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शाहबाद और स्वार भी डार्क जोन में शामिल
Rampur
Updated Tue, 28 Oct 2014 05:34 AM IST
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रामपुर। चमरौवा-सैदनगर के बाद अब शाहबाद और स्वार ब्लाक भी डार्क जोन में शामिल हो गया है। दोनों इलाकों में भी बोरिंग पर पाबंदी लगा दी जाएगी। ऐसे में फसलों की सिंचाई संकट में पड़ जाएगी। हालांकि अभी विभाग को शासनादेश नहीं मिला है।
भूजल स्तर तेजी से खिसक रहा है। कई कार्यक्रम चलाने के बाद भी पानी का संचय नहीं हो रहा है। जागरूकता के कार्यक्रम भी कागजों में चलाए जा हैं। भूजल सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट के आधार पर चमरौवा करीब सात साल पहले डार्क जोन घोषित किया जा चुका है। दो साल पहले सैदनगर ब्लाक भी डार्क की श्रेणी में आ चुका है। शाहबाद और स्वार ब्लाक भी सेमी क्रिटकल श्रेणी में पहुंच गए थे। अधिकारियों ने दोनों ब्लाकों के घटते भूजल स्तर को गंभीरता से नहीं लिया। लिहाजा इसके नतीजे अफसोस जनक साबित हुए।
भूजल सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर शाहबाद और स्वार ब्लाक को भी डार्क जोन घोषित कर दिया गया। हालांकि अभी शासनादेश नहीं मिला है। लघु सिंचाई के सहायक अभियंता एमसी सक्सेना ने बताया कि कुछ दिन पहले अधिशासी अभियंता ने मीटिंग में दोनों ब्लाकों केडार्क घोषित होने की जानकारी दी थी। शासनादेश मिलने के बाद दोनों ब्लाकों में बोरिंग पर पाबंदी लगा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि चमरौवा और सैदनगर ब्लाक में पहले से बोरिंग पर पाबंदी है। ऐसी स्थिति में किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर सकेंगे। क्योंकि अधिकतर सरकारी नलकूप खराब रहते हैं। नहरों में भी पर्याप्त पानी नहीं मिलता है। किसान अपने ही संसाधनों से फसलों की सिंचाई करते हैं।
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भूजल स्तर तेजी से खिसक रहा है। कई कार्यक्रम चलाने के बाद भी पानी का संचय नहीं हो रहा है। जागरूकता के कार्यक्रम भी कागजों में चलाए जा हैं। भूजल सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट के आधार पर चमरौवा करीब सात साल पहले डार्क जोन घोषित किया जा चुका है। दो साल पहले सैदनगर ब्लाक भी डार्क की श्रेणी में आ चुका है। शाहबाद और स्वार ब्लाक भी सेमी क्रिटकल श्रेणी में पहुंच गए थे। अधिकारियों ने दोनों ब्लाकों के घटते भूजल स्तर को गंभीरता से नहीं लिया। लिहाजा इसके नतीजे अफसोस जनक साबित हुए।
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भूजल सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर शाहबाद और स्वार ब्लाक को भी डार्क जोन घोषित कर दिया गया। हालांकि अभी शासनादेश नहीं मिला है। लघु सिंचाई के सहायक अभियंता एमसी सक्सेना ने बताया कि कुछ दिन पहले अधिशासी अभियंता ने मीटिंग में दोनों ब्लाकों केडार्क घोषित होने की जानकारी दी थी। शासनादेश मिलने के बाद दोनों ब्लाकों में बोरिंग पर पाबंदी लगा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि चमरौवा और सैदनगर ब्लाक में पहले से बोरिंग पर पाबंदी है। ऐसी स्थिति में किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर सकेंगे। क्योंकि अधिकतर सरकारी नलकूप खराब रहते हैं। नहरों में भी पर्याप्त पानी नहीं मिलता है। किसान अपने ही संसाधनों से फसलों की सिंचाई करते हैं।
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