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दंगा विरोधी बिल क्यों नहीं पास करा रही है कांग्रेस
Rampur
Updated Fri, 18 Oct 2013 05:41 AM IST
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रामपुर। खाद्य सुरक्षा बिल को यूपीए सरकार की उपलब्धि बता रहे कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए प्रदेश के नगर विकास मंत्री आजम खां ने कहा है कि वो दंगा विरोधी बिल भी संसद का विशेष सत्र बुलाकर पास कराएं। ताकि देश को दंगों से महफूज रखा जा सके। अगर कांग्रेस लोकसभा के चुनावों से पहले इस बिल को संसद में पास नहीं कराती है तो दंगों में मारे गए लोगों की जिम्मेदारी उसकी होगी। आजम खां ने राहुल गांधी को सलाह दी कि वो अधिकारियों के लिखे हुए भाषण पढ़ने की जगह अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें। अपनी मां व अन्य वरिष्ठ कांग्रेसियों के अनुभव का लाभ उठाए।
बृहस्पतिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान आजम खां ने कहा कि चुनाव आने से पहले कांग्रेस को यह बताना होगा कि उसने खाद्य सुरक्षा बिल व अन्य बिलों को पास कराने के लिए अपनी टोपी व पगड़ी विपक्ष के पैरों में डाल दी। लेकिन वह दंगा विरोधी बिल के प्रति गंभीर क्यों नहीं है। यह बिल संसद में अटका पड़ा है। क्या कांग्रेस चाहती है कि मुसलमानों का इसी तरह से कत्लेआम होता रहे? गुजरात और मुजफ्फरनगर होता रहे। अगर यह बिल संसद में पास नहीं होता है तो कम से कम लोगों को तो यह पता चल जाएगा कि इस इंसानियत भरे बिल का मुखालिफ कौन है? अगर कांग्रेस को सबसे कमजोर वर्ग के साथ जरा सी भी हमदर्दी है तो वह संसद का विशेष सत्र बुलवाए और खाद्य सुरक्षा बिल की तरह ही दंगा विरोधी बिल पास करवाए। उन्होंने राहुल गांधी को सलाह दी कि वो अफसरान की लिखी हुई तकरीर को आखिरी न समझा करें। अपनी वालिदा व अन्य सीनियर नेताओं के तजुर्बे की मदद भी लिया करें। अचानक ही किसी की पगड़ी उछाल देने से काम नहीं चलेगा।
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बृहस्पतिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान आजम खां ने कहा कि चुनाव आने से पहले कांग्रेस को यह बताना होगा कि उसने खाद्य सुरक्षा बिल व अन्य बिलों को पास कराने के लिए अपनी टोपी व पगड़ी विपक्ष के पैरों में डाल दी। लेकिन वह दंगा विरोधी बिल के प्रति गंभीर क्यों नहीं है। यह बिल संसद में अटका पड़ा है। क्या कांग्रेस चाहती है कि मुसलमानों का इसी तरह से कत्लेआम होता रहे? गुजरात और मुजफ्फरनगर होता रहे। अगर यह बिल संसद में पास नहीं होता है तो कम से कम लोगों को तो यह पता चल जाएगा कि इस इंसानियत भरे बिल का मुखालिफ कौन है? अगर कांग्रेस को सबसे कमजोर वर्ग के साथ जरा सी भी हमदर्दी है तो वह संसद का विशेष सत्र बुलवाए और खाद्य सुरक्षा बिल की तरह ही दंगा विरोधी बिल पास करवाए। उन्होंने राहुल गांधी को सलाह दी कि वो अफसरान की लिखी हुई तकरीर को आखिरी न समझा करें। अपनी वालिदा व अन्य सीनियर नेताओं के तजुर्बे की मदद भी लिया करें। अचानक ही किसी की पगड़ी उछाल देने से काम नहीं चलेगा।
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