{"_id":"616f1ee671e25e70ce6c4f4f","slug":"elderly-lost-in-an-attempt-to-catch-wood-flowing-in-kosi-river-rampur-news-mbd406742127","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोसी नदी में बहती लकड़ी पकड़ने के प्रयास में बुजुर्ग बहा, लापता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोसी नदी में बहती लकड़ी पकड़ने के प्रयास में बुजुर्ग बहा, लापता
विज्ञापन
दढ़ियाल (रामपुर)। कोसी नदी में पहाड़ों से बहकर आ रहीं लकड़ियां पकड़ने के प्रयास में एक बुजुर्ग नबाब अली (60) नदी के तेज बहाव में बह गया और कुछ दूर जाकर कोसी पुल के पिलर से टकराकर नदी में डूब गया। इस दौरान मौके पर मौजूद अन्य तीन लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया और नदी में कूद गए। लेकिन, बहाव तेज होने के कारण तीनों युवक बुजुर्ग को बचा नहीं पाए और वापस नदी से बाहर आ गए। बुजुर्ग के नदी में बहकर लापता हो जाने से परिजनों में कोहराम मच गया। वहीं, सूचना पर पुलिस भी बुजुर्ग के घर पहुंची और जानकारी ली।
रामनगर बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण मंगलवार सुबह कोसी नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया। मंगलवार को कोसी नदी दढ़ियाल में खतरे के निशान 211 मीटर (समुद्र तल से) के ऊपर बह रही थी। इस दौरान नदी में पहाड़ों से कीमती लकड़ी, जड़ें और पेड़ भी आ रहे थे, जिन्हें निकालने के लिए नगर के मोहल्ला बाहरवाला निवासी नबाब अली (60) भी अन्य लोगों के साथ मोहल्ले के सामने बांध के पास कोसी नदी में चला गया।
हालांकि नवाब अली गन्ने के खेत में गया था, जिसमें नदी का जलस्तर बढ़ने से काफी पानी था। इस दौरान लगातार जलस्तर बढ़ने से वह गन्ने के खेत में ही फंस गया, जबकि अन्य लोग बाहर निकल आए। नवाब अली को पानी में फंसा देख लोगों में हड़कंप मच गया और उसे बाहर निकालने के प्रयास किए जाने लगे। आनन-फानन में नगर के तैराक अखलाक,यूनुस और इकरार भी पानी में फंसे नबाब अली को निकालने नदी में कूद गए।
विज्ञापन
इससे पहले कि वह नबाब अली के नजदीक पहुंचते कोसी की धार में बहकर आ रही सिंघाड़े की बेल में नबाब अली फंस गया और बहने लगा। उसे बचाने की कोशिश में तीनों तैराक भी बहने लगे। करीब तीन सौ मीटर आगे कोसी पुल के नीचे बेल के साथ फंसा नबाब अली पुल के पिलर से टकरा गया और डूब गया।
पुल के आगे पानी में नबाब अली के दिखाई न देने पर लोगों में हड़कंप मच गया और भारी भीड़ जमा हो गई। रोते बिलखते परिजन भी मौके पर पहुंच गए। सूचना पर टांडा कोतवाल गजेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर लोगों से घटना की जानकारी ली परिजनों को सांत्वना दी। खबर लिखे जाने तक नवाब अली का कुछ पता नहीं चल सका था।
नवाब अली के हैं 11 बच्चे
दढ़ियाल। कोसी नदी के बहाव में डूबे नवाब अली के ग्यारह बच्चे हैं। जिनमें चार पुत्र और सात बेटियां हैं। सबसे बड़े पुत्र और चार बेटियों की शादी हो चुकी है। तीनों बड़े पुत्र शमशेर, जमशेर और नाजिम राजमिस्त्री का काम करते हैं। सबसे छोटा पुत्र सरफराज अभी पढ़ाई कर रहा है। वे स्वयं मजदूरी करते हैं। तीन बेटों के राजमिस्त्री का काम करने से परिवार की आमदनी भी ठीक ठाक है। लोगों में चर्चा थी कि इस उम्र में उन्हें लकड़ी पकड़ने कोसी नदी में जाने की क्या आवश्यकता थी।
लकड़ियों के चक्कर में दांव पर लगा दी जान
दढ़ियाल। उत्तराखंड के जंगलों से कोसी नदी में बहकर आ रही कीमती लकड़ियों को पकड़ने में कई लोगों ने अपनी जान दांव पर लगा दी। इसमें किसी को सफलता हाथ लगी, तो कई लोगों की जान आफत में पड़ गई।
मंगलवार सुबह कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ पानी मे बड़ी मात्रा में उत्तराखंड के जंगलों की लकड़ी बहकर आनी शुरू हो गई। पानी में बहती लकड़ियों को पकड़ने के लिए कोसी बांध से लगे नगर के मोहल्ला बाहरवाला, ऊपरवाला, भरतपुर सहित ग्राम रामपुर धम्मन के पास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। बहुत से लोग पानी मे उतरकर रस्सी के सहारे लकड़ियों को बांधकर बाहर लाने में सफल रहे और वाहनों में भरकर घरों को ले गए।
वहीं, कई लोग लकड़ी पकड़ने के दौरान अपनी जान फंसा बैठे। लोगों के अनुसार रामपुर धम्मन में जहां चार ऐसे ही लोगों को तैराकों ने बचाया, तो नगर में भी कोसी में डूबने वाले नबाब अली के अलावा और भी कई लोग थे, जो लकड़ी के लालच में कोसी के पानी में फंस गए थे, लेकिन लोगों ने उन्हें बचा लिया।
विज्ञापन
रामनगर बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण मंगलवार सुबह कोसी नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया। मंगलवार को कोसी नदी दढ़ियाल में खतरे के निशान 211 मीटर (समुद्र तल से) के ऊपर बह रही थी। इस दौरान नदी में पहाड़ों से कीमती लकड़ी, जड़ें और पेड़ भी आ रहे थे, जिन्हें निकालने के लिए नगर के मोहल्ला बाहरवाला निवासी नबाब अली (60) भी अन्य लोगों के साथ मोहल्ले के सामने बांध के पास कोसी नदी में चला गया।
विज्ञापन
हालांकि नवाब अली गन्ने के खेत में गया था, जिसमें नदी का जलस्तर बढ़ने से काफी पानी था। इस दौरान लगातार जलस्तर बढ़ने से वह गन्ने के खेत में ही फंस गया, जबकि अन्य लोग बाहर निकल आए। नवाब अली को पानी में फंसा देख लोगों में हड़कंप मच गया और उसे बाहर निकालने के प्रयास किए जाने लगे। आनन-फानन में नगर के तैराक अखलाक,यूनुस और इकरार भी पानी में फंसे नबाब अली को निकालने नदी में कूद गए।
विज्ञापन
इससे पहले कि वह नबाब अली के नजदीक पहुंचते कोसी की धार में बहकर आ रही सिंघाड़े की बेल में नबाब अली फंस गया और बहने लगा। उसे बचाने की कोशिश में तीनों तैराक भी बहने लगे। करीब तीन सौ मीटर आगे कोसी पुल के नीचे बेल के साथ फंसा नबाब अली पुल के पिलर से टकरा गया और डूब गया।
पुल के आगे पानी में नबाब अली के दिखाई न देने पर लोगों में हड़कंप मच गया और भारी भीड़ जमा हो गई। रोते बिलखते परिजन भी मौके पर पहुंच गए। सूचना पर टांडा कोतवाल गजेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर लोगों से घटना की जानकारी ली परिजनों को सांत्वना दी। खबर लिखे जाने तक नवाब अली का कुछ पता नहीं चल सका था।
नवाब अली के हैं 11 बच्चे
दढ़ियाल। कोसी नदी के बहाव में डूबे नवाब अली के ग्यारह बच्चे हैं। जिनमें चार पुत्र और सात बेटियां हैं। सबसे बड़े पुत्र और चार बेटियों की शादी हो चुकी है। तीनों बड़े पुत्र शमशेर, जमशेर और नाजिम राजमिस्त्री का काम करते हैं। सबसे छोटा पुत्र सरफराज अभी पढ़ाई कर रहा है। वे स्वयं मजदूरी करते हैं। तीन बेटों के राजमिस्त्री का काम करने से परिवार की आमदनी भी ठीक ठाक है। लोगों में चर्चा थी कि इस उम्र में उन्हें लकड़ी पकड़ने कोसी नदी में जाने की क्या आवश्यकता थी।
लकड़ियों के चक्कर में दांव पर लगा दी जान
दढ़ियाल। उत्तराखंड के जंगलों से कोसी नदी में बहकर आ रही कीमती लकड़ियों को पकड़ने में कई लोगों ने अपनी जान दांव पर लगा दी। इसमें किसी को सफलता हाथ लगी, तो कई लोगों की जान आफत में पड़ गई।
मंगलवार सुबह कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ पानी मे बड़ी मात्रा में उत्तराखंड के जंगलों की लकड़ी बहकर आनी शुरू हो गई। पानी में बहती लकड़ियों को पकड़ने के लिए कोसी बांध से लगे नगर के मोहल्ला बाहरवाला, ऊपरवाला, भरतपुर सहित ग्राम रामपुर धम्मन के पास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। बहुत से लोग पानी मे उतरकर रस्सी के सहारे लकड़ियों को बांधकर बाहर लाने में सफल रहे और वाहनों में भरकर घरों को ले गए।
वहीं, कई लोग लकड़ी पकड़ने के दौरान अपनी जान फंसा बैठे। लोगों के अनुसार रामपुर धम्मन में जहां चार ऐसे ही लोगों को तैराकों ने बचाया, तो नगर में भी कोसी में डूबने वाले नबाब अली के अलावा और भी कई लोग थे, जो लकड़ी के लालच में कोसी के पानी में फंस गए थे, लेकिन लोगों ने उन्हें बचा लिया।