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Rampur News: आढ़तें गुलजार, सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों का इंतजार
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रामपुर। सरकारी मूल्य से ज्यादा खुले बाजार में गेहूं की कीमत होने के चलते सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। किसान आढ़तों पर गेहूं बेच रहे हैं। सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2275 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। वहीं आढ़तों पर 2400 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं बिक रहा है। शासन ने जिले को 1.57 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया है। जिसके सापेक्ष अभी तक 10 फीसदी खरीद भी नहीं हो सकी है। सरकारी क्रय केंद्रों पर करीब दो माह में अब तक सिर्फ 14.4 हजार टन गेहूं की खरीद ही हो सकी है। ऐसे में लक्ष्य हासिल कर पाना बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा है।
शासन के आदेश पर एक मार्च से गेहूं की खरीद शुरू की गई थी। इसके लिए खाद्य विभाग की ओर से जिले के स्वार, शाहबाद, मिलक, बिलासपुर, टांडा व चमरौआ क्षेत्र में 159 क्रय केंद्र खोले थे। विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से गेहूं की खरीद की शुरुआत की गई। सोमवार तक सरकारी क्रय केंद्रों पर 14400 टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है।
शासन ने 15 जून तक गेहूं खरीद का समय निर्धारित किया है, लेकिन तब तक लक्ष्य हासिल कर पाना मुश्किल लग रहा है। इसके पीछे प्रमुख वजह गेहूं के घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुकाबले खुले बाजार में किसानों को ज्यादा से ज्यादा भाव मिल रहा है। किसानों का कहना है कि आढ़तों पर गेहूं का मूल्य सरकारी क्रय केंद्रों से ज्यादा हाथोंहाथ मिल रहा है। इसके अलावा आटा मिलें और सीड्स प्लांट भी अच्छे भाव में गेहूं खरीद रहे हैं।
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डिप्टी आरएमओ कौशल देव ने बताया कि जिले में अब तक 1600 किसानों से गेहूं की खरीद की गई है, जिनको 22 करोड़ रुपये का गेहूं का भुगतान किया गया है। किसान के गेहूं बेचने पर उनको 48 घंटे के अंदर भुगतान किया जा रहा है।
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उत्तराखंड की मंडियों में गेहूं बेच रहे किसान
यूपी के किसान उत्तराखंड की मंडियों में अपना गेहूं बेच रहे हैं। रामपुर के किसान खासतौर से बिलासपुर, स्वार, मसवासी समेत उत्तराखंड की सीमा से सटे गांवों के किसान सीधे ऊधमसिंहनगर, काशीपुर, बाजपुर, हल्द्वानी जाकर अपना गेहूं बेच रहे हैं। हालांकि, प्रशासन ने इसको रोकने के लिए सीमाओं पर चेकिंग कराने की बात कही है, लेकिन अभी तक सरकारी आदेश का पालन नहीं हो सका है।
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गेहूं की खरीद की गति को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए किसानों को गेहूं बेचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि किसान सीधे सरकारी केंद्रों पर आएं और अपना गेहूं बेचें। - कौशल देव, डिप्टी आरएमओ
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आंकड़ों पर एक नजर
कुल पंजीकृत किसान- छह हजार
कुल खरीद का लक्ष्य-1.57 लाख टन
अब तक खरीद- 14400 टन
कुल क्रय केंद्र-159
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शासन के आदेश पर एक मार्च से गेहूं की खरीद शुरू की गई थी। इसके लिए खाद्य विभाग की ओर से जिले के स्वार, शाहबाद, मिलक, बिलासपुर, टांडा व चमरौआ क्षेत्र में 159 क्रय केंद्र खोले थे। विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से गेहूं की खरीद की शुरुआत की गई। सोमवार तक सरकारी क्रय केंद्रों पर 14400 टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है।
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शासन ने 15 जून तक गेहूं खरीद का समय निर्धारित किया है, लेकिन तब तक लक्ष्य हासिल कर पाना मुश्किल लग रहा है। इसके पीछे प्रमुख वजह गेहूं के घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुकाबले खुले बाजार में किसानों को ज्यादा से ज्यादा भाव मिल रहा है। किसानों का कहना है कि आढ़तों पर गेहूं का मूल्य सरकारी क्रय केंद्रों से ज्यादा हाथोंहाथ मिल रहा है। इसके अलावा आटा मिलें और सीड्स प्लांट भी अच्छे भाव में गेहूं खरीद रहे हैं।
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डिप्टी आरएमओ कौशल देव ने बताया कि जिले में अब तक 1600 किसानों से गेहूं की खरीद की गई है, जिनको 22 करोड़ रुपये का गेहूं का भुगतान किया गया है। किसान के गेहूं बेचने पर उनको 48 घंटे के अंदर भुगतान किया जा रहा है।
उत्तराखंड की मंडियों में गेहूं बेच रहे किसान
यूपी के किसान उत्तराखंड की मंडियों में अपना गेहूं बेच रहे हैं। रामपुर के किसान खासतौर से बिलासपुर, स्वार, मसवासी समेत उत्तराखंड की सीमा से सटे गांवों के किसान सीधे ऊधमसिंहनगर, काशीपुर, बाजपुर, हल्द्वानी जाकर अपना गेहूं बेच रहे हैं। हालांकि, प्रशासन ने इसको रोकने के लिए सीमाओं पर चेकिंग कराने की बात कही है, लेकिन अभी तक सरकारी आदेश का पालन नहीं हो सका है।
गेहूं की खरीद की गति को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए किसानों को गेहूं बेचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि किसान सीधे सरकारी केंद्रों पर आएं और अपना गेहूं बेचें। - कौशल देव, डिप्टी आरएमओ
आंकड़ों पर एक नजर
कुल पंजीकृत किसान- छह हजार
कुल खरीद का लक्ष्य-1.57 लाख टन
अब तक खरीद- 14400 टन
कुल क्रय केंद्र-159