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रिटायर्ड सीओ आले हसन के तीन और मामलों में अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र खारिज
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रामपुर। रिटायर्ड सीओ आले हसन को कोर्ट ने झटका दिया है। कोर्ट ने उनके खिलाफ अजीमनगर थाने में जमीन कब्जाने के आरोप में दर्ज तीन मामलों में उनके अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिए हैं। इस समय वह जमानत पर बाहर चल रहे हैं।
वर्ष 2019 में आलियागंज के किसानों ने यह आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था कि सपा शासनकाल में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के लिए उनकी जमीनों का जबरन बिना पैसा दिए बैनामा करा लिया। आरोप था कि तत्कालीन सीओ आलेहसन ने भी किसानों का उत्पीड़न किया और रंजिशन झूठे मुकदमों में फंसाया। किसानों ने पुलिस पर उनके साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया था।
इन आरोपों के साथ आलियागंज के किसानों ने अजीमनगर थाने में 27 मुकदमे दर्ज कराए थे जिसमें सपा नेता आजम खां, आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा, विधायक अब्दुल्ला आजम और रिटायर्ड सीओ आले हसन सहित कई लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। रिटायर्ड सीओ ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से एमपी-एमएलए कोर्ट (सेशन ट्रायल) में तीन अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र दाखिल किए जिस पर सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता अरुण प्रकाश सक्सेना ने तर्क दिया कि अपराध गंभीर प्रकृति का है और सभी मामलों में आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल हो चुका है। लिहाजा, अग्रिम जमानत मंजूर न की जाए जबकि, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ पत्रावली पर साक्ष्य नहीं हैं और उन्हें राजनैतिक रंजिश के तहत झूठा फंसाया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आले हसन के अधिवक्ता की ओर से दाखिल किए गए तीन अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिए हैं।
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-रमेश लोधी
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वर्ष 2019 में आलियागंज के किसानों ने यह आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था कि सपा शासनकाल में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के लिए उनकी जमीनों का जबरन बिना पैसा दिए बैनामा करा लिया। आरोप था कि तत्कालीन सीओ आलेहसन ने भी किसानों का उत्पीड़न किया और रंजिशन झूठे मुकदमों में फंसाया। किसानों ने पुलिस पर उनके साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया था।
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इन आरोपों के साथ आलियागंज के किसानों ने अजीमनगर थाने में 27 मुकदमे दर्ज कराए थे जिसमें सपा नेता आजम खां, आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा, विधायक अब्दुल्ला आजम और रिटायर्ड सीओ आले हसन सहित कई लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। रिटायर्ड सीओ ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से एमपी-एमएलए कोर्ट (सेशन ट्रायल) में तीन अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र दाखिल किए जिस पर सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता अरुण प्रकाश सक्सेना ने तर्क दिया कि अपराध गंभीर प्रकृति का है और सभी मामलों में आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल हो चुका है। लिहाजा, अग्रिम जमानत मंजूर न की जाए जबकि, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ पत्रावली पर साक्ष्य नहीं हैं और उन्हें राजनैतिक रंजिश के तहत झूठा फंसाया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आले हसन के अधिवक्ता की ओर से दाखिल किए गए तीन अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिए हैं।
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-रमेश लोधी