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कोविड संक्रमित मरीजों को चिन्हित करने में निगरानी समितियों की बैठक अहम
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रामपुर। जिलाधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय परिसर में आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम प्रधान, लेखपाल, एडीओ पंचायत और स्थानीय लोगों से गांव में चलाए जा रहेसफाई और सैनिटाइजेशन अभियान सहित कोविड-19 के तहत जारी गाइडलाइन के अनुसार निगरानी समिति के सदस्यों की सक्रियता के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा जरूरी निर्देश दिए।
बुधवार को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने तहसील स्वार क्षेत्र के अंतर्गत उत्तराखंड की सीमा से लगे ग्राम पंचायत पुसवाड़ा पहुंच कर निगरानी समिति के सदस्यों के साथ बैठक की। उन्होंने आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से दस्तक अभियान के दौरान चिह्नित किए गए कोविड-19 जैसे लक्षणों वाले मरीजों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि दूसरे जनपद अथवा अन्य प्रदेशों से वापस अपने घरों को आने वाले लोगों को सात दिन तक होम आइसोलेशन में रहना अनिवार्य है। इस दौरान यदि उन्हें कोई लक्षण आते हैं, तो निगरानी समितियों का यह दायित्व होगा कि वह प्राथमिक स्तर पर ही जरूरी दवाइयों की मेडिकल किट उपलब्ध कराएं, ताकि समय से उपचार प्रारंभ हो जाए तथा संक्रमण का स्तर बढ़ने न पाए।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति द्वारा यदि सामान्य लक्षण दिखने पर प्राथमिक स्तर से ही कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार प्रारंभ कर दिया जाता है, तो मरीज को गंभीर समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है। नवनिर्वाचित प्रधान से बातचीत के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि गांव में संक्रमण को फैलने से रोकने में ग्राम प्रधान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए निगरानी समिति के अध्यक्ष होने के नाते उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे शासन द्वारा जारी गाइडलाइन का गांव में सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं।
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उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के जुकाम, बुखार या कोविड-19 के अन्य लक्षण होने पर लापरवाही बिल्कुल न बरतें। खुद को परिवार के अन्य सदस्यों से अलग करें तथा कोविड टेस्ट कराएं। उन्होंने कहा कि संक्रमित व्यक्ति यदि स्वयं को अपने घर में ही आइसोलेट करते हैं, तो उनके लिए अलग कमरा और अलग शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा यदि किसी कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति के पास आइसोलेशन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, तो उनके लिए नजदीकी प्राथमिक विद्यालय अथवा पंचायत घर में आइसोलेशन की व्यवस्था कराई गई है।
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बुधवार को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने तहसील स्वार क्षेत्र के अंतर्गत उत्तराखंड की सीमा से लगे ग्राम पंचायत पुसवाड़ा पहुंच कर निगरानी समिति के सदस्यों के साथ बैठक की। उन्होंने आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से दस्तक अभियान के दौरान चिह्नित किए गए कोविड-19 जैसे लक्षणों वाले मरीजों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि दूसरे जनपद अथवा अन्य प्रदेशों से वापस अपने घरों को आने वाले लोगों को सात दिन तक होम आइसोलेशन में रहना अनिवार्य है। इस दौरान यदि उन्हें कोई लक्षण आते हैं, तो निगरानी समितियों का यह दायित्व होगा कि वह प्राथमिक स्तर पर ही जरूरी दवाइयों की मेडिकल किट उपलब्ध कराएं, ताकि समय से उपचार प्रारंभ हो जाए तथा संक्रमण का स्तर बढ़ने न पाए।
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उन्होंने कहा कि कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति द्वारा यदि सामान्य लक्षण दिखने पर प्राथमिक स्तर से ही कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार प्रारंभ कर दिया जाता है, तो मरीज को गंभीर समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है। नवनिर्वाचित प्रधान से बातचीत के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि गांव में संक्रमण को फैलने से रोकने में ग्राम प्रधान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए निगरानी समिति के अध्यक्ष होने के नाते उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे शासन द्वारा जारी गाइडलाइन का गांव में सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं।
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उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के जुकाम, बुखार या कोविड-19 के अन्य लक्षण होने पर लापरवाही बिल्कुल न बरतें। खुद को परिवार के अन्य सदस्यों से अलग करें तथा कोविड टेस्ट कराएं। उन्होंने कहा कि संक्रमित व्यक्ति यदि स्वयं को अपने घर में ही आइसोलेट करते हैं, तो उनके लिए अलग कमरा और अलग शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा यदि किसी कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति के पास आइसोलेशन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, तो उनके लिए नजदीकी प्राथमिक विद्यालय अथवा पंचायत घर में आइसोलेशन की व्यवस्था कराई गई है।