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पसियापुरा की कब्रों पर जारी किया फतवा
Rampur
Updated Sat, 31 Jan 2015 05:30 AM IST
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रामपुर। जामे नईमीया मुरादाबाद से पसियापुरा गांव की दो कब्रों पर फतवा जारी किया गया है। उसमें कहा कि मोमिन की कब्र और कब्रिस्तान दोनों का एहतराम किया जाए। लिहाजा दोनों कब्रों को बेहुरमती से बचाना जरूरी है। उलमा ने कब्र पर चलने, बैठने और सोने पर भी सख्त मना फरामाया है।
तंजीम आवाम एहले सुन्नत के सदर मौलाना मोहब्बे अली नईमी ने जामे नईमीया मुरादाबाद में मसला रखा कि बेनजीर रोड स्थित पसियापुरा गांव में मुसलमानों का पुराना कब्रिस्तान है। कब्रिस्तान की बाउंड्री करा दी गई है। कब्रिस्तान से सटी सैकड़ों वर्ष पुरानी दो पक्की कब्रें हैं। इस इलाके की आवाम में चर्चा है कि दोनों कब्रों को रात में तुड़वाकर उस पर रोड बनाया जा सकता है। मौलाना ने फतवा पूछा कि मुसलमानों की कब्रों को तोड़कर उस पर सड़क बनाना शरन कैसा है?
काजी-ए-शरआ और मुफ्ती-ए-आजम मो. अय्यूब खां नईमी रिजवी ने फतवा जारी किया है। उसमें कहा कि मोमिन की कब्र और कब्रिस्तान दोनों का एतहराम करना जरूरी है। उस पर चलना, फिरना, टहलना, बैठना नाजायजो हराम है। रसूले पाक ने फरमाया कि मुझे आग या तलवार पर चलना कब्र पर चलने से ज्यादा पसंद है। फुकाहा इकराम ने फरमाया मय्यत को उन चीजों से तकलीफ होती है जिससे जिंदा को पहुंचती है। लिहाजा दोनों कब्रों को बेहुरमती से बचाना जरूरी है। सड़क को चौड़ा दूसरी तरफ से करें और अगर किसी भी सूरत में दूसरी तरफ चौड़ा करना मुमकिन न हो तो उन कब्रों के ऊ पर खला छोड़कर ऊ पर मजबूत पुलिया बनाकर कब्रों को महफूज करके सड़क चौड़ी की जा सकती है। इस सूरत को उसी वक्त इजाजत होगी, जबकि दूसरी तरफ सड़क चौड़ी करना असंभव हो। ताकि मय्यत की हक तल्फी न हो, क्योंकि छत मय्यत का हक है। फतवे की तस्दीक मुफ्ती मो. सुलेमान नईमी बरकाती और मुफ्ती मो. कासिम रजा नईमी अकरमी ने फरमाई।
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तंजीम आवाम एहले सुन्नत के सदर मौलाना मोहब्बे अली नईमी ने जामे नईमीया मुरादाबाद में मसला रखा कि बेनजीर रोड स्थित पसियापुरा गांव में मुसलमानों का पुराना कब्रिस्तान है। कब्रिस्तान की बाउंड्री करा दी गई है। कब्रिस्तान से सटी सैकड़ों वर्ष पुरानी दो पक्की कब्रें हैं। इस इलाके की आवाम में चर्चा है कि दोनों कब्रों को रात में तुड़वाकर उस पर रोड बनाया जा सकता है। मौलाना ने फतवा पूछा कि मुसलमानों की कब्रों को तोड़कर उस पर सड़क बनाना शरन कैसा है?
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काजी-ए-शरआ और मुफ्ती-ए-आजम मो. अय्यूब खां नईमी रिजवी ने फतवा जारी किया है। उसमें कहा कि मोमिन की कब्र और कब्रिस्तान दोनों का एतहराम करना जरूरी है। उस पर चलना, फिरना, टहलना, बैठना नाजायजो हराम है। रसूले पाक ने फरमाया कि मुझे आग या तलवार पर चलना कब्र पर चलने से ज्यादा पसंद है। फुकाहा इकराम ने फरमाया मय्यत को उन चीजों से तकलीफ होती है जिससे जिंदा को पहुंचती है। लिहाजा दोनों कब्रों को बेहुरमती से बचाना जरूरी है। सड़क को चौड़ा दूसरी तरफ से करें और अगर किसी भी सूरत में दूसरी तरफ चौड़ा करना मुमकिन न हो तो उन कब्रों के ऊ पर खला छोड़कर ऊ पर मजबूत पुलिया बनाकर कब्रों को महफूज करके सड़क चौड़ी की जा सकती है। इस सूरत को उसी वक्त इजाजत होगी, जबकि दूसरी तरफ सड़क चौड़ी करना असंभव हो। ताकि मय्यत की हक तल्फी न हो, क्योंकि छत मय्यत का हक है। फतवे की तस्दीक मुफ्ती मो. सुलेमान नईमी बरकाती और मुफ्ती मो. कासिम रजा नईमी अकरमी ने फरमाई।
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