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रजा लाइब्रेरी में मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर प्रदर्शनी का आयोजन हुआ
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रामपुर। मुंशी प्रेमचंद की 141वीं जयंती के अवसर पर रजा लाइब्रेरी की ओर से एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें रजा लाइब्रेरी में संग्रहित मुंशी प्रेमचंद की पुस्तकों और रचनाओं को प्रदर्शित किया गया।डॉ. बेबी तबस्सुम ने कहा कि प्रेमचंद जी का साहित्य पढ़ते हुए इस बात का आभास हुए बिना नहीं रहता है कि वे समाज के उत्पीड़ित वर्गों के प्रति गहरे रूप से संवेदनशील और जागरूक लेखक थे।
देश की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इसके तहत शनिवार को रजा लाइब्रेरी में मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन राजकीय महिला डिग्री कालेज की पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. किश्वर सुल्ताना, रजा डिग्री कालेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बेबी तबस्सुम और लाइब्रेरी के लाइब्रेरियन एवं सूचना अधिकारी डॉ. अबुसाद इस्लाही द्वारा किया गा।
इस अवसर पर डॉ. किश्वर सुल्ताना ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी जिन-जिन मुद्दों पर राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे थे उन्हीं मुद्दों को लेकर प्रेमचंद जी ने अपनी कहानियां और उपन्यासों के माध्यम से व्यापक स्तर पर जनजागरण किया। डॉ. अबुसाद इस्लाही ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ऐसे व्यक्ति थे, जो अपनी रचनाओं में बहुत ही स्पष्ट और कटु भाषाओं का उपयोग करते थे।
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प्रदर्शनी में प्रेमचंद की राष्ट्र-प्रेम की कहानियां, कर्बला, गोदान, कलम का सिपाही, प्रेमचंद जीवन कला और कृतित्व, सोजे़ वतन, गांधी और प्रेमचंद, प्रेमचंद का कहानी दर्शन आदि मुद्रित पुस्तकों एवं प्रेमचंद के विभिन्न फोटोग्राफ, सर्विस बुक को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी 31 जुलाई से 10 अगस्त तक चलेगी।
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देश की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इसके तहत शनिवार को रजा लाइब्रेरी में मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन राजकीय महिला डिग्री कालेज की पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. किश्वर सुल्ताना, रजा डिग्री कालेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बेबी तबस्सुम और लाइब्रेरी के लाइब्रेरियन एवं सूचना अधिकारी डॉ. अबुसाद इस्लाही द्वारा किया गा।
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इस अवसर पर डॉ. किश्वर सुल्ताना ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी जिन-जिन मुद्दों पर राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे थे उन्हीं मुद्दों को लेकर प्रेमचंद जी ने अपनी कहानियां और उपन्यासों के माध्यम से व्यापक स्तर पर जनजागरण किया। डॉ. अबुसाद इस्लाही ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ऐसे व्यक्ति थे, जो अपनी रचनाओं में बहुत ही स्पष्ट और कटु भाषाओं का उपयोग करते थे।
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प्रदर्शनी में प्रेमचंद की राष्ट्र-प्रेम की कहानियां, कर्बला, गोदान, कलम का सिपाही, प्रेमचंद जीवन कला और कृतित्व, सोजे़ वतन, गांधी और प्रेमचंद, प्रेमचंद का कहानी दर्शन आदि मुद्रित पुस्तकों एवं प्रेमचंद के विभिन्न फोटोग्राफ, सर्विस बुक को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी 31 जुलाई से 10 अगस्त तक चलेगी।