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एडीएम कोर्ट के आदेश को ट्रस्ट ने दी हाईकोर्ट में दी चुनौती
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रामपुर। जौहर ट्रस्ट की जमीन से संबंधित वाद की सुनवाई के दौरान ट्रस्ट अधिवक्ता ने एडीएम (प्रशासन) की कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराया कि कोर्ट के नौ नवंबर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, लिहाजा बहस के लिए एक माह का वक्त दिया जाए। एडीएम की कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 23 नवंबर निर्धारित की है।
सांसद आजम खां की अध्यक्षता वाली मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को सपा की सरकार में 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति कुछ शर्तों के अधीन दी गई थी। अनुमति के बाद ट्रस्ट ने लगभग 160 एकड़ जमीन की खरीद की है। इस मामले में शिकायत की गई थी कि जिन शर्तों के अधीन 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी उसका पालन नहीं किया गया है। जिलाधिकारी ने मामले की जांच 2019 में तत्कालीन एसडीएम सदर पीपी तिवारी को सौंपी थी। तिवारी ने जांच में आरोप को सही पाया था और उन्होंने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर डीएम की कोर्ट में वाद दर्ज कर लिया गया था, जिसे सुनवाई के लिए एडीएम (प्रशासन) जेपी गुप्ता की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। नौ नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान
ट्रस्ट के अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र के माध्यम से कहा कि ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खां, सचिव डॉ. तजीन फात्मा और एक सदस्य अब्दुला आजम झूठे मुकदमे में सीतापुर की जेल में बंद हैं। ट्रस्ट के अन्य सदस्यों पर भी झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए हैं, जो साक्ष्य उपलब्ध कराने की स्थिति में हैं। इसलिए एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की जाए जो सीतापुर की जेल जाकर आजम खां, तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम के बयान दर्ज कर साक्ष्य के रूप में कोर्ट में प्रस्तुत करें। एडीएम (प्रशासन) जेपी गुप्ता की कोर्ट ने इस प्रार्थनापत्र को खारिज कर दिया था। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान ट्रस्ट के अधिवक्ता ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराया कि नौ नवंबर के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, लिहाजा इस मामले में एक माह का वक्त दिया जाए। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की अगली तिथि 23 नवंबर निर्धारित कर दी है।
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ट्रस्ट के अधिवक्ता ने एडीएम (प्रशासन) की कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा है कि नौ नवंबर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, लिहाजा एक माह का वक्त दिया जाए। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले अगली सुनवाई के लिए 23 नवंबर की तिथि निर्धारित की है।
अजय तिवारी, शासकीय अधिवक्ता राजस्व
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सांसद आजम खां की अध्यक्षता वाली मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को सपा की सरकार में 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति कुछ शर्तों के अधीन दी गई थी। अनुमति के बाद ट्रस्ट ने लगभग 160 एकड़ जमीन की खरीद की है। इस मामले में शिकायत की गई थी कि जिन शर्तों के अधीन 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी उसका पालन नहीं किया गया है। जिलाधिकारी ने मामले की जांच 2019 में तत्कालीन एसडीएम सदर पीपी तिवारी को सौंपी थी। तिवारी ने जांच में आरोप को सही पाया था और उन्होंने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर डीएम की कोर्ट में वाद दर्ज कर लिया गया था, जिसे सुनवाई के लिए एडीएम (प्रशासन) जेपी गुप्ता की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। नौ नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान
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ट्रस्ट के अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र के माध्यम से कहा कि ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खां, सचिव डॉ. तजीन फात्मा और एक सदस्य अब्दुला आजम झूठे मुकदमे में सीतापुर की जेल में बंद हैं। ट्रस्ट के अन्य सदस्यों पर भी झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए हैं, जो साक्ष्य उपलब्ध कराने की स्थिति में हैं। इसलिए एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की जाए जो सीतापुर की जेल जाकर आजम खां, तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम के बयान दर्ज कर साक्ष्य के रूप में कोर्ट में प्रस्तुत करें। एडीएम (प्रशासन) जेपी गुप्ता की कोर्ट ने इस प्रार्थनापत्र को खारिज कर दिया था। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान ट्रस्ट के अधिवक्ता ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराया कि नौ नवंबर के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, लिहाजा इस मामले में एक माह का वक्त दिया जाए। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की अगली तिथि 23 नवंबर निर्धारित कर दी है।
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ट्रस्ट के अधिवक्ता ने एडीएम (प्रशासन) की कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा है कि नौ नवंबर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, लिहाजा एक माह का वक्त दिया जाए। इसके बाद कोर्ट ने इस मामले अगली सुनवाई के लिए 23 नवंबर की तिथि निर्धारित की है।
अजय तिवारी, शासकीय अधिवक्ता राजस्व