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Rampur News: बीईओ के खिलाफ शिकायतों की दोबारा जांच कराने की मांग
Thu, 22 Oct 2026 12:34 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Thu, 22 Oct 2026 12:34 AM IST
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रामपुर। खंड शिक्षाधिकारी शाहबाद बबीता सिंह के खिलाफ शिकायत करने वाले तीन शिक्षकों के निलंबन का मामला शांत होता नहीं दिख रहा है। प्राथमिक शिक्षक संघ ने बुधवार को डीएम को ज्ञापन सौंपकर बीईओ के खिलाफ मिली शिकायतों की नए सिरे से जांच कराने, निलंबित शिक्षकों की कार्रवाई की समीक्षा करने और बीईओ का रामपुर से बाहर स्थानांतरण कराने की मांग की।
ज्ञापन में स्वार और मिलक विकास खंड में उनकी तैनाती के दौरान शिक्षकों से संबंधित शिकायतों का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई गई है। स्वार में तैनात रह चुकीं बीईओ के खिलाफ शिकायत करने वाले तीन शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। बीएसए के इस आदेश के बाद प्राथमिक शिक्षक संघ ने मोर्चा खोल दिया है।
संघ की ओर से डीएम को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि बीईओ की कार्यशैली को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं। संघ ने दावा किया कि स्वार में तैनाती के दौरान कथित धन उगाही से संबंधित ऑडियो सामने आया था और शिकायतकर्ताओं ने जांच समिति को शपथपत्र भी दिए थे। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि इन शिकायतों के बाद उन्हें करीब आठ महीने तक कार्यालय से संबद्ध रखा गया था।
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ज्ञापन में शिक्षक शैलेंद्र उपाध्याय, साजिद अली, मोहम्मद सईद और अन्य शिक्षकों के निलंबन का मामला उठाया गया है। संघ ने आरोप लगाया कि शिक्षकों के खिलाफ की गई कार्रवाई की निष्पक्षता की दोबारा समीक्षा होनी चाहिए।
ज्ञापन में कहा गया कि तत्कालीन बीएसए ने मोहम्मद सईद को निलंबन के अगले दिन बहाल कर दिया था। संघ ने इस घटनाक्रम का हवाला देते हुए पूरे मामले की फिर से जांच कराने की मांग की। संघ ने कहा कि जांच के आधार पर उचित निर्णय लिया जाए और आरोपों की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही बीईओ का रामपुर से बाहर स्थानांतरण कराने का अनुरोध भी किया गया।
ज्ञापन देने वालों में चरन सिंह, इंद्रेश कुमार, मोहम्मद तनवीर अहमद, रामकिशोर, मोहम्मद सईद और साजिद अली सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे।
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अमरोहा में तैनाती के दौरान भेजे गए पत्रों का दिया हवाला
शिक्षक संघ ने ज्ञापन में अमरोहा में बबीता सिंह की पूर्व तैनाती के दौरान अधिकारियों की ओर से शासन को भेजे गए पत्रों का भी उल्लेख किया है। संघ के अनुसार, वर्ष 2012 से 2016 के बीच उनकी कार्यशैली और आचरण को लेकर विभागीय कार्रवाई की संस्तुतियां की गई थीं। संघ ने इन पत्रों की प्रतियां ज्ञापन के साथ संलग्न करने की बात कही है। संघ का कहना है कि शिक्षकों से जुड़े मामलों में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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ज्ञापन में स्वार और मिलक विकास खंड में उनकी तैनाती के दौरान शिक्षकों से संबंधित शिकायतों का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई गई है। स्वार में तैनात रह चुकीं बीईओ के खिलाफ शिकायत करने वाले तीन शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। बीएसए के इस आदेश के बाद प्राथमिक शिक्षक संघ ने मोर्चा खोल दिया है।
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संघ की ओर से डीएम को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि बीईओ की कार्यशैली को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं। संघ ने दावा किया कि स्वार में तैनाती के दौरान कथित धन उगाही से संबंधित ऑडियो सामने आया था और शिकायतकर्ताओं ने जांच समिति को शपथपत्र भी दिए थे। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि इन शिकायतों के बाद उन्हें करीब आठ महीने तक कार्यालय से संबद्ध रखा गया था।
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ज्ञापन में शिक्षक शैलेंद्र उपाध्याय, साजिद अली, मोहम्मद सईद और अन्य शिक्षकों के निलंबन का मामला उठाया गया है। संघ ने आरोप लगाया कि शिक्षकों के खिलाफ की गई कार्रवाई की निष्पक्षता की दोबारा समीक्षा होनी चाहिए।
ज्ञापन में कहा गया कि तत्कालीन बीएसए ने मोहम्मद सईद को निलंबन के अगले दिन बहाल कर दिया था। संघ ने इस घटनाक्रम का हवाला देते हुए पूरे मामले की फिर से जांच कराने की मांग की। संघ ने कहा कि जांच के आधार पर उचित निर्णय लिया जाए और आरोपों की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही बीईओ का रामपुर से बाहर स्थानांतरण कराने का अनुरोध भी किया गया।
ज्ञापन देने वालों में चरन सिंह, इंद्रेश कुमार, मोहम्मद तनवीर अहमद, रामकिशोर, मोहम्मद सईद और साजिद अली सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे।
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अमरोहा में तैनाती के दौरान भेजे गए पत्रों का दिया हवाला
शिक्षक संघ ने ज्ञापन में अमरोहा में बबीता सिंह की पूर्व तैनाती के दौरान अधिकारियों की ओर से शासन को भेजे गए पत्रों का भी उल्लेख किया है। संघ के अनुसार, वर्ष 2012 से 2016 के बीच उनकी कार्यशैली और आचरण को लेकर विभागीय कार्रवाई की संस्तुतियां की गई थीं। संघ ने इन पत्रों की प्रतियां ज्ञापन के साथ संलग्न करने की बात कही है। संघ का कहना है कि शिक्षकों से जुड़े मामलों में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

फोटो -11- टोकन वितरण के दौरान छीना-झपटी करता किसान। संवाद