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अंधविश्वास और रूढ़िवादिता से दूर रह कर बनें संस्कारवान
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Sun, 01 Nov 2015 11:50 PM IST
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आर्य समाज ज्वालानगर के 17वें वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन मनुष्य को संस्कारवान बनने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही अंधविश्वास और रूढ़िवादिता से दूर रहते हुए धार्मिक अनुष्ठानों और कर्मकांडों के वैज्ञानिक पहलू को समझाया गया। शाहबाद रोड स्थित बैंक्वेट हॉल में हो रहे कार्यक्रम के दूसरे दिन शुरुआत 21 कुंडीय वैदिक महायज्ञ से की गई।
इसके बाद वचन करते हुए दर्शनाचार्य महावीर सिंह ने कहा कि सभी लोगों को धार्मिक अनुष्ठानों और कर्मकांडों के पीछे छिपे ज्ञान और वैज्ञानिक आधार को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि हवन करने से जहां दुर्गंध दूर होती है। वहीं, वायुमंडल में आर्द्रता बढ़ती है, जिससे जल के बिखरे हुए कण एकत्र होते हैं और वर्षा होती है।
इसी प्रकार पीपल के वृक्ष की आराधना के पीछे 24 घंटे आक्सीजन देने और रोगों को नाश करने का गुण वैज्ञानिक आधार है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अंधविश्वास और आडंबरों से दूर रहना चाहिए। बदायूं से आए वेद व्याख्याकार संजीव रूप आर्य ने कहा कि जीवन में संस्कार सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
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संस्कारवान व्यक्ति नम्र के साथ सशक्त होता है। संस्कारवान व्यक्ति ईमानदार और स्वाभिमान का गुण रखता है। इसके बाद दिल्ली से आईं बहिन सुदेश आर्या ने भजनों के माध्यम से नारी शक्ति का परिचय दिया। इसके साथ ही कन्या भ्रूण हत्या न करने और नारी का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान सोहन लाल, ओमवीर सिंह आर्य, भारत सिंह, रामचंद्र सिंह आर्य, हरिदत्त वर्मा, भरत कुमार आर्य, लोचन लाल, बाबूराम आर्य, सुरेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, चंद्रलेखा आर्या, ललिता, गायत्री आर्या, सरोज आदि मौजूद रहे।
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इसके बाद वचन करते हुए दर्शनाचार्य महावीर सिंह ने कहा कि सभी लोगों को धार्मिक अनुष्ठानों और कर्मकांडों के पीछे छिपे ज्ञान और वैज्ञानिक आधार को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि हवन करने से जहां दुर्गंध दूर होती है। वहीं, वायुमंडल में आर्द्रता बढ़ती है, जिससे जल के बिखरे हुए कण एकत्र होते हैं और वर्षा होती है।
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इसी प्रकार पीपल के वृक्ष की आराधना के पीछे 24 घंटे आक्सीजन देने और रोगों को नाश करने का गुण वैज्ञानिक आधार है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अंधविश्वास और आडंबरों से दूर रहना चाहिए। बदायूं से आए वेद व्याख्याकार संजीव रूप आर्य ने कहा कि जीवन में संस्कार सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
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संस्कारवान व्यक्ति नम्र के साथ सशक्त होता है। संस्कारवान व्यक्ति ईमानदार और स्वाभिमान का गुण रखता है। इसके बाद दिल्ली से आईं बहिन सुदेश आर्या ने भजनों के माध्यम से नारी शक्ति का परिचय दिया। इसके साथ ही कन्या भ्रूण हत्या न करने और नारी का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान सोहन लाल, ओमवीर सिंह आर्य, भारत सिंह, रामचंद्र सिंह आर्य, हरिदत्त वर्मा, भरत कुमार आर्य, लोचन लाल, बाबूराम आर्य, सुरेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, चंद्रलेखा आर्या, ललिता, गायत्री आर्या, सरोज आदि मौजूद रहे।