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उपचुनाव का परिणाम का निकाय चुनाव पर भी पड़ेगा असर
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रामपुर। रामपुर विधानसभा सीट पर होन वाले उपचुनाव का परिणाम चाहे कुछ भी आए लेकिन एक बात तो निश्चित है कि इसका असर जिले की 11 निकायों के चुनाव पर भी पड़ सकता है। उपचुनाव में जीत हासिल करने वाली पार्टी के प्रत्याशियों के हौसले जहां बुलंद होंगे। वहीं चुनाव में शिकस्त का सामना करने वाली पार्टी टिकट का एलान होने के बाद बगावत के बोले बोलने वाले नेताओं पर कार्रवाई कर सकती है।
रामपुर में होने वाले उपचुनाव में मुकाबला भाजपा और सपा के बीच होना तय है। निकाय चुनाव में भी ये दोनों पार्टियां एक भी फिर से आमने-सामने होंगी। हालांकि निकाय चुनाव में कांग्रेस, बसपा, आम आदमी पार्टी सहित अन्य कई निर्दलीय भी मैदान में होंगे। उपचुनाव के परिणाम का असर भाजपा और सपा के कार्यकर्ताओं पर पड़ेगा। जिस के हिस्से में जीत आएगी उसके कार्यकर्ता निकाय चुनाव में भी अपना दबदबा बनाए रखने की कोशिश करेंगे। हालांकि निकाय चुनाव के समीकरण कुछ अलग होते हैं। वहां स्थानीय मुद्दे ज्यादा हावी होते हैं। कुछ स्थानीय उम्मीदवार भी अपने व्यक्तिगत रसूख के बल पर निकाय चुनाव में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हैं। राजनीति के जानकारों की माने तो रामपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के बाद रामपुर नगरपालिका परिषद का चुनाव भी काफी महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि यह नगरपालिका परिषद जिले में सबसे बड़ी है और पिछले दस सालों से इस पर सपा का कब्जा है। रामपुर नगरपालिका परिषद का अध्यक्ष बनने का ख्वाब कई राजनीतिक दलों के नेता देख रहे हैं।
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रामपुर में होने वाले उपचुनाव में मुकाबला भाजपा और सपा के बीच होना तय है। निकाय चुनाव में भी ये दोनों पार्टियां एक भी फिर से आमने-सामने होंगी। हालांकि निकाय चुनाव में कांग्रेस, बसपा, आम आदमी पार्टी सहित अन्य कई निर्दलीय भी मैदान में होंगे। उपचुनाव के परिणाम का असर भाजपा और सपा के कार्यकर्ताओं पर पड़ेगा। जिस के हिस्से में जीत आएगी उसके कार्यकर्ता निकाय चुनाव में भी अपना दबदबा बनाए रखने की कोशिश करेंगे। हालांकि निकाय चुनाव के समीकरण कुछ अलग होते हैं। वहां स्थानीय मुद्दे ज्यादा हावी होते हैं। कुछ स्थानीय उम्मीदवार भी अपने व्यक्तिगत रसूख के बल पर निकाय चुनाव में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हैं। राजनीति के जानकारों की माने तो रामपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के बाद रामपुर नगरपालिका परिषद का चुनाव भी काफी महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि यह नगरपालिका परिषद जिले में सबसे बड़ी है और पिछले दस सालों से इस पर सपा का कब्जा है। रामपुर नगरपालिका परिषद का अध्यक्ष बनने का ख्वाब कई राजनीतिक दलों के नेता देख रहे हैं।
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