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आखिरकार मदारपुर-जयतोली पुल पर सीएम योगी ने लगाई मुहर
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शाहबाद। आखिरकार मदारपुर-जयतोली मार्ग पर रामगंगा पर पुल के निर्माण को मंजूरी मिल ही गई। सीएम योगी आदित्यनाथ ने 04 सितंबर को रामपुर में इसका निर्माण कराए जाने की घोषणा की। पुल के निर्माण पर 57 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पुल का निर्माण हो जाने से शाहबाद की रामपुर से दूरी 14 किलोमीटर कम हो जाएगी।
मदारपुर गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक धर्मपाल सिंह समेत कई ग्रामीणों ने रामगंगा नदी पर पुल का निर्माण कराने की मांग उठाई थी। रामगंगा नदी पर पुल न होने के कारण कई बड़े हादसे हुए थे। बाढ़ का पानी बढ़ जाने के बाद ग्रामीणों को अपनी जान को खतरे में डाल कर नदी में तैरकर खेतों पर जाना पड़ता था। जिससे क्षेत्र में कई लोगों की नदी में डूब कर मौत हो गई थी। इसी समस्या अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व पुल निर्माण की कवायद तेज हुई। शासन ने पुल निर्माण को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद सेतु निगम के अफसरों ने क्षेत्र में जाकर मिट्टी का परीक्षण भी किया था। बाद में पुल की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) भी शासन को भेजी गई थी ताकि, तकनीकी परीक्षण के बाद को वित्तीय स्वीकृति मिल जाए। पूर्व में इस पुल की फाइल कभी लोक निर्माण विभाग तो कभी सरकार के वित्त विभाग में घूमती रही।
क्षेत्रीय लोगों की माने तो रामपुर-शाहबाद की दूरी करीब 35 किलोमीटर है। ऐसे में लोगों को आने जाने में काफी दिक्कतें होती हैं। समय अधिक लगने के साथ ही लोगों का अतिरिक्त समय और अधिक खर्च होता है। चार सितंबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामपुर में अपने संबोधन में मदारपुर-जयतोली पुल की स्वीकृति पर अपनी फाइनल मुहर लगा दी। इस पुल के निर्माण के बाद शाहबाद से रामपुर की दूरी करीब 14 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। इसके अलावा नदी के दोनों किनारों के किसानों को अपने-अपने खेतों पर आने जाने में सुविधा हो जाएगी।
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मदारपुर गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक धर्मपाल सिंह समेत कई ग्रामीणों ने रामगंगा नदी पर पुल का निर्माण कराने की मांग उठाई थी। रामगंगा नदी पर पुल न होने के कारण कई बड़े हादसे हुए थे। बाढ़ का पानी बढ़ जाने के बाद ग्रामीणों को अपनी जान को खतरे में डाल कर नदी में तैरकर खेतों पर जाना पड़ता था। जिससे क्षेत्र में कई लोगों की नदी में डूब कर मौत हो गई थी। इसी समस्या अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व पुल निर्माण की कवायद तेज हुई। शासन ने पुल निर्माण को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद सेतु निगम के अफसरों ने क्षेत्र में जाकर मिट्टी का परीक्षण भी किया था। बाद में पुल की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) भी शासन को भेजी गई थी ताकि, तकनीकी परीक्षण के बाद को वित्तीय स्वीकृति मिल जाए। पूर्व में इस पुल की फाइल कभी लोक निर्माण विभाग तो कभी सरकार के वित्त विभाग में घूमती रही।
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क्षेत्रीय लोगों की माने तो रामपुर-शाहबाद की दूरी करीब 35 किलोमीटर है। ऐसे में लोगों को आने जाने में काफी दिक्कतें होती हैं। समय अधिक लगने के साथ ही लोगों का अतिरिक्त समय और अधिक खर्च होता है। चार सितंबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामपुर में अपने संबोधन में मदारपुर-जयतोली पुल की स्वीकृति पर अपनी फाइनल मुहर लगा दी। इस पुल के निर्माण के बाद शाहबाद से रामपुर की दूरी करीब 14 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। इसके अलावा नदी के दोनों किनारों के किसानों को अपने-अपने खेतों पर आने जाने में सुविधा हो जाएगी।
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