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दिल्ली में बना फईम का फर्जी डीएल
अमर उजाला ब्यूरो/रामपुर
Updated Mon, 29 Feb 2016 11:24 PM IST
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सीआरपीएफ आतंकी हमले के मामले में जेल में बंद मुंबई के फईम अरशद अंसारी ने मुंबई से ही नहीं, बल्कि दिल्ली से भी फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था। ये लाइसेंस दिल्ली के परिवहन कार्यालय से जारी नहीं हुआ था। ये लाइसेंस फर्जी था।
इसका खुलासा दिल्ली परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर अनिल कुमार सचदेवा ने सेशन कोर्ट में पेश होकर अपनी गवाही के दौरान किया। उसकी गवाही पूरी हो गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी। 31 दिसंबर 2007 की रात में सीआरपीएफ कैंप पर हुए आतंकी हमले में सात जवान शहीद हो गए थे, जबकि एक रिक्शा चालक की भी मौत हो गई थी।
घटना के 40 दिन बाद पुलिस और एटीएस की टीम ने हमले के आरोप में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की सुनवाई एडीजे प्रथम राजेंद्र कुमार की कोर्ट में चल रही है। सोमवार को सभी आरोपियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पेश किया गया।
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इस दौरान अभियोजन की ओर से दिल्ली परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर अनिल कुमार सचदेवा ने गवाही दी। उन्होंने अपने बयानों में कहा कि मुंबई निवासी फईम ने साहिल पास्कल के नाम से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था। जांच में ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी मिला था।
साहिल पास्कल नाम से उनके कार्यालय की ओर से कोई भी लाइसेंस जारी नहीं किया गया था। अब इस मामले की सुनवाई 10 मार्च को होगी। पेशी के दौरान पुलिस के कड़े इंतजाम रहे।
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इसका खुलासा दिल्ली परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर अनिल कुमार सचदेवा ने सेशन कोर्ट में पेश होकर अपनी गवाही के दौरान किया। उसकी गवाही पूरी हो गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी। 31 दिसंबर 2007 की रात में सीआरपीएफ कैंप पर हुए आतंकी हमले में सात जवान शहीद हो गए थे, जबकि एक रिक्शा चालक की भी मौत हो गई थी।
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घटना के 40 दिन बाद पुलिस और एटीएस की टीम ने हमले के आरोप में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की सुनवाई एडीजे प्रथम राजेंद्र कुमार की कोर्ट में चल रही है। सोमवार को सभी आरोपियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पेश किया गया।
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इस दौरान अभियोजन की ओर से दिल्ली परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर अनिल कुमार सचदेवा ने गवाही दी। उन्होंने अपने बयानों में कहा कि मुंबई निवासी फईम ने साहिल पास्कल के नाम से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था। जांच में ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी मिला था।
साहिल पास्कल नाम से उनके कार्यालय की ओर से कोई भी लाइसेंस जारी नहीं किया गया था। अब इस मामले की सुनवाई 10 मार्च को होगी। पेशी के दौरान पुलिस के कड़े इंतजाम रहे।