रामपुर। कांग्रेस नेत्री के बेटे से पुलिस कस्टडी में मारपीट करने और फिर हवालात में उसकी मौत हो जाने के बीस साल पुराने मामले में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने तत्कालीन सिविल लाइंस प्रभारी पीडी रत्नाकर को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया है।
मामला सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के ज्वालानगर से जुड़ा हुआ है। लेबर कालोनी निवासी जाहिदा तब्बसुम के मकान में 12 दिसंबर 2001 की रात में कुछ बदमाश घुस गए थे, जिस पर उन्होंने परिवार के लोगों के साथ मारपीट की और कांग्रेस नेत्री जाहिदा के फोटोग्राफर पति मिर्जा शमशाद अहमद को गंभीर चोटें आई थीं। इलाज के दौरान मिर्जा शमशाद की मौत हो गई थी। पुलिस ने शक के आधार पर कांग्रेस नेत्री के बेटे मिर्जा कमाल अहमद को उठा लाई थी। पुलिस ने हत्या का राज खुलवाने के लिए थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया और फिर जेल भी भेज दिया था। जेल में इलाज के दौरान ही मिर्जा कमाल की भी मौत हो गई थी। पुलिस ने फोटोग्राफर की हत्या में कांग्रेस नेत्री जाहिदा तब्बसुम और बेटे कमाल मिर्जा के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की थी, लेकिन जब कोर्ट में सुनवाई हुई तो सच सामने आया। कोर्ट ने इस मामले में जाहिदा तब्बसुम को बरी कर दिया था। साथ ही कोर्ट ने इस मामले में तत्कालीन सिविल लाइंस प्रभारी पीडी रत्नाकर के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। इसका ट्रायल कोर्ट में चल रहा था, जिसमें कांग्रेस नेत्री की बेटी सईद फात्मा ने भी अपने बयान दर्ज कराए हैं। अब इस मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी पूर्व इंस्पेक्टर पीडी रत्नाकर को हत्या के आरोप से बरी कर दिया।