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अकीदत व मोहब्बत के जज्बे से अदा करें हज का फरीजा
Updated Sat, 15 Jul 2017 01:42 AM IST
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अकीदत व मोहब्बत के जज्बे से अदा करें हज का फरीजा
रामपुर। मर्कजी दर्सगाहे एहलेसुन्नत अल जामेअतुल इस्लामिया और अंजुमन इस्लाहे कौम में हज यात्रियों को प्रशिक्षण दिया गया। एहराम बांधने का तरीका भी सिखाया। हज व उमरा के फजाइल और मसाइल भी बयान किए।
पुरानगंज स्थित दर्सगाहे एहले सुन्नत में हज के तरबियती कैंप का आगाज कुरान पाक की तिलावत से किया गया। साथ ही बारगाहे रिसालत में हदयाए नात पेश किया। सबसे पहले कारी मोहम्मद यामीन अशरफी ने मस्जिदे नबवी की तामीर और उसकी अजमत के बारे में बताया। मौलाना मुफ्ती नजफ अली कादरी ने एहराम बांधना सिखाया। मौलाना वली मोहम्मद रजवी ने मस्जिद नबवी में चालीस नमाजों की फजीलत और दुरूद व सलाम पेश करने की एहमियत पर रोशनी डाली। मौलाना वली अहमद उस्मानी रजवी ने हज व उमरा के फजाइल व मसाइल बयान किए। मौलाना तहिर उल कादरी रजवी ने आजमीने हज को सफरे हज की सुकून से तैयारी करने की तलकीन की। उन्होंने मक्का मोअज्जमा और मदीना मुनव्वरा में कयाम के बारे में तफसील से जानकारी दी। आखिर में कैंप के इंचार्ज मौलाना मुफ्ती शाहिद अली रजवी जमाली ने आजमीने हज को हिदायत दी कि हज व जियारत के इस मुकद्दस सफर में अपने जाती झगड़ों में नहीं पड़ें। बल्कि, सब्र, सुकून, अकीदत और मोहब्बत के जज्बे से शरशार होकर हज का फरीजा अदा करें। अपने गुनाहों से माफी मांगते रहें। इस मुकद्दस सफर में जो तकलीफ पहुंचे उसे खुशी से बर्दाश्त करें। सलातो सलाम और दुआ पर कैंप समाप्त हुआ। इस मौके पर सगीर अहमद अजहरी, हसीब अहमद जमाली, इश्तियाक हुसैन, मेराज अहमद भी थे। कैंप की निजामत मौलाना नाजिल रजा ने की। वहीं अंजुमन इस्लाहे कौम में भी हज यात्रियों को हज का प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें हज के अरकान से भी रूबरू कराया।
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रामपुर। मर्कजी दर्सगाहे एहलेसुन्नत अल जामेअतुल इस्लामिया और अंजुमन इस्लाहे कौम में हज यात्रियों को प्रशिक्षण दिया गया। एहराम बांधने का तरीका भी सिखाया। हज व उमरा के फजाइल और मसाइल भी बयान किए।
पुरानगंज स्थित दर्सगाहे एहले सुन्नत में हज के तरबियती कैंप का आगाज कुरान पाक की तिलावत से किया गया। साथ ही बारगाहे रिसालत में हदयाए नात पेश किया। सबसे पहले कारी मोहम्मद यामीन अशरफी ने मस्जिदे नबवी की तामीर और उसकी अजमत के बारे में बताया। मौलाना मुफ्ती नजफ अली कादरी ने एहराम बांधना सिखाया। मौलाना वली मोहम्मद रजवी ने मस्जिद नबवी में चालीस नमाजों की फजीलत और दुरूद व सलाम पेश करने की एहमियत पर रोशनी डाली। मौलाना वली अहमद उस्मानी रजवी ने हज व उमरा के फजाइल व मसाइल बयान किए। मौलाना तहिर उल कादरी रजवी ने आजमीने हज को सफरे हज की सुकून से तैयारी करने की तलकीन की। उन्होंने मक्का मोअज्जमा और मदीना मुनव्वरा में कयाम के बारे में तफसील से जानकारी दी। आखिर में कैंप के इंचार्ज मौलाना मुफ्ती शाहिद अली रजवी जमाली ने आजमीने हज को हिदायत दी कि हज व जियारत के इस मुकद्दस सफर में अपने जाती झगड़ों में नहीं पड़ें। बल्कि, सब्र, सुकून, अकीदत और मोहब्बत के जज्बे से शरशार होकर हज का फरीजा अदा करें। अपने गुनाहों से माफी मांगते रहें। इस मुकद्दस सफर में जो तकलीफ पहुंचे उसे खुशी से बर्दाश्त करें। सलातो सलाम और दुआ पर कैंप समाप्त हुआ। इस मौके पर सगीर अहमद अजहरी, हसीब अहमद जमाली, इश्तियाक हुसैन, मेराज अहमद भी थे। कैंप की निजामत मौलाना नाजिल रजा ने की। वहीं अंजुमन इस्लाहे कौम में भी हज यात्रियों को हज का प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें हज के अरकान से भी रूबरू कराया।
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