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दो महिलाओं ने बचाई राजनीति विरासत
ब्यूरो/अमर उजाला मिलक
Updated Tue, 03 Nov 2015 11:34 PM IST
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पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य के लिए निर्वाचित दो महिलाएं अपने पतियों की राजनीतिक विरासत बचाने में कामयाब हो गईं। इससे राजनीतिक खेमे में उनकी चर्चा आम रही। 2005 में जिला पंचायत सदस्य रहे डा. शंकर लाल की पत्नी सुषमा पटेल वर्ष 2015 में पंचायत सदस्य वार्ड 35 से निर्दलीय के रूप जीत दर्ज की हैं।
उन्होंने अपने पति की विरासत को बचा लिया है। उनका मुकाबला डीसीबी के पूर्व चेयरमैन अमरीश पटेल के भांजे रजनीश पटेल से था। इसी तरह 2010 में सदस्य रहे फैय्याज खां की पत्नी शाहिदा बेगम पंचायत सदस्य वार्ड संख्या 33 से चुनाव लड़ीं। इसमें उन्होंने भी अपने पति की विरासत को संभाले रखा है।
उन्होंने भाजपा के समर्थित प्रत्याशी रोहताश मोर्य को हराया है। वहीं दूसरी ओर जहां पर दो महिलाओं ने अपने पतियों की राजनीतिक विरासत बचाई। वहीं, दूसरी ओर जिला पंचायत सदस्य दर्शनवती की पिछले दिनों मौत होने पर उनके पति जागन सिंह जिला पंचायत के वार्ड 34 से चुनाव लड़े, लेकिन वह अपनी पत्नी की सीट नहीं बचा पाए। उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी नेहा कश्यप हराया है।
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उन्होंने अपने पति की विरासत को बचा लिया है। उनका मुकाबला डीसीबी के पूर्व चेयरमैन अमरीश पटेल के भांजे रजनीश पटेल से था। इसी तरह 2010 में सदस्य रहे फैय्याज खां की पत्नी शाहिदा बेगम पंचायत सदस्य वार्ड संख्या 33 से चुनाव लड़ीं। इसमें उन्होंने भी अपने पति की विरासत को संभाले रखा है।
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उन्होंने भाजपा के समर्थित प्रत्याशी रोहताश मोर्य को हराया है। वहीं दूसरी ओर जहां पर दो महिलाओं ने अपने पतियों की राजनीतिक विरासत बचाई। वहीं, दूसरी ओर जिला पंचायत सदस्य दर्शनवती की पिछले दिनों मौत होने पर उनके पति जागन सिंह जिला पंचायत के वार्ड 34 से चुनाव लड़े, लेकिन वह अपनी पत्नी की सीट नहीं बचा पाए। उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी नेहा कश्यप हराया है।
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