अजहर अहमद खां को मिली राहत: कोर्ट ने मंजूर की जमानत, पर इस वजह से नहीं हो सकेगी रिहाई
पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष अजहर अहमद खां ने मुरादाबाद की कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। जेल में बंद अजहर अहमद खां ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला जज की कोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया। कोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हुई।
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धोखाधड़ी, सरकारी धन के दुरुपयोग करने के आरोप व अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पानी की टंकी बनवाने के मामले में कोर्ट से पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष को राहत मिली है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद अजहर अहमद खां की जमानत मंजूर कर ली है। हालांकि, उनकी रिहाई नहीं हो सकेगी, क्योंकि कुछ अन्य मामलों में उनकी जमानत होनी शेष है।
मामला शहर कोतवाली क्षेत्र से जुड़ा है। नगर पालिका के तत्कालीन प्रभारी अधिशासी अधिकारी गणेश प्रसाद ने 11 सितंबर 2019 को थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका आरोप है तत्कालीन पालिकाध्यक्ष अजहर अहमद खां, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी सैय्यद मोहम्मद तारिक एवं संतोष कुमार मिश्रा ने पसियापुरा शुमाली स्थित रिसोर्ट में एक नलकूप और जौहर विश्वविद्यालय में पानी की टंकी व तीन नलकूप पेयजल योजना में 27 जून 2016 से 28 दिसंबर 2016 तक आरोपियों ने अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर काम कराया है। जिससे 54 लाख रुपये सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपियों ने सरकारी धन का दुरुपयोग किया है और इसके सबूत पत्रावली पर मौजूद हैं। जबकि, बचाव पक्ष के अधिवक्ता इरफान अहमद खां ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत पत्रावली पर मौजूद नहीं है। उनके मुवक्किल को रंजिशन झूठा फंसाया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने पूर्व पालिकाध्यक्ष अजहर अहमद खां की जमानत मंजूर कर ली है।