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सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर बनारस तक चर्चा
Rampur
Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
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रामपुर। रजा लाइब्रेरी में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार के अंतिम दिन वेद, सिंधु घाटी से लेकर बनारस तक की संस्कृति छाई रही। विद्वानों ने भारत के इतिहास़ और संस्कृति के बहुरंगी पहलुओं की जानकारी दी। तीन दिन तक चले सेमिनार में देश-विदेश से आए विद्वानों ने 61 शोधपत्र पढ़े और सेमिनार में शिरकत करने वालों को भारतीय इतिहास से रूबरू कराया।
भारतीय इतिहास और संस्कृति पर रामपुर रजा लाइब्रेरी के सभागार में चल रहा अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार रविवार को संपन्न हो गया। अंतिम दिन इतिहासकारों ने उपलब्ध विभिन्न पांडुलिपियों और किताबों के आधार पर भारत के विभिन्न कालों की जानकारी और संस्कृति से वाकिफ कराया। जम्मू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जिगर महमूद ने मराठा विषय पर शोधपत्र पढ़ते हुए बताया कि अहमदनगर के निजाम शाह के खिलाफ 1631 में मराठा शाहजी भोसले ने मुगलों का साथ दिया था और बदले में संगामनर, बेजापुर और जुनार की जागीर पाई थी।
प्रो. हमीद नाजिम ने दीदामारी की तारीख-ए-आजमी को 17वीं सदी के कश्मीर के सूफी और कवियों की जानकारी पाने को बेहतर स्रोत बताया। एएमयू के प्रोफेशनल असिस्टेंट ने मनाकिबे हेदरिया के हवाले से गाजीउद्दीन हैदर बादशाह के समय की संस्कृति व विभिन्न क्रियाकलापों से रूबरू कराया। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय की डा. अनीता ने संस्कृति के झरोखे में झांकते हुए मनु स्मृति तक का सफर कराया। डा. प्रभा शर्मा ने झीनी-झीनी बीनी चदरिया के हवाले बनारस के सामाजिक ताने बाने और संस्कृति की जानकारी दी। डा. सुनीता ने वेदों को उन्नति के लिए उपयोगी सिद्धातों और उपदेशों का अद्भुत संग्रह बताया। डा. सबिहा परवनी ने शब्दों के इस्तेमाल के आधार पर संस्कृति की जानकारी होना और डा. अहमद खान ने सिंधु घाटी सभ्यता को प्रस्तर धातु युग करार दिया। सेमिनार को डा. शरीफ अहमद, दरक्षा हसीन, डा. प्रीति गौतम, डा. जोहरा खातून, प्रो. अनीता त्यागी, डा. इसहाक, डा. मीनाक्षी ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इसके बाद हुए समापन समारोह में लाइब्रेरी के निदेशक प्रो. एसएम अजीज उद्दीन ने लाइब्रेरी को रामपुर के नवाबों द्वारा दी गई ऐतिहासिक धरोहरों का भंडार कहा।
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भारतीय इतिहास और संस्कृति पर रामपुर रजा लाइब्रेरी के सभागार में चल रहा अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार रविवार को संपन्न हो गया। अंतिम दिन इतिहासकारों ने उपलब्ध विभिन्न पांडुलिपियों और किताबों के आधार पर भारत के विभिन्न कालों की जानकारी और संस्कृति से वाकिफ कराया। जम्मू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जिगर महमूद ने मराठा विषय पर शोधपत्र पढ़ते हुए बताया कि अहमदनगर के निजाम शाह के खिलाफ 1631 में मराठा शाहजी भोसले ने मुगलों का साथ दिया था और बदले में संगामनर, बेजापुर और जुनार की जागीर पाई थी।
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प्रो. हमीद नाजिम ने दीदामारी की तारीख-ए-आजमी को 17वीं सदी के कश्मीर के सूफी और कवियों की जानकारी पाने को बेहतर स्रोत बताया। एएमयू के प्रोफेशनल असिस्टेंट ने मनाकिबे हेदरिया के हवाले से गाजीउद्दीन हैदर बादशाह के समय की संस्कृति व विभिन्न क्रियाकलापों से रूबरू कराया। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय की डा. अनीता ने संस्कृति के झरोखे में झांकते हुए मनु स्मृति तक का सफर कराया। डा. प्रभा शर्मा ने झीनी-झीनी बीनी चदरिया के हवाले बनारस के सामाजिक ताने बाने और संस्कृति की जानकारी दी। डा. सुनीता ने वेदों को उन्नति के लिए उपयोगी सिद्धातों और उपदेशों का अद्भुत संग्रह बताया। डा. सबिहा परवनी ने शब्दों के इस्तेमाल के आधार पर संस्कृति की जानकारी होना और डा. अहमद खान ने सिंधु घाटी सभ्यता को प्रस्तर धातु युग करार दिया। सेमिनार को डा. शरीफ अहमद, दरक्षा हसीन, डा. प्रीति गौतम, डा. जोहरा खातून, प्रो. अनीता त्यागी, डा. इसहाक, डा. मीनाक्षी ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इसके बाद हुए समापन समारोह में लाइब्रेरी के निदेशक प्रो. एसएम अजीज उद्दीन ने लाइब्रेरी को रामपुर के नवाबों द्वारा दी गई ऐतिहासिक धरोहरों का भंडार कहा।
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