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बिथल में कृषि कानूननों और बिजली विधेयक के खिलाफ गरजी सीटू
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सीटू के बैनर तले बिथल में प्रदर्शन करते कार्यकर्ता।
- फोटो : RAMPUR-HP
रामपुर बुशहर। रामपुर उपमंडल के बिथल में बुधवार को सीटू की राष्ट्रीय कमेटी और केंद्रीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला गया। इस दौरान सीटू ने 4 मजदूर विरोधी काले कोड, 3 किसान विरोधी काले कानूनों और बिजली विधेयक 2020 के विरोध में प्रदर्शन किया।
सीटू शिमला जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह, अदानी एग्रो फ्रेश यूनियन के महासचिव राजेश चौहान और हरीश ने कहा कि मोदी सरकार जबसे सत्ता में आई है, तबसे लगातार पूंजीपतियों के हित में कार्य कर रही है और मजदूर विरोधी निर्णय ले रही है। पिछले सौ साल के अंतराल में बने 44 श्रम कानूनों को खत्म करके मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताएं और लेबर कोड बनाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
कोरोनाकाल का फायदा उठाते हुए मोदी सरकार के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश जैसी कई राज्य सरकारों ने आम जनता, मजदूरों और किसानों के लिए आपातकाल को पूंजीपतियों और कॉरपोरेट्स के लिए अवसर में तबदील कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्तूबर 2016 को समान कार्य के लिए समान वेतन के आदेश को आउटसोर्स, ठेका और दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए लागू नहीं किया जा रहा है।
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केंद्र और राज्य के मजदूरों को एक समान वेतन नहीं मिल रहा है। सातवें वेतन आयोग और 1957 में हुए 15वें श्रम सम्मेलन की सिफारिश के अनुसार उन्हें इक्कीस हजार रुपये वेतन नहीं दिया जा रहा है। मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के कारण कोरोनाकाल में 15 करोड़ मजदूरों की नौकरियां चली गई हैं और वे बेरोजगार हो गए हैं। मजदूरों को नियमित रोजगार से वंचित करके फिक्स टर्म रोजगार की ओर धकेला जा रहा है।
वर्ष 2003 के बाद नौकरी में लगे कर्मचारियों का नई पेंशन नीति के माध्यम से शोषण किया जा रहा है। सीटू ने चेताया कि अगर इन समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया तो आगामी समय में उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर हेमराज, जसबीर, कपिल, भजन, राजेश वर्मा, अजय, चमन, सुशील, कैलाश, वीरेंद्र, संजीव, अरुण, रणबीर और नीरज सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।
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सीटू शिमला जिला अध्यक्ष कुलदीप सिंह, अदानी एग्रो फ्रेश यूनियन के महासचिव राजेश चौहान और हरीश ने कहा कि मोदी सरकार जबसे सत्ता में आई है, तबसे लगातार पूंजीपतियों के हित में कार्य कर रही है और मजदूर विरोधी निर्णय ले रही है। पिछले सौ साल के अंतराल में बने 44 श्रम कानूनों को खत्म करके मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताएं और लेबर कोड बनाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
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कोरोनाकाल का फायदा उठाते हुए मोदी सरकार के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश जैसी कई राज्य सरकारों ने आम जनता, मजदूरों और किसानों के लिए आपातकाल को पूंजीपतियों और कॉरपोरेट्स के लिए अवसर में तबदील कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्तूबर 2016 को समान कार्य के लिए समान वेतन के आदेश को आउटसोर्स, ठेका और दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए लागू नहीं किया जा रहा है।
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केंद्र और राज्य के मजदूरों को एक समान वेतन नहीं मिल रहा है। सातवें वेतन आयोग और 1957 में हुए 15वें श्रम सम्मेलन की सिफारिश के अनुसार उन्हें इक्कीस हजार रुपये वेतन नहीं दिया जा रहा है। मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के कारण कोरोनाकाल में 15 करोड़ मजदूरों की नौकरियां चली गई हैं और वे बेरोजगार हो गए हैं। मजदूरों को नियमित रोजगार से वंचित करके फिक्स टर्म रोजगार की ओर धकेला जा रहा है।
वर्ष 2003 के बाद नौकरी में लगे कर्मचारियों का नई पेंशन नीति के माध्यम से शोषण किया जा रहा है। सीटू ने चेताया कि अगर इन समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया तो आगामी समय में उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर हेमराज, जसबीर, कपिल, भजन, राजेश वर्मा, अजय, चमन, सुशील, कैलाश, वीरेंद्र, संजीव, अरुण, रणबीर और नीरज सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।