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Rampur News: सर्द रात में गोलियों की तड़तड़ाहट से गूूंज उठा था सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 31 Dec 2023 01:34 AM IST
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CRPF Group Center echoed with the sound of bullets in the cold night.
रामपुर। 31 दिसंबर की रात जब पूरा शहर नए साल के जश्न में डूबा था तभी अचानक आधी रात में गोलियों की तड़तड़ाहट से सीआरपीएफ ग्रुप केंद्र गूंज उठा था। 16 साल पहले सीआरपीएफ ग्रुप केंद्र पर हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के सात जवानों की मौत हो गई थी। वहीं एक रिक्शा चालक की भी जान चली गई थी। जनपदवासियों के जेहन में आज भी उस हमले की यादें हैं। इस हमले में पकड़े गए छह आतंकियों को कोर्ट सजा सुना चुका है, जबकि दो को बरी कर दिया गया था। 31 दिसंबर 2007 की रात गोलियों की तड़तड़ाहट से सीआरपीएफ ग्रुप केंद्र के आसपास के घरों के लोगों चौंक पड़े। फिर लगा कि नए साल के स्वागत में पटाखे जलाए जा रहे हैं। बाद में पता चला कि ये गोलियों की गूंज है। जब तक सीआरपीएफ के जवान जवाबी कार्रवाई करते उनके सात साथी शहीद हो चुके थे। सीआरपीएफ ग्रुप केंद्र के बाहर रेलवे क्राॅसिंग के पास खड़ा एक रिक्शा चालक भी अपनी जान गंवा चुका था।
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सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर आतंकी हमले का अलर्ट पहले से था। इसके बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। आतंकियों ने पूरी तैयारी के साथ 31 दिसंबर की रात आतंकी हमला कर दिया। आतंकियों की योजना सीआरपीएफ के आयुध भंडार तक पहुंचने की थी, लेकिन सीआरपीएफ के जवानों की जवाबी कार्रवाई की वजह से उनको पीछे हटना पड़ा और आतंकी भाग गए थे।
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आतंकी हमले की खबर मिलते ही दिल्ली से लेकर लखनऊ तक अधिकारियों के फोन घनघनाने लगे थे। पुलिस के आला अधिकारी मुरादाबाद, बरेली और लखनऊ से रामपुर पहुंच गए थे । इस मामले को लेकर सिविल लाइंस कोतवाली में एक जनवरी को दरोगा ओम प्रकाश शर्मा की तहरीर के आधार पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 307, 332, 302, 3/5 पीडीपीपी एक्ट और तीन विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। मामले की जांच एटीएस और पुलिस को सौंपी गई। लंबी जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की और फिर कोर्ट ने इस मामले में पकड़े गए आठ में से छह आतंकियों को सजा सुनाई थी, जबकि दो को बरी कर दिया।
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इनको मिली थी सजा
दो नवंबर 2019 को चार आतंकियों को फांसी की सजा सुनाई, जिनमें पाकिस्तानी इमरान शहजाद, मोहम्मद फारुख, बिहार के मधुबनी निवासी सबाउद्दीन और रामपुर के बदनपुरी के शरीफ उर्फ सुहैल शामिल थे। वहीं मुरादाबाद में मूंढापांडे के जंग बहादुर को आजीवन कारावास और मुंबई के गोरेगांव निवासी फहीम अंसारी को दस साल की सजा हुई थी। कोर्ट ने इस मामले में प्रतापगढ़ निवासी मोहम्मद कौसर और बरेली के बहेड़ी निवासी गुलाब खां को बरी कर दिया था।

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आतंकी हमले में सीआरपीएफ के शहीद जवान
हवलदार ऋषिकेश राय, हवलदार रामजीशरण मिश्रा, हवलदार अफजल अहमद, सिपाही मनवीर सिंह, सिपाही विकास कुमार, सिपाही देवेंद्र कुमार और सिपाही आनंद कुमार। खंडिया निवासी रिक्शा चालक किशन लाल की भी हमले में मौत हुई थी।

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मुकदमे को वापस लेने की भी हुई थी कोशिश
सीआरपीएफ ग्रुप केंद्र पर हुए आतंकी हमले के मुकदमे को वापस लेने की कोशिश भी हुई थी। सपा सरकार में गृह विभाग की ओर से डीएम-एसपी को पत्र भेजकर यह पूछा गया था कि क्या इस मुकदमे को वापस लिया जा सकता है। इसके बाद मामले का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था और कड़ी टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद प्रदेश सरकार बैकफुट पर आ गई थी और मुकदमे को वापस लेने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।

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