक भी शामिल हैं।
दोषियों पर कानून-व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने सिर्फ और सिर्फ लाभ कमाने के मकसद से संगठित अपराध को अंजाम दिया। इनका नेटवर्क यूपी के विभिन्न जिलों में फैला था। दोषी सैन्यबल से थे, इसलिए नरमी के हकदार नहीं हैं। उन्हें कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए। सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों को वापस जेल भेज दिया गया। बृहस्पतिवार को पुलिस, पीएसी व सीआरपीएफ के 20 कर्मियों के साथ चार अन्य को दोषी करार दिया गया था।
अब भी सेवा में हैं 14 पुलिसकर्मी
कोर्ट ने जिन पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई है, उनमें से 14 अभी नौकरी में हैं। सजायाफ्ता 24 लोगों में से सीआरपीएफ के दोनों हवलदार व चार पुलिस कर्मी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके अलावा, इसमें चार नागरिक भी हैं, जो कारतूस की आपूर्ति करने का काम करते थे।
एसटीएफ के अफसरों ने ग्राहक बनकर दबोचा
कारतूस कांड में सजा पाने वाले नाथीराम सैनी को पकड़ने के लिए एसटीएफ अफसरों ने ग्राहक बनकर जाल बिछाया था। पुलिस अकादमी के आर्मोरर नाथीराम को जिस सौदागर को कारतूसों की सप्लाई देनी थी, एसटीएफ ने उसे रामपुर में दबोच लिया था। उस सौदागर ने अफसरों को कोड नंबर बताया था। जब अफसरों ने वही कोड नंबर नाथीराम को बताया, तो उसने 400 कारतूसों से भरा बैग उन्हें थमा दिया था।
13 साल बाद फैसला...सजा सुनते ही फफक पड़े वर्दीधारी
वर्दीधारियों ने किस तरह आयुध भंडार के साथ ही मालखानों में सेंधमारी कर कारतूस और हथियारों का घोटाला किया, इसकी पूरी कहानी 85 पेज के कोर्ट के फैसले में दी गई है। 13 साल पुराने इस केस में नौ गवाह बनाए गए थे। कोर्ट ने जैसे ही सजा का एलान किया, सीआरपीएफ के रिटायर्ड हवलदार समेत ज्यादातर दोषी फफक पड़े।