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परिणय परंपरा शुरू करने वाली मां से की मंगल कामना
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Sat, 17 Oct 2015 11:49 PM IST
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नवरात्र के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने मां के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा-अर्चना की। परिणय परंपरा प्रारंभ करने वाली नारी शक्ति की द्योतक मां स्कंदमाता से भक्तों ने मंगल कामना की। मंदिरों में भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया गया। शारदीय नवत्ररात्र में शनिवार को देवी मां के स्कंदमाता स्वरूप का पूजन किया गया।
सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। शंख, घंटे-घड़ियाल की ध्वनि के बीच मां के जयकारे लगाते हुए भक्तों ने मां की पूजा-अर्चना की। भक्तों ने नारियल, पुष्प, कपूर, फल, लौंग, मखाने आदि से माता की विधिवत पूजा कर सर्वमंगल की कामना की। पंडित नवनीत शर्मा ने बताया कि देवी स्कंदमाता कार्तिकेय और गणेशजी की मां हैं।
स्कंदकुमार की माता होने के कारण ही मां पार्वती का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह स्वरूप शक्ति का द्योतक है। ताड़कासुर का वध करने के लिए भगवान शंकर और मां पार्वती ने विवाह किया। इसी भगवान शंकर और पार्वती के मांगलिक मिलन को सनातन संस्कृति में परिणय परंपरा का प्रारंभ माना गया है।
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स्कंदमाता की उपासना से भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। मंदिरों में सुबह और शाम को भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया। शहर के प्राचीन श्री दुर्गा शक्तिपीठ मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, माई का थान, पीडब्ल्यूडी कालोनी स्थित मंदिर, नर्मदेश्वर मंदिर, जिला पंचायत रोड स्थित शिव मंदिर, मनोकामना मंदिर, हरिहर मंदिर, ज्वाला जी दरबार मंदिर समेत समस्त मंदिरों में पूरे दिन भक्तों की चहल-पहल रही।
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सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। शंख, घंटे-घड़ियाल की ध्वनि के बीच मां के जयकारे लगाते हुए भक्तों ने मां की पूजा-अर्चना की। भक्तों ने नारियल, पुष्प, कपूर, फल, लौंग, मखाने आदि से माता की विधिवत पूजा कर सर्वमंगल की कामना की। पंडित नवनीत शर्मा ने बताया कि देवी स्कंदमाता कार्तिकेय और गणेशजी की मां हैं।
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स्कंदकुमार की माता होने के कारण ही मां पार्वती का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह स्वरूप शक्ति का द्योतक है। ताड़कासुर का वध करने के लिए भगवान शंकर और मां पार्वती ने विवाह किया। इसी भगवान शंकर और पार्वती के मांगलिक मिलन को सनातन संस्कृति में परिणय परंपरा का प्रारंभ माना गया है।
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स्कंदमाता की उपासना से भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। मंदिरों में सुबह और शाम को भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया। शहर के प्राचीन श्री दुर्गा शक्तिपीठ मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, माई का थान, पीडब्ल्यूडी कालोनी स्थित मंदिर, नर्मदेश्वर मंदिर, जिला पंचायत रोड स्थित शिव मंदिर, मनोकामना मंदिर, हरिहर मंदिर, ज्वाला जी दरबार मंदिर समेत समस्त मंदिरों में पूरे दिन भक्तों की चहल-पहल रही।