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प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी, भक्तों की लगी है कतार भवानी....
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रामपुर। भव्य रूप से सजे मातारानी के दरबार श्रद्धालुओं के उद्घोष से गूंज उठे। दिनभर श्रद्धालुओं ने कलश स्थापना कर महामाईं की पूजा कर व्रत धारण किया। शंखनाद और घंटों की टंकार से वातावरण गूंज उठा। शक्ति स्थलों में पूजा अर्चना करने के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। दिन भर श्रद्धालु मां दुर्गे की आराधना में खोए रहे। महिलाओं ने मां के छंद गाकर मातारानी का गुणगान किया।श्रद्धालुओं ने प्रथम मां शैलपुत्री की आराधना कर आशीष लिया।
गुरुवार को सुबह से ही शारदीय नव दुर्गा समारोह तैयारी होनी शुरू हो गईं थीं। श्रद्धालुओं ने पूजा स्थल पर रंगोली बनाई। कलश में गंगाजल, हल्दी, पंचामृत और चंदन डाला। दूर्वा घास, आम की टहनी और अक्षत रखने के बाद कलावा बांधकर नारियल रखा। महामाईं के मंत्रोच्चारण के बीच पूजन कर कलश स्थापना की। मां की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराया। महामाईं का भव्य श्रृंगार कर विधि विधान से पूजा अर्चना कर सिंहासन पर विराजमान किया। कलश स्थापना के बाद प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की आराधना प्रारंभ हुई। मां को चुंदरी ओढ़ाकर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। प्रथम अध्याय के वाचन के बाद भगवान गणेश की आरती उतारी। दुर्गा चालीसा का पाठ कर मां अंबे की आरती उतारी गई। परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुुओं ने सामूहिक रूप से पूजा अर्चना के बाद व्रत धारण किया । दिनभर घरों में कलश स्थापना और पूजा अर्चना होती रही। शाम होते ही महिलाओं ने छंद गाकर महामाई की आराधना की।
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गुरुवार को सुबह से ही शारदीय नव दुर्गा समारोह तैयारी होनी शुरू हो गईं थीं। श्रद्धालुओं ने पूजा स्थल पर रंगोली बनाई। कलश में गंगाजल, हल्दी, पंचामृत और चंदन डाला। दूर्वा घास, आम की टहनी और अक्षत रखने के बाद कलावा बांधकर नारियल रखा। महामाईं के मंत्रोच्चारण के बीच पूजन कर कलश स्थापना की। मां की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराया। महामाईं का भव्य श्रृंगार कर विधि विधान से पूजा अर्चना कर सिंहासन पर विराजमान किया। कलश स्थापना के बाद प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की आराधना प्रारंभ हुई। मां को चुंदरी ओढ़ाकर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। प्रथम अध्याय के वाचन के बाद भगवान गणेश की आरती उतारी। दुर्गा चालीसा का पाठ कर मां अंबे की आरती उतारी गई। परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुुओं ने सामूहिक रूप से पूजा अर्चना के बाद व्रत धारण किया । दिनभर घरों में कलश स्थापना और पूजा अर्चना होती रही। शाम होते ही महिलाओं ने छंद गाकर महामाई की आराधना की।
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